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  • PM Modi-Myanmar Meeting: भारत और म्यांमार के बीच व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर हुई अहम चर्चा!

    PM Modi-Myanmar Meeting: भारत और म्यांमार के बीच व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर हुई अहम चर्चा!

    PM Modi-Myanmar Meeting: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति Min Aung Hlaing से नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। राष्ट्रपति बनने के बाद मिन आंग हलाइंग की यह पहली भारत यात्रा है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, रक्षा सहयोग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

    बैठक के दौरान भारत और म्यांमार ने रक्षा, सीमा सुरक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), रेयर अर्थ्स, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने लंबित कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

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    विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत की नीति म्यांमार के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि अलगाव की बजाय संवाद और सहयोग से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। बैठक में साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और म्यांमार ने पिछले 18 महीनों में संयुक्त अभियान चलाकर 2,400 से अधिक भारतीय नागरिकों को साइबर ठगी केंद्रों से बचाया है।

    म्यांमार भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश माना जाता है क्योंकि दोनों देशों के बीच लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। सुरक्षा, व्यापार और पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिरता को देखते हुए भारत म्यांमार के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि पर तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले को अवैध बताते हुए किया खारिज!

    Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि पर तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले को अवैध बताते हुए किया खारिज!

    Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि के संबंध में फैसला सुनाने वाले तथाकथित मध्यस्थता न्यायाधिकरण को अवैध बताते हुए उसके फैसले को खारिज कर दिया है। भारत ने इस संबंध में अपने पहले के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा है कि उसने इस तथाकथित न्यायाधिकरण को कभी मान्यता नहीं दी है इसलिए इसके द्वारा सुनाये गये फैसले अवैध हैं। भारत ने जोर देकर कहा है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका निर्णय अभी भी बरकरार है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले से संबंधित मीडिया के प्रश्नों के जवाब में शनिवार को कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 15 मई को एक ” फैसला ” दिया है, जिसे इसने सिंधु जल संधि के सामान्य व्याख्या के मुद्दों पर पहले जारी फैसले के पूरक के रूप में “अधिकतम जलाशय” से संबंधित बताया है।

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    उन्होंने कहा,”भारत तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायाधिकरण की सभी पूर्व घोषणाओं को दृढ़तापूर्वक खारिज किया है। भारत ने कभी भी इस तथाकथित न्यायाधिकरण की स्थापना को मान्यता नहीं दी है। इसके द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही, या निर्णय अवैध है। भारत का सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय अब भी लागू है।”

    भारत ने पिछले वर्ष मई में पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद कड़ा कदम उठाते हुए इस संधि को ‘स्थगित’ कर दिया था। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से खत्म नहीं कर देता। भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।