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Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

Rastriya Swabhimaan
Last updated: February 11, 2026 4:48 am
Rastriya Swabhimaan
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5 Min Read
सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में 3 मिनट 10 सेकंड के छह अंतरों वाले “वंदे मातरम्” संस्करण को अनिवार्य किया।
सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में 3 मिनट 10 सेकंड के छह अंतरों वाले “वंदे मातरम्” संस्करण को अनिवार्य किया।
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वंदे मातरम् का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित

Contents
छंद 1छंद 2छंद 3छंद 4छंद 5छंद 6अब तय समय-सीमा के भीतर ही होगा गायनक्या “वंदे मातरम्” शुरू में सिर्फ बंगाल का गीत था?राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यताएकरूपता बनाम बहस

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के गायन और वादन को लेकर एक नया आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया है। अब सभी सरकारी एवं आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम्(Vande Mataram) का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है, अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

वंदे मातरम्

छंद 1

वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्,
फुल्ल-कुसुमित-द्रुम-दल-शोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर-भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्।।


छंद 2

वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खर-करवाले,
अबला केन मा एत बले?
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,
रिपुदलवारिणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्।।


छंद 3

वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गढ़ि
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।
वन्दे मातरम्।।


छंद 4

वन्दे मातरम्।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी।
नमामि त्वाम्।
नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्।।


छंद 5

वन्दे मातरम्।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्,
शत्रुदलवारिणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्।।


छंद 6

वन्दे मातरम्।
त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति,
त्वं हि शक्ति मातरम्।
वन्दे मातरम्।।

यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसरों, राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों अथवा राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में लागू होगा।

इसके साथ ही राज्यों के राज्यपालों के आगमन तथा उनके संबोधन से पूर्व और पश्चात भी इसी निर्धारित संस्करण और समय-सीमा का पालन करना आवश्यक होगा।

सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में एकरूपता, गरिमा और प्रोटोकॉल की स्पष्टता सुनिश्चित करना है।


अब तय समय-सीमा के भीतर ही होगा गायन

नए निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन या वादन निर्धारित 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि के भीतर ही किया जाएगा। इससे पहले विभिन्न आयोजनों में इसकी अवधि और प्रस्तुति शैली में भिन्नता देखने को मिलती थी।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया है।


क्या “वंदे मातरम्” शुरू में सिर्फ बंगाल का गीत था?

कुछ इतिहासकारों और विचारकों का मत है कि “वंदे मातरम्” प्रारंभ में पूरे भारत का राष्ट्रगीत नहीं था, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक चेतना से उपजा एक साहित्यिक गीत था।

इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अत्यंत संस्कृतनिष्ठ बंगाली भाषा में की थी। इसे पहली बार 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया। बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में यह गीत शामिल किया गया।

हालांकि, जो गीत मातृभूमि की स्तुति के रूप में साहित्यिक अभिव्यक्ति था, वही आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बन गया।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान:

  • क्रांतिकारी इसे संघर्ष से पहले फुसफुसाकर गाते थे,
  • विद्यार्थी विरोध प्रदर्शनों में इसे स्वर देते थे,
  • और यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रभावना का प्रतीक बन गया।

राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता

भारत का राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” है, जिसका अर्थ है — “हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूँ।”

1950 में संविधान सभा ने इसे “राष्ट्रीय गीत” का दर्जा दिया। हालांकि राष्ट्रगान “जन गण मन” है, लेकिन वंदे मातरम् को समान सम्मान प्रदान किया गया है।

यह गीत भारत को एक हरित, समृद्ध और पालन-पोषण करने वाली मां के रूप में चित्रित करता है —
सुजलां, सुफलां, मलयज-शीतलाम्…

आज इस ऐतिहासिक गीत की रचना को लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।


एकरूपता बनाम बहस

जहाँ सरकार इसे प्रोटोकॉल स्पष्टता और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है, वहीं कुछ वर्गों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर बहस भी समय-समय पर उठती रही है।

फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं कि “वंदे मातरम्” भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक अमिट प्रतीक रहा है और आज भी राष्ट्रभावना से गहराई से जुड़ा हुआ है।

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