वसई-विरार: Bharatiya Janata Party के वसई-विरार शहर जिला में संगठन विस्तार और युवा शक्ति को मजबूती देने के उद्देश्य से अहम नियुक्ति की गई है। युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष Vineet Tiwari ने Nikhil Upadhyay को जिला सचिव पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए संगठन में नई ऊर्जा का संचार किया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, निखिल उपाध्याय लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहते हुए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे हैं। उनकी कार्यशैली, समर्पण और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। यह नियुक्ति आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।इस अवसर पर विनीत तिवारी ने कहा कि युवा मोर्चा में निखिल उपाध्याय जैसे ऊर्जावान और कर्मठ कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना संगठन को नई दिशा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उपाध्याय अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हुए पार्टी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पार्टी को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।
वसई-विरार शहर महानगरपालिका(VVMC) में मंगलवार को महापौर अजीव पाटील की अध्यक्षता में महापौर कक्ष में बांधकाम विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर की सड़कों, फुटपाथों, गटर और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान प्रमुख और आंतरिक सड़कों की मरम्मत, नए सड़क निर्माण, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथों का निर्माण तथा आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए गटर और नालों की मरम्मत व सफाई को प्राथमिकता देने पर चर्चा की गई।
महापौर अजीव पाटील ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी विकास कार्य नियोजनबद्ध तरीके से तय समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कामों की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लंबित काम जल्द पूरे करने के निर्देश
महापौर ने लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने और चल रहे कामों को समय पर समाप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही नागरिकों और नगरसेवक-नगरसेविकाओं से प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर उनका समयबद्ध निपटारा करने को कहा।
इसके अलावा मानसून से पहले नालों की सफाई पूरी कर जलभराव की समस्या रोकने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक में उपमहापौर मार्शल लोपीस, स्थायी समिति सभापति प्रविण शेट्टी, सभागृह नेता प्रफुल्ल साने, अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे, दीपक सावंत, प्रभारी शहर अभियंता प्रदीप पाचंगे सहित सभी नगरसेवक-नगरसेविकाएं और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मुंबई: कामकाजी महिलाओं की मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) अवधि बढ़ाकर एक वर्ष करने और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने की मांग शिवसेना विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने महाराष्ट्र विधान परिषद में उठाई। उन्होंने यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सदन में हुई चर्चा के दौरान रखा।
डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि आज की जीवनशैली में महिलाओं पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है। कॉर्पोरेट क्षेत्र में कई महिलाएं लगातार 12 घंटे तक लैपटॉप पर काम करती हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। वर्तमान में कामकाजी महिलाओं को छह महीने की मातृत्व अवकाश मिलती है, लेकिन इतने कम समय में कई माताओं को अपने छोटे बच्चों को डे-केयर या पाळनाघर में छोड़कर फिर से काम पर लौटना पड़ता है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाकर एक वर्ष की जाए, ताकि मां अपने बच्चे की बेहतर देखभाल कर सके और बच्चे को उचित पोषण और स्तनपान मिल सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी में नौकरी करने वाली महिलाओं को एक साल की मातृत्व अवकाश दी जाती है।
डॉ. कायंदे ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने गर्भाशय की सर्जरी (हिस्टेरेक्टॉमी) कराने वाली महिलाओं को सवेतन छुट्टी देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र सरकार को भी इस तरह का निर्णय लेना चाहिए, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समय पर्याप्त आराम मिल सके।
उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए रेलवे स्टेशन, एसटी डिपो और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाया जाना चाहिए।
डॉ. कायंदे ने पंढरपुर वारी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पुलिस अधिकारी अतुल कुलकर्णी के नेतृत्व में करीब 20 लाख वारकरियों का फेस रिकग्निशन किया गया था। इस तकनीक के माध्यम से बायोमेट्रिक पहचान जैसे रेटिना स्कैन भी किया जा सकता है, जिससे अपराधों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा उन्होंने घरेलू हिंसा रोकथाम कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोटेक्शन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग में खाली पदों को भरने तथा महिलाओं की मदद के लिए काउंसलर और वकीलों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और लाड़ली बहन योजना जैसी पहल महिलाओं के लिए मददगार साबित हुई है। साथ ही राज्य के बजट में 13 जिलों में “उमेद मॉल” शुरू करने की योजना का भी स्वागत किया, जिससे महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।
प्रभाग 10 में फेरीवालों से 90 रुपये की कथित अवैध वसूली, ठेकेदार पर FIR की मांग
आर. एस. नेटवर्क। प्रेम चौबे
नालासोपारा: वसई-विरार शहर महानगरपालिका(VVMC) के प्रभाग क्रमांक 10 क्षेत्र में फेरीवालों से प्रति व्यक्ति 90 रुपये की कथित जबरन वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह वसूली ठेकेदार कैलाश यादव के माध्यम से की जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को अवैध, अन्यायपूर्ण और गरीबों के हक पर डाका बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी (Unemployed) की मार झेल रहे छोटे फेरीवाले अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर छोटे-मोटे सामान बेचकर परिवार चला रहे हैं। ऐसे समय में प्रति व्यक्ति 90 रुपये की वसूली उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तब जो लोग स्व-रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके रास्ते में ही बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।
प्रभाग 10 के नगरसेवक किशोर पाटिल ने इस मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि गरीब फेरीवालों से इस प्रकार की वसूली सीधे तौर पर उनकी आजीविका पर हमला है। “जब देश और प्रदेश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, तब महानगरपालिका को रोजगार सृजन पर ध्यान देना चाहिए, न कि स्व-रोजगार कर रहे लोगों से वसूली कर उन्हें परेशान करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
इस संबंध में तुलिंज पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत(Complain) दर्ज कराई गई है। शिकायत में ठेकेदार कैलाश यादव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि जब तक वसई-विरार शहर महानगरपालिका की महासभा में इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उक्त वसूली पूरी तरह बंद रखी जाए।
नगरसेवक किशोर पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध वसूली (Illegal extortion) पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में जनआक्रोश फैल सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फेरीवालों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी किया जाएगा।
स्थानीय फेरीवालों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में पहले ही कमाई सीमित है। ऊपर से इस प्रकार की कथित वसूली उनके लिए दोहरी मार साबित हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब महानगरपालिका रोजगार उपलब्ध कराने में असफल साबित हो रही है, तो क्या स्व-रोजगार कर रहे गरीबों को भी चैन से काम करने का अधिकार नहीं है?
मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है और देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।