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  • Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: 21 कि.मी. लंबी सुरंग के लिए दूसरी टीबीएम का कटरहेड सावली शाफ़्ट में उतारा गया!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: 21 कि.मी. लंबी सुरंग के लिए दूसरी टीबीएम का कटरहेड सावली शाफ़्ट में उतारा गया!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: सावली (घनसोली) शाफ़्ट में दूसरी टनल बोरिंग मशीन (TBM) का कटरहेड उतारा गया। 13.6 मीटर व्यास और लगभग 350 टन वजन वाला यह विशाल घटक टीबीएम के मुख्य शील्ड की प्राथमिक असेंबली का अंतिम चरण है।

    यह दूसरी टीबीएम सावली (घनसोली) से अपनी यात्रा शुरू करेगी और विक्रोली की ओर आगे बढ़ेगी।पहली टीबीएम का कटरहेड इसी सप्ताह की शुरुआत में विक्रोली में उतारा गया था। अब दोनों टीबीएम अंतिम असेंबली और कमीशनिंग ट्रायल से गुजरेंगी, जिसके बाद जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में इनकी प्रारंभिक ड्राइव शुरू की जाएगी।

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    इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण
    13.6 मीटर व्यास वाला यह कटरहेड एक ऐसी एकल सुरंग की खुदाई के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें हाई-स्पीड कॉरिडोर की अप और डाउन दोनों लाइनें समाहित हो सके यह यूनिट 84 कटर डिस्क, 124 स्क्रैपर और 16 बकेट लिप्स से सुसज्जित है, जो खुदाई के दौरान चट्टानों को काटने और मलबा हटाने का कार्य कुशलतापूर्वक करती हैं

    टीबीएम से संबंधित अतिरिक्त जानकारी
    *प्राप्त टीबीएम की संख्या : 2
    *टीबीएम 1 का वजन : 3080 टन
    *टीबीएम 2 का वजन : 3184 टन
    *कटरहेड का व्यास : 13.6 मीटर
    *टीबीएम का प्रकार : मिक्स शील्ड / स्लरी आधारित

    प्रत्येक टीबीएम की कुल लंबाई 95.32 मीटर है और इसमें कई महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं, जैसे कटर व्हील, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, इरेक्टर, मेन शील्ड, टेल शील्ड तथा टनलिंग कार्यों को समर्थन देने वाले चार विशेष गैन्ट्री।यह मशीनें अधिकतम 4 RPM (रिवोल्यूशन प्रति मिनट) की कटरहेड गति और अधिकतम 49 मि.मी. प्रति मिनट की खुदाई क्षमता के साथ कार्य कर सकती हैं, जिससे उच्च सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए नियंत्रित और सतत सुरंग निर्माण सुनिश्चित होता है।

  • Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: परियोजना के लिए भारतीय रेलवे ट्रैक पर 130 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण किया गया!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: परियोजना के लिए भारतीय रेलवे ट्रैक पर 130 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण किया गया!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात के भरूच जिले के त्रालसी गांव के पास भारतीय रेलवे ट्रैक पर 330 मीटर लंबे (100+130,100 मीटर) स्टील ब्रिज के 130 मीटर लंबे स्पैन का सफलतापूर्वक निर्माण पूरा किया गया। यह ब्रिज वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सूरत-वडोदरा सेक्शन के बीच डीएफसीसी ट्रैक को पार करता है।यह स्टील ब्रिज तीन स्पैन वाला ब्रिज है, जिसमें 100+130 मीटर का सतत (Continuous) स्पैन तथा 100 मीटर का Simply Supported स्पैन शामिल है।

    इनमें से 130 मीटर लंबे स्पैन का लॉन्चिंग कार्य 16 मई 2026 को पूरा किया गया। लगभग 18 मीटर ऊंचाई और 15.5 मीटर चौड़ाई वाले इस स्पैन का वजन लगभग 2900 मीट्रिक टन है।100 मीटर लंबे Simply Supported स्पैन, जिसका वजन लगभग 1500 मीट्रिक टन है, को मार्च 2026 में निर्माण स्थल पर ही (इन-सीटू) स्थापित किया गया था। शेष 100 मीटर लंबे सतत स्पैन, जिसका वजन लगभग 1600 मीट्रिक टन है, को भी निर्माण स्थल पर ही स्थापित किया जाएगा।

