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  • Vishakha Bhujbal Honoured: एमईटी की विशाखा भुजबल ‘वूमेन पावर इम्पैक्ट क्रिएटर ऑफ द ईयर’ अवार्ड से सम्मानित!

    Vishakha Bhujbal Honoured: एमईटी की विशाखा भुजबल ‘वूमेन पावर इम्पैक्ट क्रिएटर ऑफ द ईयर’ अवार्ड से सम्मानित!

    Vishakha Bhujbal Honoured: एमईटी की सीनियर मैनेजमेंट रिप्रेजेंटेटिव विशाखा भुजबल को 11वें वार्षिक ‘वूमेन पावर समिट एंड अवार्ड्स 2026’ में ‘वूमेन पावर इम्पैक्ट क्रिएटर ऑफ द ईयर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। शिक्षा क्षेत्र में उनके सकारात्मक और प्रभावशाली योगदान के लिए उन्हें ‘ज्यूरी स्पेशल चॉइस’ श्रेणी के अंतर्गत यह सम्मान प्रदान किया गया।

    मुंबई के बीकेसी स्थित में आयोजित भव्य समारोह के दौरान उद्यमी एवं टीवी हस्ती ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान पारंपरिक शिक्षा की सीमाओं से आगे बढ़कर एक समग्र और परिवर्तनकारी शैक्षणिक इकोसिस्टम विकसित करने के उनके प्रयासों की सराहना करता है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “नेतृत्व का असली अर्थ ऐसे अवसरों का निर्माण करना है, जहाँ लोग वास्तव में विकसित हो सकें।

    सार्थक प्रगति तभी संभव है, जब हम मस्तिष्क को शिक्षित करने के साथ-साथ समुदाय का उत्थान करें और अंतरात्मा का सम्मान करें।” उन्होंने आयोजन स्थल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी देश की वास्तविक प्रगति उसके वंचित वर्गों की समृद्धि से जुड़ी होती है। “भारत की आर्थिक प्रगति केवल आंकड़ों या बाजार के ग्राफ से नहीं मापी जा सकती, बल्कि इसकी असली ताकत जमीनी स्तर पर निहित है। हमें ऐसा भारत बनाना होगा, जहाँ कोई भी पीछे न छूटे,” उन्होंने कहा।

    श्रीमती भुजबल को यह सम्मान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए मिला है। उनका मानना है कि एक महिला को सशक्त बनाना पूरे परिवार के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके साथ ही उन्होंने पारंपरिक ‘वारली’ कला के संरक्षण और कलाकारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    ‘मिलेनियम दिवाज’ द्वारा आयोजित ‘वूमेन पावर समिट’ का यह 11वां संस्करण महिला उद्यमियों और बदलाव के अग्रदूतों को सम्मानित करने वाला एक प्रमुख मंच है। इस वर्ष के आयोजन में 250 से अधिक नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए। यह समिट भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित करती है, जिसमें श्रीमती भुजबल की पहल एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई है।

  • 10 Women Entrepreneurs Honoured: डीपी वर्ल्ड और नीति आयोग ने ‘वी राइज’ कार्यक्रम में 10 महिला उद्यमियों को किया सम्मानित!

    10 Women Entrepreneurs Honoured: डीपी वर्ल्ड और नीति आयोग ने ‘वी राइज’ कार्यक्रम में 10 महिला उद्यमियों को किया सम्मानित!

    10 Women Entrepreneurs Honoured: डीपी वर्ल्ड और नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) ने ‘वी राइज’ कार्यक्रम के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली 10 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। सम्मानित उद्यमियों ने खाद्य एवं पेय पदार्थ, हस्तशिल्प, उपभोक्ता उत्पाद, ब्यूटी एवं वेलनेस सहित कई क्षेत्रों में नवाचार और व्यवसायिक सफलता का परिचय दिया है।

    कार्यक्रम के लिए देशभर से 600 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 10 महिला उद्यमियों का चयन किया गया। यह पहल महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों की बढ़ती भागीदारी और भारत की आर्थिक प्रगति में उनके योगदान को रेखांकित करती है।

    समारोह में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने कहा कि किसी भी सफलता के पीछे तैयारी, दृढ़ता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का साहस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक एवं डब्ल्यूईपी की मिशन निदेशक एना रॉय ने कहा कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और ऐसे समय में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना अधिक समावेशी एवं सशक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए आवश्यक है।

    डीपी वर्ल्ड इंडिया के प्रबंध निदेशक हेमंत कुमार रुइया ने कहा कि महिला उद्यमी नवाचार को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और देश की आर्थिक प्रगति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय भारत के विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

  • Bihar Women’s Helpline: महिला सुरक्षा की मजबूत कड़ी बनी 181 हेल्पलाइन, 69 हजार से अधिक मामलों में पहुंचाई मदद!

    Bihar Women’s Helpline: महिला सुरक्षा की मजबूत कड़ी बनी 181 हेल्पलाइन, 69 हजार से अधिक मामलों में पहुंचाई मदद!

