चंडीगढ़ (Chandigarh)। पंजाब की राजनीति में पिछले दो महीनों से जारी अनिश्चितता और बयानबाज़ी का दौर अब एक बड़े राजनीतिक धमाके के साथ खत्म हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव भूपेश बघेल ने शुक्रवार को इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। हालांकि इससे पहले 31 जनवरी को नवजोत कौर सिद्धू खुद पार्टी से इस्तीफा दे चुकी थीं, लेकिन कांग्रेस का यह सख्त कदम साफ संकेत देता है कि अब पार्टी सिद्धू परिवार की खुली बयानबाज़ी को और सहन करने के मूड में नहीं है।
पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद नवजोत कौर सिद्धू के तेवर और आक्रामक हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे हमले करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के लिए बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें ‘पप्पू’ कहा। यह शब्द आमतौर पर कांग्रेस विरोधी खेमे द्वारा राहुल गांधी के मज़ाक के लिए प्रयोग किया जाता है। इस बयान के बाद कांग्रेस और सिद्धू परिवार के रिश्तों में दरार पूरी तरह सार्वजनिक हो गई है।
‘500 करोड़ का सूटकेस’ बयान से बढ़ा विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ें दिसंबर 2025 में दिए गए उस बयान से जुड़ी हैं, जिसमें नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा वही बनता है, जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस लेकर आता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू तभी सक्रिय राजनीति में लौटेंगे, जब उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाएगा। उस समय उन्होंने कांग्रेस पर गुटबाज़ी का आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी के भीतर कई नेता खुद ही कांग्रेस को हराने में लगे हुए हैं।
क्या भाजपा में होगी ‘घर वापसी’?
नवजोत कौर सिद्धू के निष्कासन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवजोत सिंह सिद्धू का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। हालांकि सिद्धू तकनीकी रूप से अब भी कांग्रेस में हैं, लेकिन उनकी पत्नी के हालिया बयानों को उनके भविष्य की दिशा का संकेत माना जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों में नवजोत कौर ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा की खुलकर तारीफ की। इससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि सिद्धू परिवार एक बार फिर भाजपा की ओर लौट सकता है, जहां से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई थी।
विद्रोह से पुराना नाता
सिद्धू परिवार का राजनीतिक इतिहास बगावती तेवरों से भरा रहा है। 2012 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर पूर्व से जीतने के बाद भी डॉ. नवजोत कौर ने अपनी ही अकाली-भाजपा सरकार पर फंड वितरण में भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। 2014 में जब भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काटकर अरुण जेटली को अमृतसर से उम्मीदवार बनाया, तो रिश्ते और बिगड़ गए। 2016 में सिद्धू के आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चाएं भी चलीं, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों कांग्रेस में शामिल हो गए।
कैप्टन से टकराव और कांग्रेस में अंत
कांग्रेस सरकार में मंत्री बनने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच टकराव खुलकर सामने आया। बेअदबी मामलों को लेकर सिद्धू ने अपनी ही सरकार को घेरा, जिसके चलते अंततः कैप्टन को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने पर भी नवजोत कौर सिद्धू ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनके पति इस पद के लिए बेहतर विकल्प थे।
फिलहाल नवजोत सिंह सिद्धू ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन पंजाब की राजनीति में यह खामोशी किसी बड़े सियासी तूफान का संकेत मानी जा रही है। राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमलों के बाद कांग्रेस में सिद्धू परिवार के लिए दरवाज़े लगभग बंद नजर आ रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या सिद्धू एक बार फिर भगवा खेमे में वापसी करेंगे या पंजाब की राजनीति में कोई नई चाल चलेंगे।

