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  • Maruti Suzuki Kharkhoda Plant: प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची ने किया मारुति सुजुकी के अत्याधुनिक संयंत्र का उद्घाटन!

    Maruti Suzuki Kharkhoda Plant: प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची ने किया मारुति सुजुकी के अत्याधुनिक संयंत्र का उद्घाटन!

    Maruti Suzuki Kharkhoda Plant: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरियाणा के खरखौदा स्थित मारुति सुजुकी के नए अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया। यह उद्घाटन भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच के दौरान हुआ, जिसमें दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग और निवेश को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

    इस अवसर पर सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधि निदेशक एवं अध्यक्ष तोशिहिरो सुजुकी तथा मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची भी मौजूद रहे। कंपनी के अनुसार, नए संयंत्र की शुरुआती वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 लाख वाहन होगी। वहीं, हंसलपुर स्थित चौथे संयंत्र में उत्पादन शुरू होने के बाद चालू वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 29 लाख वाहन प्रतिवर्ष हो जाएगी।

    करीब 800 एकड़ में फैला यह संयंत्र भविष्य में पूर्ण क्षमता हासिल करने पर हर साल 10 लाख वाहनों का उत्पादन करने में सक्षम होगा। इस परियोजना में लगभग 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है और इससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 21,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है।

    यह संयंत्र ‘सुजुकी स्मार्ट फैक्ट्री’ अवधारणा और इंडस्ट्री 5.0 तकनीक पर आधारित है। इसमें मानव और मशीन के बेहतर समन्वय के लिए ह्यूमन-अवेयर सहयोगी रोबोट, सौर ऊर्जा, बायोगैस, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली तथा अन्य हरित ऊर्जा तकनीकों का उपयोग किया गया है। संयंत्र की 100 प्रतिशत बिजली आवश्यकता नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

    वर्तमान में संयंत्र में 20 मेगावाट पीक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है, जिसे वर्ष 2030 तक 70 मेगावाट पीक तक बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा यहां 10 टन प्रतिदिन क्षमता का बायोगैस प्लांट, 1 मेगावाट-आवर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, 100 प्रतिशत जल पुनर्चक्रण व्यवस्था और वर्षा जल संचयन जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित की गई हैं। साथ ही वाहनों के परिवहन को अधिक कुशल बनाने और ईंधन की बचत के लिए संयंत्र परिसर में रेलवे साइडिंग भी विकसित की जाएगी।

    इस अवसर पर तोशिहिरो सुजुकी ने कहा कि पूर्ण क्षमता हासिल करने के बाद खरखौदा संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े कार निर्माण संयंत्रों में शामिल होगा। उन्होंने इसे भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए भारत में निवेश, रोजगार, निर्यात और उन्नत तकनीकों के विस्तार के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • Neelam Shami Rao: भारत-जापान के बीच कपड़ा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर, टोक्यो में उद्योग जगत से मिलीं कपड़ा सचिव नीलम शमी राव

    Neelam Shami Rao: भारत-जापान के बीच कपड़ा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर, टोक्यो में उद्योग जगत से मिलीं कपड़ा सचिव नीलम शमी राव

    Neelam Shami Rao: भारत और जापान के बीच कपड़ा एवं परिधान उद्योग में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय कपड़ा सचिव नीलम शमी राव ने सोमवार को टोक्यो में जापान की प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल कंपनियों के प्रतिनिधियों तथा निवेशकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।

    कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना, आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना तथा उद्योग क्षेत्र में नई साझेदारियों की संभावनाओं को तलाशना है।

    बैठक को संबोधित करते हुए नीलम शमी राव ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक कपड़ा उद्योग में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी भागीदार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि कुशल मानव संसाधन, पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता और सरकार की उद्योग समर्थक नीतियां भारत को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाती हैं।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधि और नीति विशेषज्ञ भी शामिल थे। बैठक में जापान की 20 से अधिक अग्रणी कपड़ा एवं परिधान कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

    दोनों पक्षों के बीच कपड़ा व्यापार को बढ़ाने, नई तकनीकों के उपयोग, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जापानी कंपनियों को भारत से वस्त्रों की खरीद बढ़ाने तथा देश में विनिर्माण इकाइयों और निवेश परियोजनाओं का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया।

