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  • Illegal extortion: महंगाई और बेरोजगारी के दौर में स्व-रोजगार करने वालों पर मनपा की ‘मार’!

    Illegal extortion: महंगाई और बेरोजगारी के दौर में स्व-रोजगार करने वालों पर मनपा की ‘मार’!

    प्रभाग 10 में फेरीवालों से 90 रुपये की कथित अवैध वसूली, ठेकेदार पर FIR की मांग

    आर. एस. नेटवर्क। प्रेम चौबे

    नालासोपारा: वसई-विरार शहर महानगरपालिका(VVMC) के प्रभाग क्रमांक 10 क्षेत्र में फेरीवालों से प्रति व्यक्ति 90 रुपये की कथित जबरन वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह वसूली ठेकेदार कैलाश यादव के माध्यम से की जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को अवैध, अन्यायपूर्ण और गरीबों के हक पर डाका बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी (Unemployed) की मार झेल रहे छोटे फेरीवाले अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर छोटे-मोटे सामान बेचकर परिवार चला रहे हैं। ऐसे समय में प्रति व्यक्ति 90 रुपये की वसूली उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तब जो लोग स्व-रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके रास्ते में ही बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    प्रभाग 10 के नगरसेवक किशोर पाटिल ने इस मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि गरीब फेरीवालों से इस प्रकार की वसूली सीधे तौर पर उनकी आजीविका पर हमला है। “जब देश और प्रदेश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, तब महानगरपालिका को रोजगार सृजन पर ध्यान देना चाहिए, न कि स्व-रोजगार कर रहे लोगों से वसूली कर उन्हें परेशान करना चाहिए,” उन्होंने कहा।

    इस संबंध में तुलिंज पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत(Complain) दर्ज कराई गई है। शिकायत में ठेकेदार कैलाश यादव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि जब तक वसई-विरार शहर महानगरपालिका की महासभा में इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उक्त वसूली पूरी तरह बंद रखी जाए।

    नगरसेवक किशोर पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध वसूली (Illegal extortion) पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में जनआक्रोश फैल सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फेरीवालों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी किया जाएगा।

    स्थानीय फेरीवालों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में पहले ही कमाई सीमित है। ऊपर से इस प्रकार की कथित वसूली उनके लिए दोहरी मार साबित हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब महानगरपालिका रोजगार उपलब्ध कराने में असफल साबित हो रही है, तो क्या स्व-रोजगार कर रहे गरीबों को भी चैन से काम करने का अधिकार नहीं है?

    मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है और देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।

  • Sharmila Takes Charge in Presence Eknath: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शर्मिला पिंपलोलकर ने संभाला ठाणे मेयर का कार्यभार

    Sharmila Takes Charge in Presence Eknath: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शर्मिला पिंपलोलकर ने संभाला ठाणे मेयर का कार्यभार

    ठाणे: ठाणे महानगरपालिका में नवनिर्वाचित मेयर शर्मिला रोहित पिंपलोलकर(Sharmila Pimplolker) ने आज औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(Eknath Shinde) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    गौरतलब है कि 3 फरवरी को मनपा के मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव संपन्न हुआ था। इसमें शिवसेना की शर्मिला पिंपलोलकर निर्विरोध मेयर चुनी गईं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के कृष्णा दादू पाटिल को डिप्टी मेयर पद की जिम्मेदारी मिली।

    पदभार ग्रहण समारोह के दौरान महानगरपालिका आयुक्त सौरभ राव भी मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मेयर शर्मिला पिंपलोलकर, डिप्टी मेयर कृष्णा दादू पाटिल तथा शिवसेना के गटनेता पवन कदम का स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर नवनिर्वाचित नगरसेवक और नगरसेविकाएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समारोह का माहौल उत्साहपूर्ण रहा।

    नई महापौर से शहर के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    ” विजिलेंस पर दबाव डालने की कोशिश या प्रशासन को खुली चुनौती!”–सीएसएमटी पार्सल प्रकरण ने उठाया सवाल

