महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए लुभावने, भ्रामक और संभावित रूप से आचार संहिता के उल्लंघन वाले बयानों पर अब बड़ी कार्रवाई का संकेत मिल रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, मंत्री गुलाबराव पाटिल, विधायक चित्रा वाघ समेत 20 नेताओं के खिलाफ जिलाधिकारियों से तत्काल रिपोर्ट मांगी है।
इन नेताओं के भाषणों के वीडियो और बयान वायरल होने के बाद आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद कई नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
किस बयान पर फंसे कौन नेता?
शिंदे का ‘खजाने की चाबी’ बयान बना परेशानी
चुनावी सभा में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था,
“राज्य का खजाना हमारे पास है।”
विपक्ष ने इस बयान को सत्ता के दुरुपयोग और मतदाताओं को प्रलोभन देने के तौर पर पेश किया था। अब आयोग ने इस पर भी रिपोर्ट तलब की है।
गुलाबराव पाटिल का ‘लक्ष्मी दर्शन’ बयान
सरकारी मंत्री गुलाबराव पाटिल ने मतदाताओं से कहा था—
“लक्ष्मी आने वाली है, इसलिए बाहर खाट पर सोएं।”
विपक्ष ने इसे चुनाव में धन वितरण का इशारा बताते हुए शिकायत की थी।
चित्रा वाघ: ‘नमक कोई भी खा लें, बटन कमल का दबेगा’
विधायक चित्रा वाघ के बयान को भी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या बयान मतदाताओं पर दबाव या दुष्प्रचार का हिस्सा था।
अजित पवार के भाषण भी हो सकते हैं जांच के दायरे में
डिप्टी सीएम अजित पवार ने कई सभाओं में मतदाताओं को रिझाने वाले वादे और राजनीतिक संकेत दिए थे। आयोग ने संबंधित जिलाधिकारियों से उनके बयानों की पूरी रिपोर्ट मांगी है।
DM को क्यों भेजा गया नोटिस?
निर्वाचन आयोग ने उन सभी जिलाधिकारियों (District Magistrates) से फील्ड रिपोर्ट मांगी है जहां ये बयान दिए गए थे।
रिपोर्ट में यह जानकारी मांगी गई है—
- क्या बयान आचार संहिता का उल्लंघन है?
- क्या मतदाताओं को प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से लुभाया गया?
- क्या प्रशासन को शिकायतें मिलीं?
- क्या सभा रिकॉर्डिंग और साक्ष्य उपलब्ध हैं?
आगे क्या हो सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, आयोग रिपोर्ट मिलने के बाद नोटिस, चेतावनी या केस दर्ज करने जैसा कठोर कदम भी उठा सकता है। चुनावी माहौल में यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से बड़ा असर डाल सकती है क्योंकि लगभग हर बड़े गुट के नेता इसके दायरे में आते हैं।

