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  • Eknath Shinde Hospitalized After Health Deteriorates: ऑपरेशन टाइगर की व्यस्तता के बीच बिगड़ी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तबीयत, अस्पताल में भर्ती; हालत स्थिर

    Eknath Shinde Hospitalized After Health Deteriorates: ऑपरेशन टाइगर की व्यस्तता के बीच बिगड़ी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तबीयत, अस्पताल में भर्ती; हालत स्थिर

    मुंबई: महाराष्ट्र(Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(EknathShinde) की तबीयत शुक्रवार देर रात अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें ठाणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पिछले कई दिनों से राज्य के मानसून सत्र (MonsoonSession) और कथित “ऑपरेशन टाइगर”(OperationTiger) के तहत लगातार राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के कारण शिंदे अत्यधिक थकान और लगातार दौड़भाग का सामना कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले से बुखार भी था, लेकिन उन्होंने व्यस्त कार्यक्रमों के चलते पर्याप्त आराम नहीं किया। इसके बाद उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया।

    देर रात तक चलता रहा पार्टी प्रवेश कार्यक्रम

    गुरुवार देर रात गंगूबाई शिंदे सभागृह में शिवसेना (ठाकरे गुट) की उपनेता शुभांगी पाटील ने शिवसेना (ShivSena) में प्रवेश किया। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम देर रात करीब सवा एक बजे तक चला।

    हालांकि, इस कार्यक्रम में एकनाथ शिंदे शामिल नहीं हो सके। उनकी अनुपस्थिति में सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में शुभांगी पाटील का पार्टी प्रवेश संपन्न हुआ। पहले यह कार्यक्रम स्वयं एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में आयोजित होना था, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे इसमें शामिल नहीं हो पाए।

    ‘ऑपरेशन टाइगर’ के कारण लगातार बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

    हाल के दिनों में एकनाथ शिंदे लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। “ऑपरेशन टाइगर” के तहत उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक रणनीतियों पर काम किया। इसी दौरान वे कई बार दिल्ली भी गए।

    राजनीतिक घटनाक्रम में शिवसेना (ठाकरे गुट) के छह सांसदों का शिंदे गुट के साथ आना बड़ी सफलता माना गया। इसके अलावा मुंबई के वरिष्ठ नेता सचिन आहिर भी शिंदे गुट के साथ जुड़े, जिन्हें बाद में विधान परिषद का उपसभापति बनाया गया।

    डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी (HealthUpdate)

    चिकित्सकों के अनुसार, लगातार काम का दबाव, पर्याप्त आराम न मिलना और बुखार के बावजूद सक्रिय रहने के कारण उनकी तबीयत प्रभावित हुई। फिलहाल डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि उनकी हालत स्थिर है और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल दी जा रही है। राजनीतिक हलकों में उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है और पार्टी के कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

  • Maharashtra Food Testing: तुकाराम मुंढे के आने के बाद महाराष्ट्र में खाद्य जांच को मिली रफ्तार; लंबित नमूनों का तेजी से निपटारा!

    Maharashtra Food Testing: तुकाराम मुंढे के आने के बाद महाराष्ट्र में खाद्य जांच को मिली रफ्तार; लंबित नमूनों का तेजी से निपटारा!

    Maharashtra Food Testing: महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच को तेज करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ा अभियान शुरू किया है। आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर राज्य की प्रयोगशालाओं में लंबित खाद्य नमूनों की जांच में उल्लेखनीय तेजी आई है। एफडीए के अनुसार, जून 2026 में खाद्य नमूनों की जांच की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 462 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    एफडीए के सह आयुक्त (खाद्य) ने गुरुवार को बताया कि खाद्य नमूनों की जांच में तेजी लाने के लिए उपलब्ध मानव संसाधन का प्रभावी उपयोग, बैच प्रणाली के माध्यम से उपकरणों का बेहतर इस्तेमाल, दो शिफ्टों में कामकाज, प्राप्त नमूनों का श्रेणीवार परीक्षण तथा दूध, दुग्ध उत्पादों, नाशवान खाद्य पदार्थों और प्रतिबंधित उत्पादों के नमूनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच जैसी कई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

    मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर स्थित एफडीए की प्रयोगशालाओं में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा एकत्रित नमूनों की गुणवत्ता जांच की जाती है। आयुक्त के मार्गदर्शन में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के बाद प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एफडीए के अनुसार, 1 जून 2026 तक प्रयोगशालाओं में 13,474 खाद्य नमूने जांच के लिए लंबित थे। इनमें से 7,494 नमूनों की जांच पूरी कर ली गई, जो कुल लंबित मामलों का 56 प्रतिशत है।

    जांच के दौरान 4,091 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें अमानक (सब-स्टैंडर्ड) घोषित किया गया, जो जांच किए गए नमूनों का लगभग 54 प्रतिशत है। इसके विपरीत, जून 2025 में प्रयोगशालाओं को 9,403 नमूने प्राप्त हुए थे, जिनमें से केवल 1,622 नमूनों की जांच पूरी हो सकी थी। उस समय जांच का प्रतिशत मात्र 17 प्रतिशत था। दोनों वर्षों की तुलना में खाद्य नमूनों की जांच में 462 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता में आए बड़े सुधार को दर्शाती है।

    एफडीए ने बताया कि भविष्य में भी जांच प्रक्रिया को और अधिक तेज एवं प्रभावी बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। इसके लिए गुणवत्ता के साथ-साथ कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तीन नई प्रयोगशालाएं होंगी शुरू वर्तमान में राज्य में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।

    इनके अलावा तीन नई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निर्माण कार्य प्रगति पर है। विभाग का कहना है कि नई प्रयोगशालाएं शुरू होने के बाद राज्यभर से प्राप्त होने वाले खाद्य नमूनों की जांच और अधिक तेजी से होगी तथा परीक्षण के अभाव में कोई भी नमूना लंबे समय तक लंबित नहीं रहेगा। सरकार का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं पारदर्शी बनाना है।

  • Ghodbunder Road Inspection: लगातार दूसरे दिन ठाणे महापौर शर्मिला पिंपळोलकर ने किया घोड़बंदर रोड का निरीक्षण, जलभराव रोकने के दिए निर्देश!

    Ghodbunder Road Inspection: लगातार दूसरे दिन ठाणे महापौर शर्मिला पिंपळोलकर ने किया घोड़बंदर रोड का निरीक्षण, जलभराव रोकने के दिए निर्देश!

    Ghodbunder Road Inspection: लगातार हो रही बारिश के बीच ठाणे महानगरपालिका की महापौर शर्मिला पिंपळोलकर ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन घोड़बंदर रोड क्षेत्र का दौरा कर जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी पानी भर रहा है, वहां तत्काल पंप लगाकर जल निकासी सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    निरीक्षण के दौरान कापूरबावड़ी स्थित पेपर प्रोडक्ट कंपनी क्षेत्र, मानपाड़ा मेट्रो स्टेशन, आनंद डी-मार्ट परिसर तथा बालकूम के महालक्ष्मी नगर क्षेत्र का दौरा किया गया। मानपाड़ा में नाले के चौड़ीकरण से जल निकासी संतोषजनक पाई गई, जबकि मेट्रो निर्माण कार्य के कारण खराब हुई सड़क को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश एमएमआरडीए और मेट्रो अधिकारियों को दिए गए।

    बालकूम के महालक्ष्मी नगर में एक दीवार गिरने से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने की जानकारी मिलने पर महापौर ने मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने, जलभराव होते ही तत्काल निकासी की व्यवस्था करने तथा नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

  • Scholarship Exams: स्कॉलरशिप परीक्षा में ज़िला परिषद स्कूलों का शानदार प्रदर्शन; क्लास 5 और 8 के 395 स्टूडेंट्स क्वालिफ़ाई हुए!

    Scholarship Exams: स्कॉलरशिप परीक्षा में ज़िला परिषद स्कूलों का शानदार प्रदर्शन; क्लास 5 और 8 के 395 स्टूडेंट्स क्वालिफ़ाई हुए!

