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  • Action Against Quack: दीवा में फर्जी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई; मेडिकल डिग्री न होने के बावजूद इलाज जारी रखा

    Action Against Quack: दीवा में फर्जी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई; मेडिकल डिग्री न होने के बावजूद इलाज जारी रखा

    Action Against Quack: ठाणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने दिवा इलाके में एक फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़ किया है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. पल्लवी वाघ ने मुंब्रा पुलिस स्टेशन में दिनेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है, जो बिना किसी डिग्री या लाइसेंस के मरीजों का इलाज कर रहा था।

    ठाणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने दिवा क्षेत्र में फर्जी चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक कथित डॉक्टर का भंडाफोड़ किया है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. पल्लवी वाघ की शिकायत के अनुसार, 16 अप्रैल, 2026 को सबेगांव स्थित डी.जे. कॉम्प्लेक्स-2 में ‘मधु क्लिनिक’ का निरीक्षण किया गया।

    इस दौरान दिनेश कुमार नामक व्यक्ति मरीजों का इलाज करता पाया गया। निरीक्षण में पता चला कि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री, पंजीकरण या लाइसेंस नहीं है। नगर निगम द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उसने आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए।

    इसलिए, उसके खिलाफ मुंब्रा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है, जिसमें उस पर बिना मेडिकल योग्यता के नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है।

  • HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिला का प्रसव कराने से इंकार करने के मामले में जिला महिला अस्पताल हमीरपुर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मौदहा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ को मामले की जांच सौंपी गई है।

    जांच अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने मंगलवार को बताया कि महोबा जिले के खन्ना क्षेत्र निवासी दंपती एचआईवी पॉजिटिव हैं। महिला के पति ने प्रसव के लिए पत्नी को मौदहा सीएचसी में भर्ती कराया था, जहां एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिलने पर स्टाफ ने प्रसव कराने से मना कर दिया और जिला महिला अस्पताल हमीरपुर रेफर कर दिया।

    उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल पहुंचने पर भी रेफरल कार्ड देखते ही महिला को तत्काल कानपुर रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एचआईवी पॉजिटिव प्रसूताओं का हर हाल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराया जाए। इसके लिए विशेष किट और चिकित्सकीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है।

    बताया गया कि 21 मई को महिला ने कानपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव कराया, जिसमें परिवार का लगभग 40 हजार रुपये खर्च हो गया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हमीरपुर पहुंचकर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल से शिकायत की। जिलाधिकारी ने मामले की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गीतम सिंह को सौंपी, जिन्होंने आगे जांच डिप्टी सीएमओ को दे दी।

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    जांच के दौरान मौदहा सीएचसी अधीक्षक डॉ. रजत तिवारी ने कहा कि स्टाफ ने महिला को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया था और उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. के.एस. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में पूर्व में एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं तथा इसके लिए अलग ऑपरेशन थिएटर और विशेष किट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि महिला को रेफर किए जाने की जानकारी की जांच कराई जाएगी।

    डॉ. मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल का अधिकांश स्टाफ इस प्रकार के मामलों में प्रशिक्षित नहीं है। वहीं जांच अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने दावा किया कि एचआईवी संक्रमित महिलाओं के प्रसव संबंधी मामलों में स्वास्थ्य केंद्रों पर लगभग 90 प्रतिशत स्टाफ अप्रशिक्षित है, जबकि सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में एचआईवी जांच की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई प्रसूताओं की जांच किए बिना ही प्रसव करा दिया जाता है। साथ ही महिला अस्पताल की काउंसलर को पुरुष अस्पताल से संबद्ध किए जाने के कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों की सूचना आईसीटीसी को दी जानी चाहिए, लेकिन कई बार ऐसा नहीं किया जाता।