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  • Ramnagari Visit: मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या में किए रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन, विकास कार्यों की समीक्षा

    Ramnagari Visit: मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या में किए रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन, विकास कार्यों की समीक्षा

    Ramnagari Visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन करने के साथ-साथ विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

    मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर रामकथा पार्क स्थित हेलीपैड पर उतरा, जहां जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचे और भगवान हनुमान के समक्ष विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

    हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद संत-महंतों से मुलाकात की और धार्मिक व सामाजिक विषयों पर चर्चा की। इसके पश्चात वह श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे, जहां रामलला के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और कुछ समय मंदिर परिसर में बिताया।

    मुख्यमंत्री के दौरे के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा नेता, संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

  • Fuel Surcharge Charge: ईंधन अधिभार शुल्क की वसूली पर रोक लगाने की मांग, उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से किया हस्तक्षेप का आग्रह!

    Fuel Surcharge Charge: ईंधन अधिभार शुल्क की वसूली पर रोक लगाने की मांग, उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से किया हस्तक्षेप का आग्रह!

    Fuel Surcharge Charge: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जून माह में लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीए) शुल्क की वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। परिषद ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

    परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जून में लगाए गए ईंधन अधिभार शुल्क का आकलन निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आयोग ने इसे कानून के विपरीत बताया है। साथ ही ऊर्जा मंत्री द्वारा भी सार्वजनिक रूप से यह कहा गया कि उन्हें इस निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली और इस संबंध में उनकी राय नहीं ली गई।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियामक आयोग और ऊर्जा मंत्री दोनों की जानकारी या सहमति के बिना यह निर्णय लिया गया, तो उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन को ऐसे फैसले लेने का अधिकार किस स्तर पर मिला।

    उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। परिषद का कहना है कि गर्मी शुरू होने से पहले ही बिजली आपूर्ति और अनुरक्षण व्यवस्था पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी गई थी। परिषद ने बर्खास्त संविदा कर्मियों की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा था।

    वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन में कई महत्वपूर्ण निर्णय मनमाने तरीके से लिए गए हैं। उन्होंने बिजली चोरी से जुड़े मामलों, राजस्व निर्धारण में कथित छूट और स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना की लागत में वृद्धि जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    परिषद ने मांग की है कि मुख्यमंत्री पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा कराएं और जून माह में लगाए गए एफपीपीए शुल्क की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी करें। परिषद का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक है।