    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन(CR Mumbai Division) स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पार्सल विभाग में सामने आया विवाद अब एक कर्मचारी के स्थानांतरण से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मामला रेलवे की प्रशासनिक पारदर्शिता, विजिलेंस तंत्र की स्वतंत्रता और शिकायत प्रणाली के संभावित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

    सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की अनुशंसा के आधार पर सीएसएमटी पार्सल सीबीएस बैच इंचार्ज शैलेन्द्र पंडित का स्थानांतरण सीएसएमटी से शिवुड़–दारावे स्टेशन किया गया। लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी (CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns) होने के तुरंत बाद 11 फरवरी 2026 को सीएसएमटी जीआरपी में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    जीआरपी में प्रस्तुत शिकायत(Complain) में मुंबई डिवीजन के सीनियर डीसीएम डॉ. शिवराज मानसपुरे, मध्य रेलवे के डिप्टी सीवीओ (ट्रैफिक) प्रदीप हिरडे तथा चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर सुमित दूधे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। रेलवे के जानकार अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तुरंत बाद इस प्रकार की शिकायत दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह कदम विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने या दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं।

    पहले से दर्ज थीं अनियमितताएँ

    • दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी आपत्तियाँ दर्ज की जा चुकी थीं।
    • 23 अप्रैल 2025 को निरीक्षण में अनियमितता दर्ज होने की बात सामने आई।
    • 25 जून 2025 को ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
    • ड्यूटी मस्टर में नाम का कॉलम खाली छोड़ने और बाद में हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति भी नोट की गई।
    • 3 अगस्त 2025 को सीआरबी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति के बाद चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    इन्हीं तथ्यों के आधार पर चार्जशीट और बाद में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की बात कही जा रही है।

    एसोसिएशन की मान्यता पर भी प्रश्न

    मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायत पत्र ‘ऑल इंडिया एससी एंड एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, रेलवे के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संबंधित संगठन की रेलवे बोर्ड से मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संगठन की वैधता संदिग्ध पाई जाती है, तो यह मामला फर्जी संगठन के नाम पर दबाव बनाने तक जा सकता है।

    क्या शिकायत तंत्र बन रहा है ‘ढाल’?

    रेलवे के भीतर अब यह चर्चा तेज है कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए शिकायत प्रणाली का उपयोग एक ‘ढाल’ के रूप में किया गया। यदि हर विभागीय जांच या स्थानांतरण के बाद इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है, तो निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए भय और असुरक्षा का वातावरण बन सकता है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यदि जांच एजेंसियों और विजिलेंस अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। यह केवल एक कर्मचारी बनाम प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

    रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत

    यह प्रकरण रेलवे के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि विजिलेंस की अनुशंसा पर की गई कार्रवाई को शिकायतों के माध्यम से दबाने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

    रेलवे को चाहिए कि:

    • शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
    • विजिलेंस कार्रवाई के तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे (नियमों के दायरे में)।
    • एसोसिएशन की मान्यता की सत्यता की जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाए।
    • ईमानदार अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण प्रदान करे।

    यदि समय रहते स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं अपनाया गया, तो यह मामला भविष्य में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली मिसाल बन सकता है।

    अब सबकी निगाहें रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे के शीर्ष प्रशासन पर टिकी हैं कि वे संस्थागत साख को मजबूत करते हैं या यह प्रकरण भी फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

  • BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सोमवार (9 फरवरी) देर रात अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और इसके बाद मंगलवार तड़के मुंबई लौट आए। इस गोपनीय दौरे को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खास तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विलय को लेकर चर्चाएं तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में महायुति के सहयोगी दलों के साथ बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।

    फडणवीस के बाद सुनेत्रा पवार का दिल्ली दौरा

    मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली दौरे के तुरंत बाद अब दिवंगत अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के दिल्ली जाने की जानकारी सामने आई है। सुनेत्रा पवार मंगलवार (10 फरवरी) शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी।

    उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, वह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट करेंगी। उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह उनकी पहली औपचारिक दिल्ली यात्रा बताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस के देर रात किए गए गोपनीय दौरे के बाद सुनेत्रा पवार की इस यात्रा को राजनीतिक रूप से खास महत्व दिया जा रहा है।

