अंबरनाथ, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर या अचलपुर हर जगह सिर्फ समझौता, जनता की जमी हुई मेहनत पर राजनीति खेल
मुंबई/अमरावती: राजनीतिक सिद्धांत और वैचारिक मजबूती को ताक पर रखकर, महाराष्ट्र की सभी प्रमुख और क्षेत्रीय पार्टियां केवल सत्ता की कुर्सी पाने के लिए गठजोड़ करती नजर आ रही हैं। चाहे वह अंबरनाथ नगरपालिका हो, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका, उल्हासनगर महानगरपालिका, या अचलपुर नगर परिषद, हर जगह सिर्फ समझौते और गठबंधन ही देखने को मिल रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन गठबंधनों का मुख्य उद्देश्य जनता के टैक्स से चलने वाली सरकारी मशीनरी पर नियंत्रण और संसाधनों का निजी स्वार्थ के लिए उपयोग है। भाजपा, कांग्रेस या क्षेत्रीय पार्टियां—कोई भी पीछे नहीं है, और हर कोई सत्ता के लिए साफ-सुथरी राजनीति छोड़कर, केवल अपने फायदे के लिए किसी भी छल-कपट या समझौते को तैयार है।
हालिया उदाहरण:
-कल्याण-डोंबिवली में मनसे के पांच पार्षदों ने भाजपा-शिंदे गठबंधन को समर्थन दिया, जबकि उद्धव गुट की शिवसेना (उबाठा) हार का सामना कर रही थी।
-अचलपुर नगर परिषद में भाजपा, एआईएमआईएम और कांग्रेस ने तालमेल कर समिति अध्यक्ष निर्विरोध चुने, स्थानीय विधायक तक को इसमें विश्वास में नहीं लिया गया।
-अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाया, जिसके बाद कई पार्षदों के पार्टी बदलने की खबरें सामने आईं।
जनता का पैसा, सत्ता का खेल
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के गठबंधन सिर्फ और सिर्फ जनता के टैक्स और सरकारी फंड का निजीकरण सुनिश्चित करने के लिए बनाए जा रहे हैं। किसी भी नैतिक या विकास-उन्मुख एजेंडे की कोई परवाह नहीं।
सावधान!
लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और जनता की मेहनत के पैसों को इस तरह राजनीतिक गठजोड़ के लिए हथियार बनाने की प्रवृत्ति, सख्त जनजागरूकता और सतर्कता की मांग करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जनता और मीडिया ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया, तो यह गठबंधन केवल सत्ता की कुर्सी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले बनकर रह जाएंगे।

