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  • National Investment and Infrastructure Fund: राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष में 30 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंत्रिमंडल की मंजूरी!

    National Investment and Infrastructure Fund: राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष में 30 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंत्रिमंडल की मंजूरी!

    National Investment and Infrastructure Fund: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) की नयी और आगामी फंड योजनाओं के लिए सरकार की ओर से 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी है।

    वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में पिछले सप्ताह हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। इसके साथ ही एनआईआईएफ में केंद्र सरकार की कुल प्रतिबद्धता 60,000 करोड़ रुपये हो गयी है।

    एनआईआईएफ एक सरकार-समर्थित निवेश कोष है, जिसका संचालन और प्रबंधन राष्ट्रीय इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) द्वारा पेशेवर तरीके से किया जाता है। केंद्र सरकार की एनआईआईएफ में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्तमान में वह अपने विभिन्न फंडों और निवेश रणनीतियों के माध्यम से लगभग 40,000 करोड़ रुपये की पूंजी का प्रबंधन कर रहा है।

    मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 30,000 करोड़ रुपये की यह अतिरिक्त प्रतिबद्धता परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी अवसंरचना, ई-मोबिलिटी तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में निवेश को और गति देगी। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। यह अतिरिक्त राशि एनआईआईएफ के दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस्ड फंड की स्थापना के लिए उपयोग की जायेगी।

  • Jio Platforms IPO: अंबानी का नया प्लान! आईपीओ में केवल फ्रेश इश्यू संभव!

    Jio Platforms IPO: अंबानी का नया प्लान! आईपीओ में केवल फ्रेश इश्यू संभव!

    Jio Platforms IPO: दो सूत्रों ने सोमवार को बताया कि भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी की Reliance Jio Platforms ने अपने मुंबई IPO की योजना को बदलकर अब इसे सिर्फ़ फ़ंड जुटाने का ज़रिया बना लिया है। कंपनी ने अपनी पिछली योजना छोड़ दी है, जिसके तहत बड़े विदेशी निवेशकों को अपने कुछ शेयर बेचने की अनुमति मिलने वाली थी।

    Jio Platforms, जो यूज़र्स के मामले में China Mobile के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, के निवेशकों में Meta, Alphabet की Google और Vista Equity Partners शामिल हैं। इसके IPO (Initial Public Offering) का लंबे समय से इंतज़ार था और यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।

    Reuters ने पहले बताया था कि कंपनी ने अपने विदेशी निवेशकों के साथ बातचीत की थी, जिसमें हर निवेशक को IPO में अपनी व्यक्तिगत हिस्सेदारी का 8% बेचने की अनुमति देने की बात हुई थी। कुल मिलाकर, यह कंपनी की 2.5% हिस्सेदारी के बराबर होता। इस प्रक्रिया को भारत में ‘ऑफ़र फ़ॉर सेल’ (Offer-for-Sale) कहा जाता है। इसके ज़रिए नए निवेशक कंपनी में आ पाते और विदेशी निवेशक बिना किसी नए फ़ंड के अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच पाते।

    इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताया कि अब इस योजना को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर बात की, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था।

    अब Reliance की योजना कंपनी के कुल आकार के 2.5% के बराबर नया फ़ंड जुटाने की है। सूत्रों में से एक ने कहा, “निवेशक अपने शेयर बेचने के इच्छुक नहीं थे और वे लंबे समय तक कंपनी में निवेशित रहना चाहते थे।”

    The Economic Times ने सोमवार को सबसे पहले यह रिपोर्ट दी थी कि कंपनी अपने IPO के ज़रिए अब सिर्फ़ नया फ़ंड जुटाने पर फ़ोकस करेगी। Jio Platforms ने Reuters के इस मामले पर टिप्पणी मांगने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।

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    युद्ध का साया
    Jio Platforms के IPO के लिए फ़ाइलिंग मार्च में ही होने की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान को लेकर शुरू हुए युद्ध के चलते इसे टाल दिया गया। इस युद्ध के कारण निवेशकों का नई लिस्टिंग में निवेश करने का उत्साह कम हो गया था।

    मार्च में, Walmart के समर्थन वाली भारतीय फ़िनटेक कंपनी PhonePe ने भी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक पूंजी बाज़ारों में अस्थिरता का हवाला देते हुए अपने IPO की योजना को रोक दिया था। Jio Platforms के IPO में हुई देरी के बारे में बात करते हुए, पहले सूत्र ने कहा कि ईरान युद्ध निश्चित रूप से एक “बाधा” (overhang) बना हुआ है।

    Jio Platforms की लिस्टिंग, अंबानी के उस लंबे समय के विज़न का एक अहम हिस्सा है जिसके तहत वे Reliance को तेल और केमिकल की एक बड़ी कंपनी से बदलकर एक ऐसी “सब कुछ वाली कंपनी” बनाना चाहते हैं जो कंज्यूमर, रिटेल और टेक्नोलॉजी, हर क्षेत्र में काम करे।

    2020 में, Jio ने दुनिया भर के बड़े निवेशकों से फंड जुटाया। ये निवेशक भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर दांव लगा रहे थे—एक ऐसी अर्थव्यवस्था जहाँ स्मार्टफोन का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है, इंटरनेट की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं, और जहाँ की युवा आबादी, जो मोबाइल का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करती है, अब ऑनलाइन आ रही है।

    नवंबर में, इन्वेस्टमेंट बैंक Jefferies ने अनुमान लगाया था कि Reliance Jio का वैल्यूएशन $180 बिलियन होगा। जनवरी में सूत्रों ने Reuters को बताया कि यह IPO $4 बिलियन तक का हो सकता है, हालाँकि इसके अंतिम आँकड़े बाद में तय किए जाएँगे। Reliance Jio Platforms ने अपनी मुंबई लिस्टिंग को मैनेज करने के लिए 17 बैंकों को नियुक्त किया है।