नहियां ग्रामसभा के 18 तालाब खत्म, जल-संकट गहराया: पर्यावरण और जनजीवन पर सीधा असर
वाराणसी (Varanasi News)। नहियां ग्रामसभा में तालाबों पर अवैध कब्जे का असर अब गंभीर जल-संकट के रूप में सामने आ रहा है। मगर यहां खामोशी है—लंबी, गहरी और संदिग्ध। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों, ज्ञापनों और न्यायालयी आदेशों के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई।
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सवाल सीधा है—क्या यह महज़ लापरवाही है, या फिर मिलीभगत और घूसखोरी के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं? स्थिति की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं—
- 18 तालाबों पर पूरा कब्जा
ग्रामसभा के सभी 18 तालाबों पर अवैध कब्जा हो चुका है। तालाबों की जमीन पर पक्के मकान और निर्माण खड़े कर दिए गए हैं। - तालाबों का पानी पूरी तरह सूखा
अतिक्रमण और भराव के कारण तालाबों में पानी नहीं बचा है। जलस्रोत खत्म होने से गांव की प्राकृतिक जल-व्यवस्था टूट चुकी है। - पर्यावरण को भारी नुकसान
तालाबों के खत्म होने से पर्यावरण असंतुलन बढ़ा है। गर्मी में तापमान अधिक महसूस होता है और हरियाली कम होती जा रही है। - भूजल स्तर बेहद नीचे गया
तालाब खत्म होने से पानी का रिचार्ज बंद हो गया है, जिससे भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। - गर्मियों में पेयजल संकट
गर्मी के मौसम में कई हैंडपंप सूख जाते हैं। कुछ-कुछ इलाकों में लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पाता। - प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
तालाब खत्म होने, घर बन जाने और जल-संकट के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। - ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने सभी तालाबों का तत्काल सीमांकन, अतिक्रमण हटाने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और जल-संरक्षण योजना लागू करने की मांग की है।
गांव वालों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि जीवन और भविष्य का सवाल है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में नहियां ग्रामसभा गंभीर जल-आपदा की चपेट में आ सकती है।

