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Mandana Karimi: ईरान के हालात पर भावुक हुईं मंदाना करीमी, बोलीं– “अगर वहीं होती तो शायद मेरा भी वही हाल होता”

Mandana Karimi ने ईरान में महिलाओं की स्थिति और दमन पर खुलकर बात करते हुए कहा— अगर वह वहां होतीं तो शायद उनका भी वही हाल होता जो Mahsa Amini का हुआ।
Mandana Karimi ने ईरान में महिलाओं की स्थिति और दमन पर खुलकर बात करते हुए कहा— अगर वह वहां होतीं तो शायद उनका भी वही हाल होता जो Mahsa Amini का हुआ।
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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकीं Mandana Karimi ने हाल ही में अपने जन्मस्थान ईरान की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर खुलकर चिंता जताई है। एक्ट्रेस ने ईरान में महिलाओं और आम नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वहां के हालात उनके लिए सिर्फ खबर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा दर्द हैं।

मंदाना करीमी ने बताया कि उनका जन्म ईरान में हुआ और वह करीब 18 साल की उम्र तक वहीं रहीं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक उनके पास ईरान का पासपोर्ट भी था, इसलिए वहां की परिस्थितियों से उनका गहरा रिश्ता रहा है। एक्ट्रेस के मुताबिक जब वह ईरान से बाहर आईं और दुनिया को करीब से देखा, तब उन्हें अपने देश की वास्तविक स्थिति का और स्पष्ट एहसास हुआ।

एक्ट्रेस ने बताया कि ईरान में उनके कई दोस्तों को गिरफ्तार किया गया और कुछ लोगों को सख्त सजा तक दी गई। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक टकराव नहीं है, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है।

मंदाना करीमी ने 8 जनवरी को हुई हिंसक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वह दिन बेहद दर्दनाक था। उनके अनुसार उस दिन सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को मार दिया गया। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग पिछले कई दशकों से आजादी और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर बार उनकी आवाज को दबा दिया जाता है।

महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए मंदाना ने कहा कि ईरान में महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है। कई बार उन्हें अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जब वह अपने परिवार और दोस्तों से वहां की तस्वीरें और खबरें देखती हैं तो खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि समय रहते ईरान छोड़कर बाहर आ गईं।

एक्ट्रेस ने कहा कि कई बार उन्हें यह सोचकर डर लगता है कि अगर वह ईरान में ही होतीं तो शायद उनका भी वही हाल होता जो Mahsa Amini का हुआ। महसा अमीनी 22 वर्षीय कुर्द मूल की महिला थीं, जिनकी 2022 में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी और जिसके बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

मंदाना करीमी ने दुनिया भर के लोगों से अपील की कि वे ईरान के हालात को केवल राजनीतिक मुद्दा समझकर नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि वहां के लोग लंबे समय से अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उनकी आवाज सुननी चाहिए।

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