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    Meteorological Department’s Major Update: तय समय से देरी से आएगा मानसून, जून के अंत तक पूरे देश में देगा दस्तक!

    Meteorological Department’s Major Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने तय समय से थोड़ी देरी से आगे बढ़ रहा है। आमतौर पर मानसून 1 जून को देश में दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार इसके 4 जून 2026 को केरल के तटों से टकराने की पूरी संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवाओं की रफ्तार धीमी होने और वायुमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulations) के कारण मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ी है। हालांकि, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के तटीय इलाकों में प्री-मानसून की गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और विभाग ने इन राज्यों में अगले छह से सात दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है।

    अन्य राज्यों में मानसून का सफर और संभावित तारीखें
    केरल में दस्तक देने के बाद मानसून तेजी से देश के अन्य हिस्सों की तरफ बढ़ेगा, जिससे तपती गर्मी से जूझ रहे राज्यों को राहत मिलेगी। वित्तीय राजधानी मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में प्री-मानसून बौछारें शुरू हो चुकी हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है और वहां 5 जून तक तेज आंधी-तूफान का अनुमान है।

    इसके बाद मानसूनी हवाएं मध्य भारत का रुख करेंगी, जहां मध्य प्रदेश में 20 से 22 जून के बीच पहली मानसूनी बारिश होने की उम्मीद है। वहीं, भीषण गर्मी का सामना कर रहे राजस्थान और इसके आस-पास के उत्तर-पश्चिमी राज्यों में जून के आखिरी हफ्ते, यानी 25 से 30 जून के बीच मानसून के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

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    मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान और भीषण लू की चेतावनी
    जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं होता, तब तक उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में अगले कुछ दिनों तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने, बिजली कड़कने और हल्की बूंदाबांदी होने की आशंका है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जून के शुरुआती दो हफ्तों में उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लोगों को सामान्य से अधिक दिनों तक भीषण लू (Heat Wave) का सामना करना पड़ सकता है, जिससे दिन का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा।

    अल-नीनो का साया और खेती पर इसका असर
    इस साल देश में कुल मानसूनी बारिश के आंकड़ों को लेकर भी मौसम विभाग ने महत्वपूर्ण दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) की स्थिति सक्रिय होने के कारण इस साल देश में औसत से थोड़ी कम बारिश होने का अनुमान लगाया गया है, जो दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है।

    कम बारिश का यह अनुमान देश के कृषि क्षेत्र और जलाशयों के जलस्तर के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि भारत की अधिकांश खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करती है। हालांकि, जून के अंत तक देश के एक बड़े हिस्से में बारिश का दौर शुरू होने से किसानों को बुवाई में मदद मिलने की उम्मीद है।