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  • Land Scam Exposed: टीडीआर की आड़ में एक और 94 एकड़ जमीन का पर्दाफाश-डॉ. जितेंद्र आव्हाड

    Land Scam Exposed: टीडीआर की आड़ में एक और 94 एकड़ जमीन का पर्दाफाश-डॉ. जितेंद्र आव्हाड

    Land Scam Exposed: डी डायाभाई एंड कंपनी ने ठाणे मनपा और वन विभाग से मिलकर 2800 करोड़ रुपये का टीडीआर घोटाला किया है। हालांकि टीडीआर के पीछे की असली साज़िश 94 एकड़ के करीब 4 हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले को छिपाने की है, यह जानकारी राकांपा राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने एक पत्रकार परिषद में दी। 194 एकड़ में से यहां 94 एकड़ में युवाओं को भ्रष्ट करने वाले हर तरह के धंधे चल रहे हैं और कोठारी-डी डायाभाई इसका किराया लेकर अमीर हो रहे हैं।

    डॉ. जितेंद्र आव्हाड और राकांपा पार्टी के जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान ने आरोप लगाया कि यह इस जमीन को बेचकर अमीर बनने की कोशिश है। इस बीच, डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने यह भी चेतावनी दी कि हम इस कोठारी कंपाउंड में घुसकर सब कुछ ठीक कर देंगे; देखते हैं कौन से गुंडे बाहर आते हैं,येउर के पास, संजय गांधी नेशनल पार्क से सटे, चितलसर-मानपाड़ा में 194 एकड़ जंगल की ज़मीन ठाणे मनपा के डेवलपमेंट प्लान में उद्यान पार्क के तौर पर रिज़र्व है। इस इलाके को संजय गांधी नेशनल पार्क के बहुत ज़्यादा सेंसिटिव इलाके में शामिल किया गया है।

    फिर भी, आज 2,800 करोड़ रुपये का टीडीआर देने का प्रोसेस मज़बूती से शुरू कर दिया गया है। हालांकि, डॉ. आव्हाड और मनोज प्रधान ने पत्रकारों से बात करते हुए इस बात का खुलासा किया कि 94 एकड़ के घोटाले को छिपाने की कोशिश की जा रही है।डॉ. आव्हाड ने कहा कि वनसंरक्षक अनीता पाटिल ने 19 जून 2026 को एक लेटर दिया है, जिसमें कहा गया है कि डी. डायाभाई एंड कंपनी को टीडीआर नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया है कि एक स्पेशल परमिशन पिटीशन फाइल की जाएगी। तो, क्या वन विभाग पिछले 96 दिनों से सो रहा था? डायाभाई लुटेरा है।

    टीडीआर तो बहाना है लेकिन, उसने 94 एकड़ लूट ली है। उसने 100 एकड़ जमीन को रेजिडेंशियल एरिया में बदल दिया है। यहां जमीन का रेट आम तौर पर 40 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। यानी यह लगभग 4 हजार करोड़ रुपये की सीधी लूट है। क्या ठाणे मनपा को यह नहीं दिखता कि इस डायाभाई-कोठारी ने इस इलाके में गोदाम, पब, कोठे बनाए हैं और सालों से किराया खाया है? अब हमारे पास यह भी जानकारी है कि कौन से बिल्डर इन 94 एकड़ के लिए मांग कर रहे हैं।

    इसलिए इन 94 एकड़ का भी हिसाब होना चाहिए। अगर ट्रांसपेरेंसी दिखानी है, तो सभी 194 एकड़ पर गार्डन बनाओ! यह स्कैम सिर्फ़ टीडीआर तक सीमित नहीं है। यह लूट है। अगर सेशन खत्म होने से पहले इस कोठारी कंपाउंड पर एक्शन नहीं लिया गया, तो हम वहां घुस जाएंगे। फिर, हम देखेंगे कि कोठारी के कौन से गुंडे हमारे रास्ते में आते हैं, डॉ. आव्हाड ने यह भी चेतावनी दी।इस बीच, 94 एकड़ में से 27, 5 और 4 एकड़ का भी आपस में बंटवारा हो गया है।

    भले ही यह ज़मीन 1975 में ही जंगलों से ढकी हुई थी, इन प्लॉट पर गोदाम बना दिए गए हैं और इसे बेच भी दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल, 2026 को हाई कोर्ट के ऑर्डर पर स्टे लगा दिया। भले ही इस स्टे ऑर्डर के समय कोई काम नहीं होना था, लेकिन 25 मई, 2026 को पुलिस फोर्स ने ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया और वन विभाग के बोर्ड हटा दिए।मनपा को इतनी जल्दी क्यों थी? मनोज प्रधान ने कहा कि भले ही कंटेम्प्ट पिटीशन पर 3 जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन महासभा को गुमराह किया गया और चर्चा नहीं होने दी गई।

  • NCP Criticism: राकांपा ने महासभा में TDR केस पर चर्चा न होने की आलोचना की!

