Delhi Crime:दिल्ली में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में रोहिणी कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इतने गंभीर और संवेदनशील केस में पुलिस की लापरवाही चौंकाने वाली और अस्वीकार्य है।
कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज अमित सहरावत ने पूछा कि—
- जांच अधिकारी मौजूद क्यों नहीं?
- थाना प्रभारी कहाँ थे?
- विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट कोर्ट में पेश क्यों नहीं की गई?
कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति “बहुत गंभीर” है और ऐसे रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बच्ची की हालत चिंताजनक
कोर्ट ने कहा कि अपराध इतना क्रूर है कि पीड़ित बच्ची आज भी जीवन से लड़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार—
- बच्ची अस्पताल से छुट्टी पा चुकी है
- उसके निजी अंग काम नहीं कर रहे
- मल-मूत्र त्याग के लिए पेट में लगी पाइपों पर निर्भर
- इलाज कम से कम 1 साल चलेगा
- ठीक होने की कोई गारंटी नहीं
अदालत ने टिप्पणी की कि बच्ची जिस पीड़ा से गुजर रही है, वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती।
विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट गायब
कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने न तो रिपोर्ट पेश की और न ही कोई कारण बताया। यह लापरवाही अदालत को चौंकाने वाली लगी।
जज ने कहा कि इतने गंभीर मामले में—
“पुलिस की ढिलाई हैरान करने वाली है और पीड़िता को इसका नुकसान नहीं भुगतना चाहिए।”
5 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश
अदालत ने निर्देश दिया कि:
- दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी पीड़ित बच्ची को तुरंत ₹5 लाख का अंतरिम मुआवजा दे
- यह राशि अंतिम मुआवजे का हिस्सा मानी जाएगी
- आदेश की प्रति संबंधित DCP को भेजी जाए
कोर्ट ने साफ कहा कि बच्ची और उसका परिवार पुलिस की गलती के कारण और पीड़ा नहीं झेलेगा।

