पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने की ठाणे में ज़िंदा पेड़ों पर सजावट बंद करने की मुख्यमंत्री से मांग
ठाणे (Thane News)।
शहर में ज़िंदा पेड़ों पर की जा रही बिजली की लाइटिंग और सजावट को लेकर पर्यावरण का गंभीर मुद्दा खड़ा हो गया है। पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने इस प्रथा को सीधे-सीधे पर्यावरण अपराध (Environment Crime) करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ठाणे में ऐसे सभी कार्य तुरंत बंद करने की मांग की है।

डॉ. सिनकर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि त्योहारों, कार्यक्रमों और तथाकथित ब्यूटीफिकेशन के नाम पर ज़िंदा पेड़ों पर वायरिंग, ड्रिलिंग, कीलें ठोकना और भारी लाइटिंग उपकरण टांगना पेड़ों के लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेड़ सजावटी खंभे नहीं, बल्कि शहर की सांस और नागरिकों की जीवनरेखा हैं।
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल पेड़ों को शारीरिक नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पक्षियों, कीट-पतंगों और पूरी जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। पेड़ों पर की गई लाइटिंग उनके प्राकृतिक विकास, जीवन चक्र और पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ रही है।
डॉ. सिनकर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर राज्य और केंद्र सरकार नेट ज़ीरो लाइफ मिशन और क्लाइमेट चेंज से लड़ने की बातें कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निकाय खुलेआम ज़िंदा पेड़ों पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने इसे नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच की खतरनाक विडंबना बताया।
इस पृष्ठभूमि में डॉ. सिनकर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि
- ज़िंदा पेड़ों पर किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रिक लाइटिंग, डेकोरेशन और विज्ञापन सामग्री लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
- नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं
अपने पत्र के अंत में उन्होंने भावनात्मक अपील करते हुए लिखा,
“पेड़ चीख नहीं सकते, लेकिन पूरे शहर को चुपचाप उनके ज़ख्म सहने पड़ते हैं। अगर आज हम पेड़ों के लिए नहीं खड़े हुए, तो कल शहर के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।”
पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।

