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  • HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिला का प्रसव कराने से इंकार करने के मामले में जिला महिला अस्पताल हमीरपुर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मौदहा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ को मामले की जांच सौंपी गई है।

    जांच अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने मंगलवार को बताया कि महोबा जिले के खन्ना क्षेत्र निवासी दंपती एचआईवी पॉजिटिव हैं। महिला के पति ने प्रसव के लिए पत्नी को मौदहा सीएचसी में भर्ती कराया था, जहां एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिलने पर स्टाफ ने प्रसव कराने से मना कर दिया और जिला महिला अस्पताल हमीरपुर रेफर कर दिया।

    उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल पहुंचने पर भी रेफरल कार्ड देखते ही महिला को तत्काल कानपुर रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एचआईवी पॉजिटिव प्रसूताओं का हर हाल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराया जाए। इसके लिए विशेष किट और चिकित्सकीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है।

    बताया गया कि 21 मई को महिला ने कानपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव कराया, जिसमें परिवार का लगभग 40 हजार रुपये खर्च हो गया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हमीरपुर पहुंचकर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल से शिकायत की। जिलाधिकारी ने मामले की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गीतम सिंह को सौंपी, जिन्होंने आगे जांच डिप्टी सीएमओ को दे दी।

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    जांच के दौरान मौदहा सीएचसी अधीक्षक डॉ. रजत तिवारी ने कहा कि स्टाफ ने महिला को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया था और उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. के.एस. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में पूर्व में एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं तथा इसके लिए अलग ऑपरेशन थिएटर और विशेष किट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि महिला को रेफर किए जाने की जानकारी की जांच कराई जाएगी।

    डॉ. मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल का अधिकांश स्टाफ इस प्रकार के मामलों में प्रशिक्षित नहीं है। वहीं जांच अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने दावा किया कि एचआईवी संक्रमित महिलाओं के प्रसव संबंधी मामलों में स्वास्थ्य केंद्रों पर लगभग 90 प्रतिशत स्टाफ अप्रशिक्षित है, जबकि सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में एचआईवी जांच की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई प्रसूताओं की जांच किए बिना ही प्रसव करा दिया जाता है। साथ ही महिला अस्पताल की काउंसलर को पुरुष अस्पताल से संबद्ध किए जाने के कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों की सूचना आईसीटीसी को दी जानी चाहिए, लेकिन कई बार ऐसा नहीं किया जाता।

  • Transfer Voucher for PNG Users: पीएनजी कनेक्शन वालों को एलपीजी सिलेंडर जमा कराने पर ट्रांसफर वाउचर का विकल्प!

    Transfer Voucher for PNG Users: पीएनजी कनेक्शन वालों को एलपीजी सिलेंडर जमा कराने पर ट्रांसफर वाउचर का विकल्प!

    Transfer Voucher for PNG Users: केंद्र सरकार ने पीएनजी कनेक्शन वाले ग्राहकों को रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर जमा कराने पर ट्रांसफर वाउचर का विकल्प प्रदान किया है जिससे वे भविष्य में गैर-पीएनजी क्षेत्र में जाने पर अपना एलपीजी कनेक्शन बरकरार रख सकेंगे।

    सरकार ने इस साल मार्च में जारी आदेश में संशोधन के लिए सोमवार को एक अधिसूचना जारी की। इसमें पीएनजी कनेक्शन वाले ग्राहकों को पीएनजी कनेक्शन लगने के 30 दिन के भीतर एलपीजी कनेक्शन छोड़ने या गैर-पीएनजी क्षेत्र में भविष्य में एलपीजी कनेक्शन लेने के लिए ट्रांसफर वाउचर लेने का विकल्प दिया गया है।

    पश्चिम एशिया संकट के कारण एलपीजी की उपलब्धता में कमी के बाद सरकार ने गत 14 मार्च को जारी पिछले आदेश में बदलाव कर लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के प्रोत्साहित करने की कोशिश की है। मंत्रालय ने कहा है कि इस संशोधन का उद्देश्य पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने वाले घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट और सुविधा प्रदान करना है।

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    यह संशोधन उन उपभोक्ताओं को काफी राहत देगा जो भविष्य में ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो सकते हैं जहां पीएनजी का बुनियादी ढांचा उपलब्ध न हो। विशेष रूप से जिनकी नौकरी में तबादले होते रहते हैं, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों, छात्रों और/या गैर-पीएनजी क्षेत्रों में स्थानांतरित होने वाले परिवारों के लिए यह लाभदायक होगा।

    पिछले आदेश में सरकार ने पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन रखने वाले ग्राहकों को “तत्काल” एलपीजी कनेक्शन छोड़ने का आदेश दिया था। उसमें ट्रांसफर वाउचर जैसी सुविधा के जरिये भविष्य के लिए कनेक्शन सुरक्षित रखने का विकल्प नहीं दिया गया था। इस कारण कई ऐसे लोग एलपीजी सिलेंडर जमा करने से कतरा रहे थे जिन्हें आशंका थी कि आगे नया कनेक्शन लेने के लिए उन्हें परेशानी उठानी होगी और बढ़े हुए शुल्क देने होंगे।

  • Twisha Sharma Death Case: उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील!

    Twisha Sharma Death Case: उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील!

