India-US Trade Deal Protest: प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने झंडे और बैनर लेकर समझौते के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार से कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा करने की मांग की।
किसान संगठनों का आरोप है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता देश के कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर इन दिनों भारत दौरे पर हैं और व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
किसान नेताओं ने बताया कि फरवरी में हुए व्यापारिक फ्रेमवर्क समझौते के आधार पर प्रारंभिक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इस प्रस्ताव में अमेरिका से आयातित कृषि एवं खाद्य उत्पादों पर शुल्क कम करने या समाप्त करने की संभावना शामिल है। किसानों का मानना है कि यदि अमेरिकी उत्पाद कम शुल्क पर भारतीय बाजार में पहुंचते हैं, तो उनकी कम कीमत के कारण घरेलू उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते से बाहर नहीं रखती है, तो किसान देशव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे। उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त से दातासिंहवाला-खनौरी मोर्चे से पदयात्रा शुरू होगी, जो 25 अगस्त को जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाली विशाल किसान रैली के साथ समाप्त होगी।
डल्लेवाल ने बताया कि आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए 20 जुलाई को मध्य प्रदेश में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की राष्ट्रीय बैठक बुलाई गई है। प्रदर्शन में सतनाम सिंह बेहरू, पी.आर. पांडियन, जितेंद्र शर्मा, राजेंद्र सिंह खालसा, हर्षदीप गिल, रामपाल शर्मा और बलदेव सिंह सिरसा सहित कई राज्यों के किसान नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अभिमन्यु कोहाड़ ने किया। किसान नेताओं ने दोहराया कि वे कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और ऐसे किसी भी व्यापारिक समझौते का विरोध करेंगे, जिससे भारतीय किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो।