    Scholarship Exams: ज़िला परिषद ठाणे के स्कूलों ने महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल, पुणे द्वारा आयोजित प्री-अपर प्राइमरी (क्लास 5) और प्री-सेकेंडरी (क्लास 8) स्कॉलरशिप परीक्षा 2026 में शानदार सफलता हासिल की है। ज़िले के कुल 395 स्टूडेंट्स ने स्कॉलरशिप के लिए क्वालिफ़ाई किया है, जिसमें क्लास 5 के 384 स्टूडेंट्स और क्लास 8 के 11 स्टूडेंट्स शामिल हैं।

    ज़िले के 660 स्कूलों के 5,019 स्टूडेंट्स ने क्लास 5 की प्री-अपर प्राइमरी स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए रजिस्टर किया था। उनमें से 4,670 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए। कुल 384 स्टूडेंट्स ने क्वालिफाई किया है और 152 स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप मिली है। तालुक के हिसाब से रिजल्ट में, शहापुर तालुका ने जिले में सबसे ज़्यादा 256 स्टूडेंट्स के साथ टॉप पोजीशन हासिल की है।

    मुरबाद तालुका में 67, भिवंडी में 34, कल्याण में 16 और अंबरनाथ में 11 स्टूडेंट्स क्वालिफाई हुए हैं। साथ ही, जिले के 80 स्कूलों के 686 स्टूडेंट्स ने क्लास 8 प्री-सेकेंडरी स्कॉलरशिप एग्जाम के लिए रजिस्टर किया था। उनमें से 615 स्टूडेंट्स एग्जाम में शामिल हुए। कुल 11 स्टूडेंट्स क्वालिफाई हुए और 10 स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप मिली है।

    क्लास 8 में, शहापुर तालुका के 8 स्टूडेंट्स क्वालिफाई हुए हैं और 7 स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप मिली है। मुरबाद तालुका में 2 और अंबरनाथ तालुका में 1 ने क्वालिफाई किया है। इस सफलता के पीछे स्टूडेंट्स की कड़ी मेहनत, टीचर्स का गाइडेंस, प्रिंसिपल्स की प्लानिंग और पेरेंट्स का सहयोग अहम रहा है। एजुकेशन ऑफिसर (प्राइमरी) बालासाहेब रक्षे ने कहा कि ज़िला परिषद स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ कॉम्पिटिटिव एग्जाम और स्कॉलरशिप एग्जाम के लिए लगातार स्पेशल ट्रेनिंग, गाइडेंस क्लास और प्रैक्टिस टेस्ट ऑर्गनाइज़ किए जा रहे हैं।

    “ज़िला परिषद स्कूलों के 395 स्टूडेंट्स ने स्कॉलरशिप एग्जाम में सफल होकर ज़िले का नाम रोशन किया है। खासकर शाहपुर तालुका का शानदार परफॉर्मेंस इंस्पायरिंग है। ज़िला परिषद अच्छी पढ़ाई, कॉम्पिटिटिव तैयारी और स्टूडेंट्स के ऑल-राउंड डेवलपमेंट के लिए कमिटेड है और भविष्य में शाहपुर मॉडल को लागू किया जाएगा और सभी ज़रूरी सपोर्ट और फैसिलिटी दी जाएंगी ताकि ज़्यादा से ज़्यादा स्टूडेंट्स ऐसे एग्जाम में सफल हो सकें।” – ठाणे ज़िला परिषद के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रंजीत यादव।

    ज़िला परिषद एडमिनिस्ट्रेशन ने सभी सफल स्टूडेंट्स, टीचर्स, प्रिंसिपल्स और पेरेंट्स को बधाई दी है और भविष्य में उनके और भी बेहतर परफॉर्मेंस की कामना की है।

  • Death by Electrocution: मुंब्रा में तनाव, टोरंटो के खिलाफ मामला दर्ज; बिजली का झटका लगने से एक नाबालिग लड़की की मौत!

    Death by Electrocution: मुंब्रा में तनाव, टोरंटो के खिलाफ मामला दर्ज; बिजली का झटका लगने से एक नाबालिग लड़की की मौत!

