नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और यूरोप के दबावों के बीच भारत ने यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। इस डील को दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल ट्रेड” कहा है और इसे वैश्विक व्यापार की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।

डील से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा:
इस समझौते के तहत भारत यूरोप के करीब 27 देशों के 2 अरब लोगों के बाजार तक सीधे पहुंच सकेगा। यूरोप में भारत के कपड़े, चमड़े, आभूषण और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद अब ड्यूटी-फ्री पहुंचेंगे। वहीं, यूरोप से आने वाले वाइन, डेयरी प्रोडक्ट और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुएं भारत में कम टैक्स के साथ उपलब्ध होंगी।
डॉलर की दादागिरी पर रोक:
सबसे बड़ा प्रभाव वित्तीय क्षेत्र में होगा। यूरोप और भारत के बीच सीधे मुद्रा आदान-प्रदान से डॉलर पर निर्भरता कम होगी। यूरो और रुपया मजबूत होंगे, जबकि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक दबदबे वाली स्थिति कमजोर हो सकती है।
ट्रंप के लिए बड़ा झटका:
ट्रंप की मेक अमेरिका ग्रेट अगेन योजना और टैरिफ की धमकी यूरोप और भारत को अमेरिकी दबदबे से मुक्त कर रही है। इससे ट्रंप ने यूरोपियन यूनियन के साथ संभावित ट्रेड डील का अवसर खो दिया है और उनकी वैश्विक आर्थिक रणनीति को चुनौती मिल रही है।
भविष्य में रणनीतिक फायदे:
यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी। इससे भारत को रक्षा सौदे, साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग में भी मजबूती मिलेगी। आईटी और स्किल्ड प्रोफेशनल्स को यूरोप में काम करने के अवसर भी बढ़ेंगे।
भारत की तैयारी:
आरबीआई ने विदेशी बैंकों को भारत में स्पेशल रुपये वोस्ट्रो अकाउंट खोलने का निर्देश दिया है। इसके जरिए भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच रुपये और यूरो में सीधे कारोबार शुरू हो सकेगा। रूस, श्रीलंका, UAE और जर्मनी सहित 22 से अधिक देश भी इस प्रणाली में शामिल होने के लिए सहमत हैं।
विशेषज्ञों की राय:
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस डील से भारत वैश्विक आर्थिक नक्शे में अपनी स्थिति मजबूत करेगा और ट्रंप के टैरिफ दवाब का असर यूरोप और भारत के सहयोग से कम होगा। यह डील भारत के लिए आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक प्रभाव के मामले में अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

