पुणे: भाई के लिए कोई भी हद तक जाने की कहावत को सच कर दिखाते हुए पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय में कार्यरत एक उपनिरीक्षक ने अपने ही सगे भाई को पुलिस में भर्ती कराने के लिए बड़ा फर्जीवाड़ा किया। वर्ष 2016 में उसने अपने भाई की जगह खुद ही लिखित परीक्षा दी। यह घोटाला नौ साल बाद उजागर हुआ और पुणे पुलिस ने उपनिरीक्षक को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
गिरफ्तार उपनिरीक्षक का नाम सुप्पडसिंग शिवलाल गुसिंगे है। उसके साथ उसके भाई गजानन शिवलाल गुसिंगे के खिलाफ भी शिवाजीनगर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। दोनों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, बनावट दस्तावेज तैयार करना, फर्जी दस्तावेजों को असली बताना और साजिश रचने जैसी धाराओं के साथ परीक्षा गैरव्यवहार प्रतिबंधक कानून के तहत केस दर्ज हुआ है। यह घटना 24 अप्रैल 2016 को शिवाजीनगर पुलिस मुख्यालय के मैदान में घटी थी।
कैसे हुआ था फर्जीवाड़ा?
2016 में पुणे शहर पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान गजानन गुसिंगे ने मैदान परीक्षण तो खुद दिया, लेकिन 24 अप्रैल की लिखित परीक्षा में अपनी जगह “डमी” उम्मीदवार बैठाया। इस डमी उम्मीदवार के लिए फर्जी पहचान पत्र भी बनाए गए। मामला सामने आने पर गजानन और उसके स्थान पर परीक्षा देने वाले व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया।
जांच के दौरान पता चला कि परीक्षा देने वाला डमी कोई और नहीं, बल्कि गजानन का सगा भाई सुप्पडसिंग था। इसी बीच सुप्पडसिंग 2023 में महाराष्ट्र पुलिस में उपनिरीक्षक के रूप में नियुक्त हो गया और वर्तमान में पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय में तैनात था।
9 साल बाद खुला राज, एसआई गिरफ्तार
जांच अधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय से जानकारी मंगाई और सुप्पडसिंग की नियुक्ति की पुष्टि की। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने राज्य राखीव दल (SRPF) ग्रुप नंबर 7 से सुप्पडसिंग को गिरफ्तार कर लिया।
अब पुलिस को गजानन की तलाश है और यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी पहचान पत्र कहां से और कैसे बनाए गए थे। इसी आधार पर आरोपी को पुलिस हिरासत में देने की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार किया और सुप्पडसिंग को तीन दिन की पुलिस कोठड़ी सुनाई।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता चेतन भुतडा ने पैरवी की, जबकि सरकारी वकील श्रीधर जावळे ने पुलिस का पक्ष रखा।