    Death by Electrocution: बुधवार रात मुंब्रा पुलिस थाना क्षेत्र के कादर पैलेस इलाके में भारी बारिश के दौरान बिजली का झटका लगने से 16 वर्षीय आलिया चांदीवाला की मौत हो गई। इससे मुंब्रा इलाके में तनाव फैल गया। लोगों ने टोरंटो इलेक्ट्रिसिटी कंपनी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। इस बीच, टोरंटो इलेक्ट्रिसिटी कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ मुंब्रा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।

    मुंब्रा के बी विंग स्थित कादर पैलेस, यास्मीन पार्क की निवासी 16 वर्षीय आलिया चांदीवाला की मृत्यु हो गई। वह कादर पैलेस इलाके में काम के लिए इमारत से बाहर आ रही थी। इसी दौरान इमारत के अंदर पानी में बिजली का करंट था। आलिया जैसे ही पानी में उतरी, उसे बिजली का जोरदार झटका लगा।

    गंभीर रूप से घायल आलिया को इलाके के निवासियों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसकी जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। मुंब्रा इलाके में घटना की खबर फैलते ही मुंब्रा के निवासी बड़ी संख्या में जमा हो गए। भीड़ में टोरंटो कंपनी के खिलाफ असंतोष का माहौल था।

    भीड़ जमा होने की सूचना मिलते ही मुंब्रा पुलिस और स्थानीय जन प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। मुंब्रा पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कालवा अस्पताल भेज दिया। मुंब्रा पुलिस ने टोरंटो कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने और मौत का कारण बनने के आरोप में आंतरिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • Thane Bungalow Collapses: ठाणे में कॉसमॉस बंगले की सुरक्षा दीवार ढह गई!

    Thane Bungalow Collapses: ठाणे में कॉसमॉस बंगले की सुरक्षा दीवार ढह गई!

    Thane Bungalow Collapses: यह घटना गुरुवार शाम करीब 5:25 बजे ओवाला घोड़बंदर रोड, पंखंडा गांव, ठाणे स्थित कॉसमॉस बंगले की सुरक्षा दीवार पर घटी। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    गुरुवार शाम को कॉसमॉस बंगले की 30 फीट ऊंची और 50 फीट लंबी सुरक्षा दीवार गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही जूनियर इंजीनियर और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए।

    दीवार गिरने से बगल वाले घर के शेड की चादरें टूट गईं, जिससे मामूली नुकसान हुआ। लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने खतरे की चेतावनी वाली टेप लगाकर इलाके को घेर लिया है।

  • MP Advocate Goval K. Padvi: आदिवासी आबादी के अनुपात में 9.35% बजट मिले, तेलंगाना की तर्ज पर बने अलग कानून: सांसद एडवोकेट गोवाल के. पाडवी!

    MP Advocate Goval K. Padvi: आदिवासी आबादी के अनुपात में 9.35% बजट मिले, तेलंगाना की तर्ज पर बने अलग कानून: सांसद एडवोकेट गोवाल के. पाडवी!

    MP Advocate Goval K. Padvi: महाराष्ट्र में आदिवासी विकास के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जनसंख्या के अनुपात में 9.35 प्रतिशत बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किया जाए तथा तेलंगाना राज्य के ट्राइबल सब-प्लान (Tribal Sub-Plan) कानून की तर्ज पर राज्य में भी स्वतंत्र आदिवासी कानून बनाया जाए।

    यह मांग नंदुरबार लोकसभा क्षेत्र के सांसद एडवोकेट गोवाल के. पाडवी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में विधान भवन में आयोजित 52वीं आदिवासी सलाहकार परिषद की बैठक में जोरदार ढंग से उठाई।

    सांसद पाडवी ने कहा कि महाराष्ट्र में अनुसूचित जनजातियों की आबादी लगभग 9.35 प्रतिशत है, इसलिए आदिवासी विकास के लिए भी उसी अनुपात में बजट आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूर्व के शासन निर्णयों और स्थापित नीति के बावजूद आदिवासी समाज के लिए आबादी के अनुपात में धनराशि उपलब्ध नहीं करा रही है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में आदिवासी विकास विभाग के बजट में पगार, पेंशन और प्रशासनिक खर्च (Committed Expenditure) को भी आदिवासी विकास का खर्च दिखाया जा रहा है, जबकि इससे वास्तविक विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध राशि में भारी कमी आ रही है।

