मुंबई: भेदभाव और नफरत के बढ़ते माहौल के बीच अहिल्यानगर ज़िले के नेवासा तालुका स्थित सौंदाला गाँव ने ग्रामसभा में जातमुक्ति (A caste-free society) का प्रस्ताव पारित कर एक नई सामाजिक मिसाल पेश की है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan sapkal) ने गाँव का दौरा कर ग्रामवासियों को बधाई दी और कहा कि सौंदाला का यह विचार पूरे राज्य में फैलना चाहिए।
ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए सपकाल ने कहा कि आज देश और दुनिया में जानबूझकर भेदभाव, डर और नफरत का वातावरण बनाया जा रहा है। जाति और धर्म की दीवारें खड़ी कर समाज में प्रेम और अपनापन कम किया जा रहा है। ऐसे समय में सौंदाला गाँव ने जातमुक्ति का प्रस्ताव पारित कर ‘डरो मत’ का संदेश दिया है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन संभव है, लेकिन जाति की पहचान से व्यक्ति को जीवनभर जूझना पड़ता है। स्कूल में प्रवेश से लेकर विवाह और सामाजिक व्यवहार तक जाति की दीवारें मजबूत होती जा रही हैं। बीड ज़िले में संतोष देशमुख की हत्या के बाद सामाजिक वातावरण और अधिक तनावपूर्ण हुआ है। अपनी ही जाति की दुकान से सामान खरीदने या अपने ही समुदाय के लोगों को प्राथमिकता देने जैसी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं, जो समाज को विभाजित करती हैं।
सपकाल ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने सद्भावना पदयात्रा निकालकर समाज के सभी वर्गों को साथ लाने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि सौंदाला गाँव ने एकता, समानता और बंधुत्व का संदेश देकर सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाया है।
इस अवसर पर उन्होंने गाडगे महाराज की जयंती का भी उल्लेख किया और कहा कि गाडगे बाबा ने स्वच्छता, अंधश्रद्धा उन्मूलन और सामाजिक न्याय का संदेश दिया था। सौंदाला का निर्णय उनके विचारों से पूरी तरह मेल खाता है और प्रदूषित होते सामाजिक वातावरण में यह मानो शुद्धिकरण का कार्य है।
दौरे के दौरान सौंदाला के सरपंच शरद आरगडे, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन जोशी, महासचिव प्रभावतीताई घोगरे, अहिल्यानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सचिन गुजर, उपाध्यक्ष ज्ञानेश्वर मुरकुटे, अभिजीत लुनिया, जिला महासचिव रंजन जाधव, नेवासा तालुका अध्यक्ष नानासाहेब पठारे, महिला जिला अध्यक्ष लताताई डांगे, शिर्डी शहर अध्यक्ष सचिन चौगुले, पाथर्डी तालुका अध्यक्ष नासिर शेख सहित अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

