मतदाता सूची में गड़बड़ी पर विपक्ष सख्त हो, चुप्पी टूटी नहीं तो लोकतंत्र पर खतरा: पार्टियों को चेतावनी
आर.एस. नेटवर्क। अश्विनीकुमार

मुंबई | कालबादेवी के रामवाड़ी स्थित प्रभु सुंदर बिल्डिंग, वार्ड क्रमांक 222 में मतदाता सूची को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नाम और दो अलग-अलग फोटो के आधार पर दो मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल मच गई है और नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया खेल प्रतीत होता है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। प्रभु सुंदर बिल्डिंग में रहने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम बदले हुए रूप में रुद्रेश बताया जा रहा है, से इलाके के लोगों की नियमित मुलाकात होती रहती है। रविवार को जब कुछ नागरिक उनके घर पहुंचे, तो जानकारी मिली कि भाजपा उम्मीदवार रीता मकवाना की ओर से मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा था। संबंधित बिल्डिंग के लिए कुल चार शीट की मतदाता पर्चियां तैयार की गई थीं।

जब इन शीट्स की गहन जांच की गई, तो चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। एक जगह पिता के नाम की जगह मां का नाम दर्ज था, तो दूसरी जगह पिता का नाम लिखा गया था। इतना ही नहीं, एक स्थान पर कमरे का नंबर 61 दर्शाया गया, जबकि दूसरी जगह वही व्यक्ति कमरे नंबर 6 में दर्ज मिला। दोनों प्रविष्टियों में अलग-अलग फोटो लगाए गए थे, जिससे दो अलग मतदाताओं का आभास पैदा किया गया।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस प्रकार की त्रुटियां यह साफ़ संकेत देती हैं कि मतदाता सूची तैयार करने में या तो घोर लापरवाही बरती गई है या फिर जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस मतदाता सूची के निर्माण पर चुनाव आयोग करोड़ों रुपये खर्च करता है, उसमें ऐसी गंभीर चूक कैसे संभव है। लोगों को आशंका है कि यह मामला केवल इसी एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता तैयार किए गए हो सकते हैं।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और वंचित बहुजन आघाड़ी से तत्काल और आक्रामक भूमिका निभाने की मांग तेज़ हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अब भी विपक्ष चुप्पी साधे रहता है, तो आने वाले चुनावों में लोकतंत्र के साथ बड़ा खिलवाड़ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि फर्जी आधार कार्ड के सहारे फर्जी मतदान कराया जा सकता है और अलग-अलग इमारतों में इस तरह के डुप्लिकेट मतदाता खड़े किए जा सकते हैं। नागरिकों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि तत्काल आधार कार्ड की सत्यता जांचने के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि डुप्लिकेट और फर्जी आधार के जरिए किसी अन्य के नाम पर मतदान कराने की साजिश को समय रहते रोका जा सके।
यह मामला न केवल सत्ताधारी दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि चुनाव आयोग(Mumbai Election 2026) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक तूफान बन सकता है।