    उन्होंने मांग की कि प्रशासनिक खर्च को सामान्य प्रशासन के मद में अलग रखा जाए और शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार, सड़क तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए अलग एवं पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए।

    सांसद पाडवी ने तेलंगाना की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी स्वतंत्र ट्राइबल सब-प्लान कानून लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे आदिवासी विकास निधि का अन्य कार्यों में उपयोग नहीं हो सकेगा तथा धनराशि का पारदर्शी और जवाबदेह उपयोग सुनिश्चित होगा।

    बैठक में उन्होंने अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों या धोखाधड़ी के आधार पर एसटी प्रमाणपत्र प्राप्त करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

    साथ ही, जाति सत्यापन समितियों को केवल शिकायत का इंतजार करने के बजाय स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार और जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

    सांसद ने अनुसूचित जनजाति आरक्षण के तहत रिक्त एवं अधिसंख्य पदों को शीघ्र भरने की मांग भी की। उन्होंने आदिवासी विकास विभाग, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (आईटीडीपी), अतिरिक्त आदिवासी आयुक्त कार्यालयों तथा नासिक स्थित आदिवासी विकास आयुक्तालय में अधिकारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जनप्रतिनिधियों को होने वाली कठिनाइयों का मुद्दा भी परिषद के समक्ष रखा।

    उन्होंने जाति प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया को आधुनिक बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल डेटा विश्लेषण और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर सत्यापन प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाए।

    बैठक के अंत में सांसद पाडवी ने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित धनगर समाज से जुड़े मामले पर राज्य सरकार की भूमिका पर चर्चा कराने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि जैसे ही उन्होंने यह विषय उठाना शुरू किया, राज्य के आदिवासी विकास मंत्री ने इस पर आपत्ति जताई और उन्हें मुद्दा रखने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद, उनके अनुसार, परिषद के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक स्थगित कर दी और सभागार से बाहर चले गए।

  • TET Paper Leak Case: टीईटी पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन और आरोपी गिरफ्तार!

    TET Paper Leak Case: टीईटी पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन और आरोपी गिरफ्तार!

    TET Paper Leak Case: महाराष्ट्र के बहुचर्चित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से पूरे पेपर लीक नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और फरार आरोपियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज सामने आ सकते हैं।

    पुलिस के अनुसार, लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी कपिल दहिया को जम्मू से गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ पहले ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था। वहीं, मामले से जुड़े सोनू सिंह और मिथुन सिंह को बिहार की राजधानी पटना से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया।

    जांच में सामने आया है कि सोनू सिंह और मिथुन सिंह इस मामले के मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता के करीबी सहयोगी हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पटना में बिजेंद्र कुमार गुप्ता की एक अहम बैठक में दोनों आरोपी मौजूद थे। इसी बैठक के बाद पुलिस ने इनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने शुरू किए और लगातार इनकी तलाश कर रही थी।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक की पूरी साजिश किस स्तर पर रची गई, प्रश्नपत्र किस माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाए गए और इस नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसके लिए आर्थिक लेन-देन, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल साक्ष्य और बैंक खातों की गहन जांच की जा रही है।

    इससे पहले ठाणे पुलिस मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता की पत्नी सुमन कुमारी को भी बिहार से गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का दावा है कि उससे पूछताछ के दौरान मिले तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर ही इन तीनों आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, टीईटी परीक्षा के प्रश्नपत्र उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस से कथित रूप से अवैध तरीके से बाहर निकाले गए थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली के रास्ते महाराष्ट्र लाकर संगठित तरीके से लीक किया गया। पुलिस को आशंका है कि इस पूरे रैकेट में कई राज्यों के लोगों की संलिप्तता है, जिसके चलते जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

    गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को भिवंडी पुलिस की हिरासत में रखा गया है। उन्हें भिवंडी न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां ठाणे पुलिस उनकी पुलिस हिरासत की मांग करेगी ताकि आमने-सामने पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हालिया गिरफ्तारियों के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई और बड़े नाम सामने आने की संभावना है। फिलहाल महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामला अब महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।