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    ब्रिज संरचना (100+130 मीटर सतत स्पैन तथा 100 मीटर Simply Supported स्पैन) के पूर्ण होने पर इसका कुल वजन लगभग 6100 मीट्रिक टन होगा। गुजरात के उमरगांव स्थित कार्बन फैक्ट्री वर्कशॉप में निर्मित इन स्टील ब्रिजों को 100 वर्षों की आयु को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। 130 मीटर लंबे इस स्पैन के निर्माण में लगभग 1,21,373 टॉर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ (TTHS) बोल्ट, C5 सिस्टम पेंटिंग तथा मेटैलिक बेयरिंग का उपयोग किया गया है।

    इसे जमीन से लगभग 14 मीटर ऊंचाई पर अस्थायी ट्रेस्टलों पर असेंबल किया गया तथा दो सेमी-ऑटोमैटिक जैक की सहायता से स्वचालित प्रणाली द्वारा आगे बढ़ाया गया। प्रत्येक जैक में मैक-अलॉय बार्स के माध्यम से 250 टन तक की पुशिंग क्षमता है।फ्रेट ट्रैक पर सावधानीपूर्वक समन्वित यातायात व्यवस्थाओं के तहत लॉन्चिंग कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    इन व्यवस्थाओं ने चरणबद्ध तरीके से कार्य निष्पादन सुनिश्चित करते हुए लॉन्चिंग की सुरक्षा और सटीकता बनाए रखी तथा मालगाड़ियों की आवाजाही में न्यूनतम बाधा सुनिश्चित की।17 स्टील ब्रिज में से 14 स्टील ब्रिज गुजरात में पूरे हो चुके हैं। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए 28 स्टील ब्रिज की योजना है।

  • MP Highway Project: तीन सुरंगों से बदलेगी मध्य भारत की तस्वीर, इंदौर-ओंकारेश्वर सफर होगा आसान

    नयी दिल्ली: Ministry of Road Transport and Highways ने कहा है कि Madhya Pradesh में इंदौर-खंडवा मार्ग पर बन रही तीन आधुनिक सुरंगों और चार लेन राजमार्ग परियोजना से यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। मंत्रालय के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद Indore से Omkareshwar तक का सफर घटकर लगभग एक घंटा रह जाएगा। इससे दुर्गम घाट क्षेत्रों में दुर्घटनाओं और यातायात जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। (MP Highway Project)

    जानकारी के मुताबिक इंदौर-इच्छापुर कॉरिडोर के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-347 बीजी के 33.4 किलोमीटर लंबे तेजाजी नगर-बलवारा खंड को दो लेन से चार लेन में बदला जा रहा है। करीब 924 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 88 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और इसके इस वर्ष के अंत तक तैयार होने की संभावना है।

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    परियोजना के तहत दुर्गम घाट क्षेत्रों में नई ऑस्ट्रियन टनलिंग विधि (NATM) से तीन सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें 575 मीटर लंबी भेरूघाट सुरंग, 480 मीटर लंबी बैग्राम सुरंग और 550 मीटर लंबी चोराल घाट सुरंग शामिल हैं। इन सुरंगों से दुर्घटना संभावित घाट क्षेत्रों में यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा।

    मंत्रालय ने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद Khandwa, Burhanpur, Jalgaon और इंदौर के बीच संपर्क बेहतर होगा। साथ ही Simhastha Kumbh 2028 के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही भी सुचारु हो सकेगी। परियोजना में आधुनिक जल निकासी प्रणाली, क्रैश बैरियर, सड़क सुरक्षा संकेतक, वर्षा जल प्रबंधन और हरित पट्टी विकास जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, ताकि राजमार्ग को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।