    बैठक के दौरान उद्योग में नवाचार, तकनीकी सहयोग और संयुक्त विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति बनी। साथ ही भारत में जापानी निवेश की संभावनाओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    मंत्रालय के अनुसार, जापानी उद्योग जगत ने भारत के कपड़ा क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई और भारतीय कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी, निवेश विस्तार तथा भविष्य की तकनीकी परियोजनाओं में सहयोग की इच्छा व्यक्त की।

  • Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देशभर में निवेश-तैयार एवं विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मार्च में मंजूर ‘भव्य’ योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए कर दिये हैं और चार महीने में 50 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव को मंजूरी देने का लक्ष्य है।

    इस योजना के तहत पूरे देश में 100 औद्योगिक पार्कों की स्थापना का लक्ष्य है जो 100 एकड़ से 1000 एकड़ तक के हो सकते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में हम 25 एकड़ के पार्क को भी मंजूरी दे सकते हैं। दिशानिर्देशों के तहत केंद्र सरकार भव्य के तहत राज्यों को प्रति पार्क प्रति एकड़ जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए एक करोड़ रुपये या जमीन की प्रति एकड़ बाजार दर में से जो भी कम होगा, उसके बाराबर सहायता देगी।

    मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनके लिए लगभग 33,660 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। पहले चरण में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन प्रक्रिया के माध्यम से 50 तक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क के लिए राज्यों को विशेष प्रयोजन इकाई का गठन करना होगा जो इन औद्योगिक पट्टियों में बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन करेगी।

    गोयल ने कहा, ‘सरकार इस योजना को लेकर कितनी सक्रियता से काम कर रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी गत 18 मार्च को मिली थी और इसे अप्रैल में अधिसूचित कर दिया गया था। अब इसके दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं तथा चार महीने में 50 औद्योगिक पार्क मंजूर करने की तैयारी है।’

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    गोयल ने कहा कि इस चार महीने को भी दो भागों में बांट दिया गया है और पहले दो महीनों में 20 पार्क मंजूर कर दिये जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारें इस योजना के लिए प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत कर सकती है।

    उन्होंने बताया कि भव्य योजना का उद्देश्य “मेक इन इंडिया”, “पीएम गति शक्ति” तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने की सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप एकीकृत औद्योगिक अवसंरचना का विकास कर भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

    भव्य के लिए जारी दिशा-निर्देशों में पार्कों की पात्रता के मानदंड, परियोजना की चयन प्रक्रिया, वित्तपोषण संरचना, प्रशासनिक ढांचा, निगरानी प्रणाली तथा कार्यान्वयन व्यवस्था सहित विस्तृत रूपरेखा प्रदान की गई है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य “निवेश-तैयार” औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिसमें प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिता सेवाएं, श्रमिक सहायता अवसंरचना, डिजिटल शासन प्रणाली तथा सतत विकास संबंधी सुविधाएं शामिल होंगी।

    दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रीनफील्ड तथा पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्कों दोनों का विकास किया जा सकेगा। गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम 100 एकड़ भूमि तथा पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत 1000 एकड़ तक के बड़े औद्योगिक पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।

    चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया के तहत प्रस्तावों का मूल्यांकन मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्थल की उपयुक्तता, अवसंरचना की गुणवत्ता, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती, नीतिगत सुविधा, डिजिटल शासन की तैयारी तथा दीर्घकालिक स्थिरता जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर किया जाएगा।

    दिशा-निर्देशों में भूमिगत उपयोगिता प्रणाली, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएं, डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली, कौशल विकास सुविधाएं तथा एकीकृत साझा अवसंरचना जैसे घटकों की गुणवत्ता के मूल्यांकन का भी प्रावधान किया गया है।

    योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित एसपीवी के माध्यम से किया जाएगा। ये एसपीवी परियोजना की योजना, विकास, संचालन, प्रबंधन, निवेशक सुविधा तथा दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगी।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) को योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) नियुक्त किया गया है। दिशा-निर्देशों में निजी डेवलपर्स की भागीदारी हेतु परियोजना-विशिष्ट एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्क विकास का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा, पारदर्शिता सुरक्षा उपाय और जवाबदेही तंत्र निर्धारित किए गए हैं।

    योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों में जीआईएस-आधारित निगरानी प्रणाली, समय-समय पर प्रगति रिपोर्टिंग, ऑडिट व्यवस्था तथा डीपीआईआईटी सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति द्वारा निगरानी का प्रावधान शामिल किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों में लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उपयोगिता अवसंरचना तथा औद्योगिक विकास से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय का भी प्रावधान किया गया है।