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  • Rahul Vats COAI Chairman: राहुल वत्स होंगे सीओएआई के नये अध्यक्ष

    Rahul Vats COAI Chairman: राहुल वत्स होंगे सीओएआई के नये अध्यक्ष

    Rahul Vats COAI Chairman: भारतीय सेल्युलर ऑपरेटर संघ (सीओएआई) ने वर्ष 2026-27 के लिए नए नेतृत्व की घोषणा करते हुए राहुल वत्स को संगठन का अध्यक्ष चुना है। वह वर्तमान में भारती एयरटेल में ग्रुप चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर और कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं तथा इससे पहले सीओएआई के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

    सीओएआई की वार्षिक आम सभा में लिए गए इस निर्णय के तहत रिलायंस जियो इन्फोकॉम के मुख्य नियामक अधिकारी रवि पी. गांधी को संगठन का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    राहुल वत्स के पास दूरसंचार और प्रसारण लाइसेंसिंग, स्पेक्ट्रम प्रबंधन, आर्थिक विनियमन तथा नियामकीय मुकदमेबाजी के क्षेत्र में करीब 29 वर्षों का अनुभव है। वह वैश्विक मोबाइल उद्योग संगठन जीएसएमए के स्पेक्ट्रम नीति कार्य समूह के अध्यक्ष भी हैं।

    वहीं, रवि पी. गांधी को लोक नीति, दूरसंचार विनियमन और नेटवर्क संचालन के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। वह पहले भारती एयरटेल में मुख्य नियामक अधिकारी रह चुके हैं और भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी के रूप में दूरसंचार विभाग में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पीएचडी और एनआईटी कुरुक्षेत्र से बीटेक की डिग्री प्राप्त की है।

    बैठक के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में हुए हालिया विकास, उभरती प्राथमिकताओं और देश के डिजिटल संचार तंत्र को मजबूत बनाने के लिए भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

    सीओएआई के महानिदेशक एस.पी. कोच्छर ने कहा कि भारत का दूरसंचार क्षेत्र परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 5जी एडवांस्ड, सैटेलाइट संचार तथा 6जी जैसी नई तकनीकों के साथ यह क्षेत्र नवाचार, समावेशन और आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • Jio Platforms IPO: अंबानी का नया प्लान! आईपीओ में केवल फ्रेश इश्यू संभव!

    Jio Platforms IPO: अंबानी का नया प्लान! आईपीओ में केवल फ्रेश इश्यू संभव!

    Jio Platforms IPO: दो सूत्रों ने सोमवार को बताया कि भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी की Reliance Jio Platforms ने अपने मुंबई IPO की योजना को बदलकर अब इसे सिर्फ़ फ़ंड जुटाने का ज़रिया बना लिया है। कंपनी ने अपनी पिछली योजना छोड़ दी है, जिसके तहत बड़े विदेशी निवेशकों को अपने कुछ शेयर बेचने की अनुमति मिलने वाली थी।

    Jio Platforms, जो यूज़र्स के मामले में China Mobile के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, के निवेशकों में Meta, Alphabet की Google और Vista Equity Partners शामिल हैं। इसके IPO (Initial Public Offering) का लंबे समय से इंतज़ार था और यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।

    Reuters ने पहले बताया था कि कंपनी ने अपने विदेशी निवेशकों के साथ बातचीत की थी, जिसमें हर निवेशक को IPO में अपनी व्यक्तिगत हिस्सेदारी का 8% बेचने की अनुमति देने की बात हुई थी। कुल मिलाकर, यह कंपनी की 2.5% हिस्सेदारी के बराबर होता। इस प्रक्रिया को भारत में ‘ऑफ़र फ़ॉर सेल’ (Offer-for-Sale) कहा जाता है। इसके ज़रिए नए निवेशक कंपनी में आ पाते और विदेशी निवेशक बिना किसी नए फ़ंड के अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच पाते।

    इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताया कि अब इस योजना को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर बात की, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था।

    अब Reliance की योजना कंपनी के कुल आकार के 2.5% के बराबर नया फ़ंड जुटाने की है। सूत्रों में से एक ने कहा, “निवेशक अपने शेयर बेचने के इच्छुक नहीं थे और वे लंबे समय तक कंपनी में निवेशित रहना चाहते थे।”

    The Economic Times ने सोमवार को सबसे पहले यह रिपोर्ट दी थी कि कंपनी अपने IPO के ज़रिए अब सिर्फ़ नया फ़ंड जुटाने पर फ़ोकस करेगी। Jio Platforms ने Reuters के इस मामले पर टिप्पणी मांगने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।

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    युद्ध का साया
    Jio Platforms के IPO के लिए फ़ाइलिंग मार्च में ही होने की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान को लेकर शुरू हुए युद्ध के चलते इसे टाल दिया गया। इस युद्ध के कारण निवेशकों का नई लिस्टिंग में निवेश करने का उत्साह कम हो गया था।

    मार्च में, Walmart के समर्थन वाली भारतीय फ़िनटेक कंपनी PhonePe ने भी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक पूंजी बाज़ारों में अस्थिरता का हवाला देते हुए अपने IPO की योजना को रोक दिया था। Jio Platforms के IPO में हुई देरी के बारे में बात करते हुए, पहले सूत्र ने कहा कि ईरान युद्ध निश्चित रूप से एक “बाधा” (overhang) बना हुआ है।

    Jio Platforms की लिस्टिंग, अंबानी के उस लंबे समय के विज़न का एक अहम हिस्सा है जिसके तहत वे Reliance को तेल और केमिकल की एक बड़ी कंपनी से बदलकर एक ऐसी “सब कुछ वाली कंपनी” बनाना चाहते हैं जो कंज्यूमर, रिटेल और टेक्नोलॉजी, हर क्षेत्र में काम करे।

    2020 में, Jio ने दुनिया भर के बड़े निवेशकों से फंड जुटाया। ये निवेशक भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर दांव लगा रहे थे—एक ऐसी अर्थव्यवस्था जहाँ स्मार्टफोन का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है, इंटरनेट की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं, और जहाँ की युवा आबादी, जो मोबाइल का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करती है, अब ऑनलाइन आ रही है।

    नवंबर में, इन्वेस्टमेंट बैंक Jefferies ने अनुमान लगाया था कि Reliance Jio का वैल्यूएशन $180 बिलियन होगा। जनवरी में सूत्रों ने Reuters को बताया कि यह IPO $4 बिलियन तक का हो सकता है, हालाँकि इसके अंतिम आँकड़े बाद में तय किए जाएँगे। Reliance Jio Platforms ने अपनी मुंबई लिस्टिंग को मैनेज करने के लिए 17 बैंकों को नियुक्त किया है।