  • Torrent Power’s franchise model: भिवंडी में टोरंट पावर का फ्रेंचाइजी मॉडल सबसे सफल, अब 24 घंटे के करीब मिल रही बिजली: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

    Torrent Power’s franchise model: भिवंडी में टोरंट पावर का फ्रेंचाइजी मॉडल सबसे सफल, अब 24 घंटे के करीब मिल रही बिजली: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

    Torrent Power’s franchise model: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भिवंडी में टोरंट पावर का फ्रेंचाइजी मॉडल राज्य में सबसे सफल साबित हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) द्वारा निर्धारित दरों से अधिक बिजली शुल्क वसूलने का अधिकार किसी भी फ्रेंचाइजी कंपनी को नहीं है।

    विधानसभा में भिवंडी पूर्व के विधायक रईस शेख ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि टाटा पावर और अदाणी पावर की तुलना में टोरंट पावर की बिजली दरें अधिक होने से भिवंडी के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भिवंडी में अन्य निजी बिजली वितरण कंपनियों को भी अवसर देने तथा पावरलूम संचालकों के लिए ब्याज और बकाया बिजली बिलों पर एकमुश्त समझौता (ओटीएस) योजना लागू करने की मांग की।

    मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा कि टोरंट पावर के आने के बाद भिवंडी की बिजली व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य में औसतन बिजली हानि 12 से 13 प्रतिशत है, जबकि भिवंडी में इसे घटाकर लगभग 10 प्रतिशत तक लाया गया है।

    उन्होंने कहा कि टोरंट पावर के संचालन से पहले भिवंडी में औसतन 16 घंटे बिजली आपूर्ति होती थी, जबकि अब यह बढ़कर 23.56 घंटे प्रतिदिन हो गई है। साथ ही, पहले जहां बिजली बिलों की वसूली दर 65–67 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि बिजली दरों का निर्धारण महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के नियमों के अनुसार किया जाता है और आयोग द्वारा तय दरों से अधिक शुल्क वसूलने की अनुमति किसी भी फ्रेंचाइजी कंपनी को नहीं है।

    विधानसभा में इस विषय पर हुई चर्चा के बाद भिवंडी की बिजली व्यवस्था, टोरंट पावर की शुल्क संरचना तथा पावरलूम उद्योग से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गए हैं।

  • Washim Custodial Death Case: 2011 हिरासत मौत मामले में 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, अदालत का ऐतिहासिक फैसला!

    Washim Custodial Death Case: 2011 हिरासत मौत मामले में 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, अदालत का ऐतिहासिक फैसला!

    Washim Custodial Death Case: महाराष्ट्र के वाशिम जिले में वर्ष 2011 के चर्चित हिरासत में मौत मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिसोड पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी अधिकारी माधव मणिकराव धांडे सहित 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

    अदालत ने दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में से चार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी अलग से सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ (Concurrent) चलेंगी।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, बेग्या पवार और एक अन्य व्यक्ति को 9 मई 2011 को एक आपराधिक मामले की जांच के सिलसिले में रिसोड पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। आरोप है कि हिरासत के दौरान बेग्या पवार के साथ गंभीर मारपीट की गई, जिससे उनके शरीर पर 43 चोटों के निशान पाए गए। अगले दिन अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर हिरासत में बेरहमी से मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया था। मामले ने व्यापक जनाक्रोश पैदा किया, जिसके बाद जांच महाराष्ट्र सीआईडी को सौंप दी गई। सीआईडी ने चिकित्सीय साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया।

    अपर सत्र न्यायाधीश जे.पी. झापटे ने सभी नौ आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, स्वीकारोक्ति कराने के लिए गंभीर चोट पहुंचाने, आपराधिक साजिश और साझा आपराधिक मंशा जैसे आरोपों में दोषी ठहराया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 47 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला महाराष्ट्र में हिरासत में मौत के मामलों में पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराने वाले सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित निर्णयों में से एक माना जा रहा है।