Glory: बॉलीवुड अभिनेता पुलकित सम्राट के लिए ‘ग्लोरी’ की दुनिया में कदम रखना सिर्फ एक और किरदार निभाने जैसा नहीं था, बल्कि हरियाणा के एक बॉक्सर की भावनात्मक और शारीरिक दुनिया में पूरी तरह डूब जाने जैसा था। हरियाणा की बॉक्सिंग संस्कृति, वहां की भाषा, बातचीत के लहजे और किरदार के भीतर मौजूद भावनात्मक अंधेरे को समझने के लिए पुलकित ने बेहद गहन तैयारी की, जिसमें अनुशासन, संवेदनशीलता और पूरी तरह समर्पित हो जाना शामिल था।
राघव और संजय, जिन्होंने इस सीरीज़ में पुलकित के साथ परफॉर्मेंस और इमोशनल तैयारी पर करीब से काम किया, उन्होंने ‘ग्लोरी’ के पीछे की क्रिएटिव प्रक्रिया, हरियाणवी लहजे को समझने के लिए पुलकित की अनोखी मेहनत और उनकी की लगातार सीखने की जिज्ञासा के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, सबसे पहले पुलकित ने किरदार की भावनात्मक और सामाजिक दुनिया को समझने पर ध्यान दिया।
मुझे अभी भी याद है कि हमारी शुरुआती बातचीत इस बात को समझने पर थी कि ये किरदार किस दुनिया से आते हैं, उस माहौल में सम्मान, प्रतिष्ठा और परिवार की इज़्ज़त का क्या मतलब है, उनके लिए क्या दांव पर लगा है और हरियाणा की बॉक्सिंग संस्कृति में सफलता कैसी दिखती है, जहां लगभग हर गली में एक बॉक्सिंग अकादमी है। हम समझना चाहते थे कि ऐसी दुनिया में किसी के लिए सबसे अलग उभरकर आना वास्तव में कितना मुश्किल होता है। हमारी तैयारी सिर्फ बॉक्सिंग तक सीमित नहीं थी। हम वहां के खाने, भाषा और बातचीत की लय को समझना चाहते थे।
इसमें बहुत मदद मिली क्योंकि पुलकित ने रेक्की टीम के साथ हरियाणा में समय बिताया और इन चीज़ों को करीब से महसूस किया।सच कहें तो इस प्रोजेक्ट में हम आधिकारिक तौर पर डायलॉग या डाइलेक्ट कोच नहीं थे, लेकिन हम एक ऐसा किस्सा शेयर करना चाहेंगे, जिसने पुलकित की मेहनत को पूरी तरह साबित कर दिया। दरअसल एक बार राघव ने यूं ही कहा था कि वह हरियाणवी में रैप करने की कोशिश करे, क्योंकि इससे भाषा की लय, ऊर्जा और फ्लो को समझना आसान हो जाता है।
हालांकि राघव यह बात बस यूं ही कहकर भूल गए। लेकिन एक हफ्ते बाद पुलकित ने सबको चौंका दिया। यकीन मानिए करीब एक हफ्ते बाद पुलकित ने एक सेशन में आकर बोला, ‘मैं आपको कुछ दिखाना चाहता हूं।’ फिर उसने पूरे कॉन्फिडेंस, एटीट्यूड और रिदम के साथ एक पूरा हरियाणवी रैप परफॉर्म किया। वह सच में बेहद प्रभावशाली था।सच कहें तो उस पल ने हमें पुलकित की प्रतिबद्धता का असली स्तर दिखा दिया। हमें सिर्फ यह बात प्रभावित नहीं कर रही थी कि उन्होंने यह किया, बल्कि यह कि इतने कम समय में उन्होंने खुद को उस आइडिया के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया। वे भाषा और उस दुनिया को सतही तौर पर नहीं, बल्कि गहराई से समझना चाहते थे।
राघव और संजय ने कहा,सीरीज़ में कई ऐसे दृश्य थे जिनमें पुलकित को भावनात्मक रूप से काफी गहराई में जाना पड़ा, खासकर वे पल जहां किरदार बाहर से शांत रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन भीतर बहुत कुछ चल रहा होता है। विशेष रूप से गुड़िया वाले दृश्य इस लिहाज़ से बहुत महत्वपूर्ण थे। एपिसोड 5 का बेसमेंट सीन भी काफी बड़ा था और मोहम्मद अली वाला सीन भी भावनात्मक रूप से बेहद खास था।
पुलकित की भावनाओं को जल्दी और सच्चाई से आत्मसात करने की क्षमता भी काबिले तारीफ है। अगर आप उन्हें कोई इमेज, विचार या भावनात्मक स्थिति देते हैं, तो वह उसे बहुत जल्दी और ईमानदारी से पकड़ लेते हैं। वह प्रक्रिया के लिए पूरी तरह खुले रहते हैं और इसी वजह से हम भावनात्मक गहराई तक बहुत तेजी से पहुंच पाते थे।
हमने इस किरदार को कई अलग-अलग तरीकों से एक्सप्लोर किया। इनमें फिल्मों और परफॉर्मेंस को रेफरेंस के तौर पर देखना, मूवमेंट एक्सरसाइज़, एटीट्यूड लाइन्स, एनिमल स्टेटस, इम्प्रोवाइजेशन, 80 से ज्यादा कैरेक्टर सवालों के जवाब देना, कैमरे पर बार-बार सीन रिहर्स करना, हर लाइन को तोड़कर समझना और लगातार नए प्रयोग करना।
इस पूरी प्रक्रिया में पुलकित पूरी तरह समर्पित रहा और उसने कभी कोई शॉर्टकट नहीं लिया। साथ ही कई सालों से इंडस्ट्री में होने के बावजूद पुलकित ने इस प्रक्रिया को एक नए छात्र की तरह अपनाया। मुझे सबसे ज्यादा प्रेरित इस बात ने किया कि इतने सालों बाद भी वे खुद को एक छात्र की तरह ट्रीट करते हैं। सीखते रहने की ऐसी भूख बहुत कम देखने को मिलती है।