    Bihar Women’s Helpline: राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करने के लिए संचालित 181 महिला हेल्पलाइन संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरी है। यह टोल-फ्री सेवा 24 घंटे उपलब्ध है, जिसके माध्यम से महिलाएं घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, मानव तस्करी और अन्य शिकायतों की जानकारी देकर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

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    समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा संचालित इस हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाया जाता है। अब तक हेल्पलाइन पर 69,101 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 58,596 मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है।

    हेल्पलाइन के जरिए पीड़ित महिलाओं को जरूरत के अनुसार पुलिस, वन स्टॉप सेंटर, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा अन्य सहायता एजेंसियों से जोड़ा जाता है। साथ ही उन्हें कानूनी सहायता, काउंसलिंग, सुरक्षा और आश्रय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्य सरकार का कहना है कि 181 महिला हेल्पलाइन महिलाओं को त्वरित सहायता और न्याय दिलाने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वास और सुरक्षा का एहसास कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

  • Abusive Marriage: सिर्फ आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं, ज़हरीली शादी से बाहर निकलने के लिए चाहिए भावनात्मक ताकत भी!

    Abusive Marriage: सिर्फ आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं, ज़हरीली शादी से बाहर निकलने के लिए चाहिए भावनात्मक ताकत भी!

    Abusive Marriage: आज के दौर में महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। इसके बावजूद कई महिलाएं अपमानजनक और हिंसक वैवाहिक रिश्तों में रहने को मजबूर होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रिश्तों से बाहर निकलना सिर्फ आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह भावनात्मक, सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी बेहद कठिन निर्णय होता है।

    अक्सर abusive marriage में रहने वाले लोग लगातार मानसिक दबाव, डर, अपमान और भावनात्मक शोषण का सामना करते हैं। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है और वे खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं। कई बार पीड़ित व्यक्ति यह मानने लगता है कि शायद गलती उसी की है या वह बेहतर जीवन का हकदार नहीं है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि abusive relationship में controlling behavior, emotional manipulation, डराना-धमकाना और सामाजिक रूप से अलग-थलग करना आम बात होती है। ऐसे माहौल में व्यक्ति मानसिक रूप से इतना प्रभावित हो जाता है कि सही और गलत का फैसला लेना भी मुश्किल हो जाता है।

    कई महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद परिवार टूटने का डर, बच्चों का भविष्य, समाज की बातें और रिश्तेदारों के दबाव के कारण ऐसे रिश्तों में बनी रहती हैं। भारतीय समाज में आज भी तलाक या अलग रहने को लेकर कई तरह की धारणाएं मौजूद हैं, जो महिलाओं के लिए हालात को और मुश्किल बना देती हैं।

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    इसके अलावा, कुछ मामलों में पीड़ित महिलाओं को यह डर भी सताता है कि अगर वे रिश्ता छोड़ देंगी तो उन्हें अकेले जीवन, सुरक्षा और सामाजिक स्वीकार्यता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। यही कारण है कि आर्थिक स्वतंत्रता होने के बावजूद कई लोग abusive marriage से बाहर नहीं निकल पाते।

    मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे समय में emotional support system सबसे ज्यादा जरूरी होता है। परिवार, दोस्तों और भरोसेमंद लोगों का सहयोग व्यक्ति को मानसिक मजबूती देता है। साथ ही professional counseling और legal guidance भी बेहद मददगार साबित हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी toxic marriage से बाहर निकलना एक दिन का फैसला नहीं होता, बल्कि यह एक लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें व्यक्ति को खुद को मानसिक रूप से तैयार करना पड़ता है और अपने आत्मसम्मान को फिर से पहचानना पड़ता है।

    समाज को भी इस विषय पर अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। किसी महिला को यह कहकर जज करना कि “अगर समस्या थी तो पहले क्यों नहीं छोड़ा” स्थिति को और कठिन बना देता है। जरूरी यह है कि पीड़ित व्यक्ति को सहारा, समझ और सुरक्षित माहौल मिले।

    आखिरकार, एक स्वस्थ रिश्ता वही होता है जहां सम्मान, भरोसा और सुरक्षा हो। यदि किसी रिश्ते में लगातार डर, अपमान और मानसिक पीड़ा हो, तो उससे बाहर निकलना कमजोरी नहीं बल्कि अपने जीवन और सम्मान के लिए उठाया गया साहसी कदम होता है।

  • Bihar Pink Bus Service: महिला चालकों की भर्ती और ट्रेनिंग की तैयारी तेज!

    Bihar Pink Bus Service: महिला चालकों की भर्ती और ट्रेनिंग की तैयारी तेज!

    Bihar Pink Bus Service: बिहार में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के विभिन्न शहरों में संचालित 100 पिंक बसों के लिए एक बार फिर महिला चालकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। बिहार राज्य सड़क परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) जल्द ही दूसरे चरण के लिए आवेदन आमंत्रित करेगा।

    निगम की ओर से जल्द विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके बाद इच्छुक महिलाएं आवेदन कर सकेंगी। चयनित उम्मीदवारों को औरंगाबाद स्थित आईडीटीआर (इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च) में 30 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ड्राइविंग की भी ट्रेनिंग दी जाएगी।

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    गौरतलब है कि पहले चरण में 12 महिला चालकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और वे वर्तमान में पटना की सड़कों पर बस चलाने का अभ्यास कर रही हैं। अब दूसरे चरण में अधिक संख्या में महिलाओं को इस योजना से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। पिंक बस चालक बनने के लिए महिला उम्मीदवार की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

    साथ ही उसके पास वैध एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाली महिलाओं को संविदा आधार पर चालक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। बीएसआरटीसी का मानना है कि इस पहल से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।