‘शिकायत नहीं आई’ कहकर अपराध पर डाली गई चादर, सुरक्षा व्यवस्था खतरे में
मुंबई: पश्चिम रेलवे के जोगेश्वरी स्टेशन पर 30 जनवरी को दोपहर 2:38 बजे हुई एक शर्मनाक घटना ने रेलवे सुरक्षा तंत्र की गहन चुप्पी और लापरवाही उजागर कर दी है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 (चर्चगेट दिशा) पर दबंगों ने एक नाबालिग को नंगा कर बेरहमी से पीटा। यह जघन्य घटना यात्रियों की भीड़ के सामने हुई, जिसे कैमरे और फोटोज़ में दर्ज किया गया है।

लेकिन, सुरक्षा एजेंसियों ने इस बर्बरता पर कार्रवाई करने के बजाय इसे मामूली बना दिया। जीआरपी और आरपीएफ ने घटना को “स्टेशन प्रांगण” बताकर गंभीरता को घटाने का प्रयास किया।
स्थानीय आईपीएफ राजीव सलारिया ने घटना को तोड़-मरोड़ कर वरिष्ठ अधिकारियों को बताया, जबकि जीआरपी ने वही पुराना बहाना दोहराया –
“किसी ने शिकायत नहीं की।”
विशेषज्ञों का कहना है कि जब अपराध कैमरे में कैद हो, पीड़ित नाबालिग हो और स्थान रेलवे प्लेटफॉर्म हो, तो एफआईआर दर्ज करना कानूनन अनिवार्य है। शिकायत का इंतजार करना ड्यूटी से पलायन के समान है।
सबसे गंभीर सवाल:
- नाबालिग की पहचान क्यों नहीं हुई?
- हमला करने वाले दबंग कौन थे?
- बच्चे की मेडिकल जाँच कराई गई या नहीं?
- चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सूचना दी गई या नहीं?
घटना साफ़ करती है कि रेलवे प्लेटफॉर्म अब अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित ज़ोन बन चुके हैं। कानून लागू करने के बजाय सुरक्षा बल लीपा-पोती कर रहे हैं।
अब सवाल यही है – क्या रेलवे प्लेटफॉर्म पर कानून चलेगा या दबंगों और असामाजिक तत्वों की मनमानी?
इसलिए यह जरूरी है कि आईपीएफ राजीव सलारिया और संबंधित जीआरपी अधिकारियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की जाए, ताकि यह तय हो सके कि रेलवे सुरक्षा बल जनता के लिए हैं या अपराधियों की ढाल बन चुके हैं।