    NCP Criticism: राकांपा ने महासभा में TDR केस पर चर्चा न होने की आलोचना की!

    NCP Criticism: मनपा की सीमा में शील, डायघर और बिना इजाज़त के गोदामों के खिलाफ़ कार्रवाई हो रही है। लेकिन,महासभा में बोलने के बावजूद कोठारी कंपाउंड में गैर-कानूनी पब और हुक्का पार्लरों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके पीछे 193 एकड़ का TDR स्कैम है। अभी ठाणे में “सुबह उठो और ठाणे लूटो” नाम का नया धंधा चल रहा है। मंगलवार को हुई महासभा में सिर्फ़ TDR ब्रोकर जग्गू खेतवानी के फ़ायदे के लिए चर्चा नहीं होने दी गई।

    सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर के दौरान कब्ज़े की रसीदें दी जाती हैं। लेकिन, महासभा यह कहकर चर्चा नहीं करती कि यह मामला कोर्ट में है, यह कैसी बात है? राकांपा पार्टी के ग्रुप लीडर अभिजीत पवार, नेता विपक्ष इंचार्ज मर्जिया पठान,नगरसेवक सुधीर भगत, मनीषा भगत और पल्लवी जगताप ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल करने का फैसला किया।मनपा ने डी. डायाभाई एंड कंपनी को 2800 करोड़ रुपये का TDR दिया है। यह TDR फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की जमीन पर फर्म के लिए रिजर्वेशन करके दिया गया है। अभिजीत पवार और सुधीर भगत ने इस मामले में एक दिलचस्प प्रेजेंटेशन दिया था।

    हालांकि, मामला कोर्ट में होने की बात कहकर इस पर चर्चा नहीं की गई। इस बारे में राकांपा नगरसेवक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फर्म के दोगलेपन का पर्दाफाश किया।इस मौके पर मर्जिया पठान ने कहा, शील-डायघर पर एक्शन लिया जा रहा है। लेकिन, कोठारी कंपाउंड में बिना इजाज़त के कंस्ट्रक्शन के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा रहा है। इसके पीछे TDR स्कैम वजह है। अगर यह मामला कोर्ट में है, तो आयुक्त को TDR देने की इतनी जल्दी क्या थी? उन्होंने सवाल किया।

    ग्रुप लीडर अभिजीत पवार ने कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हालांकि कहा गया था कि इस पर चर्चा नहीं हो सकती, लेकिन BPMC एक्ट 481 और 481H के अनुसार यह चर्चा हो सकती थी। लेकिन, डी. डायाभाई एंड कंपनी को जग्गू खेतवानी नाम के एक TDR ब्रोकर के लिए पैंपर किया जा रहा है। कुछ एक्सपर्ट्स ने ज़ोर दिया कि यह चर्चा नहीं होनी चाहिए। ये एक्सपर्ट्स पार्टनर हो सकते हैं। इसीलिए यह रुख अपनाया गया होगा।

    असल में, इस जगह पर एक बायोडायवर्सिटी पार्क बनने वाला था। इसलिए, नियमों के अनुसार .8% TDR दिया जा सकता है। लेकिन, यहां 2800 करोड़ रुपये का TDR दिया गया। इसके लिए फर्म ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया। अब 2800 करोड़ रुपये के TDR के कारण 18 हज़ार घर बढ़ जाएंगे, उन्हें सुविधाएं कैसे दी जाएंगी? उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल करने का भी इरादा जताया। सुधीर भगत ने कहा कि ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को इस ज़मीन का कब्ज़ा देने का अधिकार नहीं है। क्योंकि, यह ज़मीन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की है।

    ठाणे मनपा को फॉरेस्ट एरिया तय करने का अधिकार किसने दिया? एक तरफ, जब शील, गायमुख इलाके में फॉरेस्ट ज़मीन का TDR अथॉरिटी ने नहीं दिया, तो यहाँ कैसे दिया? अथॉरिटी ने इस ज़मीन पर रिज़र्वेशन कैसे किया? 2 हज़ार 800 करोड़ का TDR 82 लाख स्क्वेयर फ़ीट का होता है। इस सारे कंस्ट्रक्शन के बाद शहर में सिविक सुविधाओं को लेकर भयानक स्थिति पैदा हो जाएगी।

    कुल मिलाकर, यह शहर की सिविक सुविधाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश है और सुबह उठकर अथॉरिटी को लूटने जैसा धंधा शुरू हो गया है, ऐसा उन्होंने कहा।इस बीच, पल्लवी जगताप ने कहा कि एक तथाकथित किसान ने इन 193 एकड़ में से 17 एकड़ ज़मीन पर दावा किया था। तहसीलदार ने यह ज़मीन 70 B के हिसाब से संबंधित लोगों को दे दी। जिस जगह खदान है, वहाँ खेती कैसे की जा सकती है? इस पर विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालच के कारण बायोडायवर्सिटी खतरे में पड़ रही है।