तेहरान/वॉशिंगटन/तेल अवीव। मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद देश में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक हालिया हमलों के बाद यह घटनाक्रम सामने आया।
ईरान की सत्ता संरचना में सुप्रीम लीडर की भूमिका सर्वोच्च होती है, ऐसे में उनकी मौत ने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से स्थापित शासन व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी है।

ईरान ने तेजी दिखाते हुए Ahmad Vahidi को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है।
वाहिदी इससे पहले कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रह चुके हैं और रक्षा व गृह मंत्री जैसे अहम पद संभाल चुके हैं। वे लंबे समय से Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़े रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम विवादों में भी रहा है। 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में AMIA यहूदी केंद्र पर हुए हमले के मामले में वे इंटरपोल की रेड नोटिस सूची में शामिल रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ पहले ही उन पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।
हमलों के बाद ईरान ने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती पहले से बढ़ाई गई थी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने आपात बैठक में हमलों की निंदा करते हुए तत्काल बातचीत की अपील की है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान की केंद्रीय सत्ता कमजोर पड़ती है तो इसका सीधा असर Hamas, Hezbollah और Houthi movement जैसे समूहों पर पड़ सकता है, जिन पर लंबे समय से ईरान के समर्थन के आरोप लगते रहे हैं। इससे Israel को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
क्या बदलेगा मिडिल ईस्ट का समीकरण?
ईरान शिया राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है और सऊदी अरब व तुर्की के साथ उसका प्रभाव क्षेत्रीय संतुलन तय करता रहा है। यदि सत्ता परिवर्तन स्थायी रूप लेता है तो:
- क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है
- अमेरिका समर्थित सरकार की चर्चा तेज हो सकती है
- आंतरिक अस्थिरता और जनआंदोलन बढ़ सकते हैं
- IRGC की भूमिका और मजबूत हो सकती है
कुछ प्रवासी ईरानी समुदायों में पूर्व शाही परिवार के उत्तराधिकारी Reza Pahlavi का नाम भी चर्चा में है, हालांकि ईरान के भीतर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटनाक्रम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे मध्य पूर्व में इसका असर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिन तय करेंगे कि ईरान में नया नेतृत्व सख्त रुख अपनाता है या अंतरराष्ट्रीय वार्ता का रास्ता खोलता है।
फिलहाल, तेहरान से लेकर वॉशिंगटन और तेल अवीव तक कूटनीतिक हलचल तेज है और दुनिया की निगाहें ईरान पर टिकी हुई हैं।