    Twisha Sharma Death Case: उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि पीड़िता के परिवार या आरोपियों के परिवार के बयानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित न किया जाए।

    शीर्ष अदालत ने ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत त्रुटियों से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने की।

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “कुछ घटनाक्रमों से हमें पीड़ा हुई है। हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों पर ज्यादा ध्यान न दे। मामले को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।”

    उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि मामले में एक पूर्व जिला न्यायाधीश और एक वकील के खिलाफ आरोप होने के कारण न्यायपालिका द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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    शीर्ष अदालत ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि पीड़िता के परिवार या आरोपियों के परिवार के बयानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित न किया जाए। नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा पूर्व ‘मिस पुणे’ विजेता थीं।

    उन्होंने पांच महीने पहले डेटिंग ऐप के माध्यम से परिचय होने के बाद भोपाल निवासी वकील समर्थ सिंह से विवाह किया था। समर्थ सिंह का परिवार न्यायपालिका से जुड़ा हुआ बताया गया है। समर्थ सिंह जहां पेशे से वकील हैं, वहीं उनकी मां गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश और वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग की अध्यक्ष हैं।

    विवाह के महज पांच महीने बाद 12 मई 2026 को ट्विशा शर्मा अपने घर में जिम्नास्टिक रस्सी से लटकी हुई पाई गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई की एक टीम ट्विशा शर्मा की मृत्यु मामले की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में लेने के लिए भोपाल रवाना हो चुकी है।

  • DM Directs Strict Action: 46.5 लाख ज़ब्त, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश!

    DM Directs Strict Action: 46.5 लाख ज़ब्त, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश!

    DM Directs Strict Action: ठाणे सिटी क्राइम ब्रांच यूनिट-1 और राशन डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट की जॉइंट टीम ने मुंबई-नासिक हाईवे पर खारेगांव टोल प्लाजा के पास एक बड़ी और बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने खाने के तेल के नाम पर डीज़ल जैसा ज्वलनशील पदार्थ गैर-कानूनी तरीके से ले जा रहे एक बड़े टैंकर को ज़ब्त किया है और इस कार्रवाई में 46 लाख 50 हज़ार रुपये का भारी मात्रा में सामान ज़ब्त किया गया है।

    लोगों को गुमराह करने के लिए जिस टैंकर की बात हो रही है, उस पर ‘खाने का तेल’ लिखा हुआ था। इस मामले में मुख्य आरोपी ड्राइवर समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ कलवा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। क्राइम ब्रांच यूनिट-1 को मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर, खारेगांव टोल प्लाजा से पहले मुंब्रा टर्नपाइक रोड के पास जाल बिछाया गया। जब इस जगह पर एक संदिग्ध टाटा कंपनी के टैंकर (सीरियल नंबर MH-46-BB-7134) को रोककर जांच की गई, तो उसमें बड़ी मात्रा में ज्वलनशील लिक्विड मिला।

    टैंकर ड्राइवर के पास इस डीजल जैसे पदार्थ को ले जाने के लिए कोई लाइसेंस, खरीद बिल या वैध दस्तावेज नहीं थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए, राशन वितरण विभाग, ठाणे के डिप्टी कंट्रोलर के आदेश पर, राशन वितरण अधिकारी सुभाष रामनाथ डुंबरे और उनकी टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया। इस संयुक्त जांच के दौरान, टैंकर के 5 डिब्बों में कुल 25,000 लीटर अवैध डीजल जैसा पदार्थ मिला। जब्त किए गए सामान में 24.50 लाख रुपये कीमत का 25,000 लीटर डीजल जैसा पेट्रोलियम प्रोडक्ट और 22 लाख रुपये कीमत का एक टाटा टैंकर शामिल है।

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    नियमों के मुताबिक, जांच अधिकारियों ने केमिकल टेस्टिंग के लिए मौके से सैंपल इकट्ठा किए हैं और टैंकर और दूसरा सामान पुलिस को सौंप दिया है। शुरुआती जांच में यह ज़रूरी जानकारी सामने आई है कि सभी आरोपियों ने अपने फायदे के लिए मिलीभगत करके विरार खाड़ी के किनारे नाव से लाए गए डीज़ल को टैंकर में लोड किया था और वे इसे नासिक ले जाने की प्लानिंग कर रहे थे। आरोपियों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के ट्रांसपोर्ट के लिए किसी भी सही नियम का पालन किए बिना एक नॉर्मल टैंकर में इतना खतरनाक सामान ट्रांसपोर्ट करके लोगों की जान को बहुत बड़ा खतरा पैदा करने का काम किया है।

    इस मामले में मुख्य आरोपी ड्राइवर धर्मेंद्र कुमार श्यामलाल पटेल (उम्र 37, वाशी, नवी मुंबई का रहने वाला) को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही, टैंकर मालिक रितेश अभय नारायण सिंह (निवासी दिवा, ठाणे) और पालघर और सूरत के 7 अन्य साथियों, रोशन शिरोडकर, नितिन कोली, राजू पंडित, दीपक पवार, सागर पाटिल और अनिल सूरत के नाम भी सामने आए हैं। राशन डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर सुभाष रामनाथ डुंबरे की शिकायत पर सभी आरोपियों के खिलाफ एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955, मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल ऑर्डर 2005 और बायोडीजल पॉलिसी 2021 की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है और पुलिस इंस्पेक्टर अशोक रावजी उटेकर मामले की आगे की जांच कर रहे हैं।

    इस बड़े ऑपरेशन के बैकग्राउंड में, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल और डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर सरजेराव मस्के-पाटिल ने ठाणे जिले के लोगों से पब्लिकली अपील की है कि जिले में डीजल और इसी तरह के फ्यूल का काफी स्टॉक मौजूद है और लोगों को घबराने की कोई बात नहीं है। लोगों को कोई एक्स्ट्रा फ्यूल जमा नहीं करना चाहिए और फ्यूल की कमी की किसी भी अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए। डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने यह भी चेतावनी दी है कि गैर-कानूनी ट्रांसपोर्टेशन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।