मुंबई। भारत की आज़ादी की कहानी को ज़मीन पर उतारने वाला मुंबई का ‘फ्रीडम ट्रेल’(Mumbai Freedom Trail) आज खुद बेबसी की तस्वीर बन चुका है। जिस ऐतिहासिक पैदल मार्ग को देश के स्वतंत्रता संग्राम, खासकर अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से जुड़े Quit India Movement की स्मृति को संजोने के लिए विकसित किया गया था, वही ट्रेल आज हॉकर्स, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार है।
आजादी के नायकों की विरासत को दर्शाने वाला यह क्यूरेटेड वॉकिंग रूट आज भी हॉकर्स से आज़ाद नहीं हो पाया है। जगह-जगह ठेले, अस्थायी दुकानें और अवैध कब्ज़े न सिर्फ पैदल यात्रियों की राह रोक रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
विडंबना यह है कि जिस रास्ते ने देश को “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया, उसी रास्ते पर आज नागरिकों को चलने की आज़ादी तक नहीं मिल रही। पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक—सभी को संकरे रास्तों, भीड़ और गंदगी से जूझना पड़ता है। सूचना पट्टिकाएं, विरासत चिन्ह और गाइडेड साइनबोर्ड कई जगह हॉकर्स के पीछे छिप चुके हैं।
नगर निगम और प्रशासन ने फ्रीडम ट्रेल को सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत के रूप में विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। सवाल यह है कि जब मुंबई स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी और टूरिज़्म हब बनने की बात करती है, तो क्या उसकी आज़ादी की सबसे बड़ी कहानी को यूं ही अतिक्रमण के हवाले छोड़ दिया जाएगा?
आज ज़रूरत इस बात की है कि फ्रीडम ट्रेल को सिर्फ इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सच में ‘फ्री’ बनाया जाए।
अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां आज़ादी की कहानी किताबों में पढ़ेंगी—और मुंबई में उसका रास्ता तलाशती रह जाएंगी।

