दूसरे दलों से आए नेताओं को सत्ता में हिस्सेदारी, पुराने भाजपा कार्यकर्ता हाशिये पर
अश्विनी कुमार दुबे
मुंबई: भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विपक्ष और राजनीतिक जानकार आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी वर्षों तक सत्ता से बाहर संघर्ष करने वाले अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है, जबकि कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों से आए नेताओं को मंत्री पद, निगम मंडलों की अध्यक्षता और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा, “कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई है। पार्टी में अपने नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी नहीं हैं; दिल्ली से लेकर गलियों तक, भाजपा को दूसरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”
राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, सत्ता में भागीदारी अब विचारधारा या वर्षों के संघर्ष के बजाय दल-बदल की राजनीति पर आधारित हो गई है। पार्टी की जमीनी ताकत माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को केवल झंडा उठाने और रैलियों में हिस्सा लेने तक सीमित कर दिया गया है(Bjp old workers marginalized new leaders power), जबकि वास्तविक सत्ता का लाभ बाहरी नेताओं को मिल रहा है।
विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है, “जो पार्टी खुद को अनुशासन और कार्यकर्ता आधारित संगठन बताती थी, वही अब अपने ही कार्यकर्ताओं का अपमान कर रही है। वर्षों तक सत्ता-विहीन रहने वाले कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन पार्टी को समर्पित किया, उन्हें अब नजरअंदाज किया जा रहा है।”
राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भाजपा को इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर कर रही है, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की चर्चा अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।