    इस दौरे के दौरान एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और पार्टी के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी सुनेत्रा पवार के साथ दिल्ली में मौजूद रहेंगे।

    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।
    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।

    जिला परिषद चुनावों में बीजेपी पहले, एनसीपी दूसरे नंबर पर

    इसी बीच महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों के नतीजों ने भी सियासी समीकरणों को नई दिशा दी है। इन चुनावों में बीजेपी पहले स्थान पर रही, जबकि अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही।

    इन चुनावों में जिला परिषद की 731 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों के लिए मतदान हुआ था।
    जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने सबसे ज्यादा 233 सीटें जीतीं। इसके बाद अजित पवार गुट की एनसीपी को 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति ने कुल मिलाकर 731 में से 562 सीटों पर जीत दर्ज की है।

    वहीं, विपक्षी महाविकास आघाड़ी को करारा झटका लगा है। कांग्रेस को 56, शरद पवार गुट को 26 और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 43 सीटें मिली हैं। इस तरह एमवीए को कुल मिलाकर सिर्फ 125 सीटों से संतोष करना पड़ा।

    आने वाले दिनों में बड़े सियासी संकेत(BJP–NCP political deal)

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली दौरा, उसके तुरंत बाद सुनेत्रा पवार की प्रस्तावित यात्रा और हालिया चुनावी नतीजे—ये सभी घटनाएं महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक फैसलों की ओर इशारा कर रही हैं।

  • Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संबंधित कंपनी ने महाराष्ट्र पंजीकरण विभाग द्वारा जारी करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी वसूली नोटिस को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। विभागीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

    सूत्रों के अनुसार, पंजीकरण विभाग ने पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित जमीन की बिक्री विलेख (Land Deal) से जुड़े मामले में 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करने का नोटिस जारी किया था। विभाग का कहना है कि जमीन की बिक्री के दौरान नियमानुसार स्टांप शुल्क अदा नहीं किया गया, जिसके चलते यह राशि वसूल की जानी चाहिए थी। नोटिस में 10 फरवरी तक भुगतान की समयसीमा तय की गई थी।

    पहले भी जारी हो चुका है वसूली आदेश
    इससे पहले पंजीकरण विभाग ने एक आदेश जारी कर अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी और उसके साझेदार दिग्विजय पाटिल को 40 एकड़ सरकारी जमीन की बिक्री विलेख के दौरान माफ की गई स्टांप ड्यूटी जमा करने का निर्देश दिया था। उस आदेश में भी भुगतान की अंतिम तारीख 10 फरवरी तय की गई थी।

    IGR के सामने होगी अब सुनवाई
    पंजीकरण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्टांप ड्यूटी जमा करने की अंतिम तारीख तक भुगतान नहीं किया गया, बल्कि संबंधित कंपनी ने आदेश को चुनौती देते हुए अपील दाखिल कर दी है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के समक्ष होगी। हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 21 करोड़ रुपये की मांग वाले आदेश को किन आधारों पर चुनौती दी गई है।

    300 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा मामला
    बताया जा रहा है कि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी द्वारा करीब 40 एकड़ जमीन को लगभग 300 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा उस समय विवादों में आया, जब यह सामने आया कि संबंधित जमीन सरकारी है और कंपनी को स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इसी खुलासे के बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया।

  • Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें भारत रत्न(Bharat Ratna) जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ना देश की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।

    भाई जगताप ने कहा कि भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि अब तक यह सम्मान उन्हीं महान व्यक्तित्वों को दिया गया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज या किसी बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित किया।

    विवादित नामों को सम्मान देना समझ से परे – भाई जगताप
    कांग्रेस नेता ने कहा, “भारत रत्न (Bharat Ratna)से बड़ा कोई सम्मान नहीं है। संघ प्रमुख किसी संगठन के प्रमुख हैं, देश के नहीं। वीर सावरकर पर लगे आरोपों के बीच इस तरह की मांग समझ से परे है। अगर विवादित व्यक्तियों को भारत रत्न दिया गया, तो इसकी समीक्षा पूरा देश करेगा और सम्मान की गरिमा पर गंभीर सवाल उठेंगे।”

    उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में ऐसे कई मंत्री हैं जिन पर आरोप लगने की बातें रिपोर्ट्स में सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत रत्न देने का फैसला सम्मान की तौहीन जैसा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को बेवजह हवा नहीं देना चाहते, अंतिम फैसला सरकार का होगा और जवाब जनता देगी।

    कानून-व्यवस्था, कलाकार और राजनीति पर भी सरकार को घेरा
    संघ प्रमुख के एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई जगताप ने कहा कि खेल और कला को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज कलाकारों को खुलेआम धमकियां मिल रही हैं, फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग की घटना सामने आई है और गैंगस्टरों में कानून का कोई डर नहीं दिख रहा।

    उन्होंने कहा कि 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड के खौफ पर काबू पाया गया था, लेकिन आज हालात फिर से चिंता पैदा कर रहे हैं, जो सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    तीन बच्चों वाले बयान पर भी जताई नाराज़गी
    संघ प्रमुख के तीन बच्चों से जुड़े बयान को हास्यास्पद बताते हुए भाई जगताप ने कहा कि जब भारत पहले ही जनसंख्या के मामले में दुनिया में नंबर एक है, तब इस तरह की सलाह देना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं और युवा खुद यह तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब और किससे शादी करनी है।

    अन्य मुद्दों पर भी रखी बेबाक राय
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए आरोपों पर भाई जगताप ने कहा कि केवल आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा, अगर आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।
    बीएमसी में रितु तावड़े के मेयर बनने और घुसपैठियों पर दिए गए बयान को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार चारों तरफ है, कानून भी मौजूद है, फिर पिछले 12 वर्षों में कितने घुसपैठियों को निकाला गया, यह जनता को बताया जाना चाहिए।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि संसद देश का पवित्र मंदिर है, लेकिन वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा से बचा जा रहा है।

    महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे के सवाल पर भाई जगताप ने कहा, “जहां धुआं होता है, वहां आग भी होती है।” उन्होंने 18 साल पुराने विमान, लैंडिंग प्रक्रिया और तकनीकी खामियों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    वहीं मीडिया को दिए बयान में उन्होंने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर कहा कि खेल, कला और संगीत को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का क्रिकेट में दबदबा रहा है और विश्व कप जैसे आयोजनों को राजनीतिक नजरिये से देखना ठीक नहीं है।

  • Mohan Bhagwat V/S BJP : आरएसएस के बिना भाजपा के ‘अच्छे दिन’ नहीं हो सकते: मोहन भागवत की भाजपा नेतृत्व को दो टूक

    Mohan Bhagwat V/S BJP : आरएसएस के बिना भाजपा के ‘अच्छे दिन’ नहीं हो सकते: मोहन भागवत की भाजपा नेतृत्व को दो टूक

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत(Mohan Bhagwat) ने भाजपा और संघ के रिश्तों को लेकर एक बार फिर स्पष्ट रेखा खींच दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा को मिले राजनीतिक ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की विचारधारा और उसके दीर्घकालिक संघर्षों का ही परिणाम हैं। उनके इस बयान को भाजपा नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, 2024 के आम चुनावों के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि भाजपा आरएसएस के बिना भी चुनाव जीत सकती है। इस बयान के बाद संघ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा सामने आई थी। अब मोहन भागवत के ताज़ा बयान को उसी पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है।

    भागवत ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने दशकों तक प्रतिबद्धता दिखाई। जिसने इस आंदोलन का साथ दिया, उसे राजनीतिक लाभ भी मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि राम मंदिर आंदोलन संघ के नेतृत्व में चला और उसका चुनावी फायदा भाजपा को मिला।

    भागवत के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि भाजपा की राजनीतिक सफलता का वैचारिक आधार आज भी आरएसएस ही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पार्टी है, संघ की नहीं। हालांकि, भाजपा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक काम करते हैं। संघ का दावा है कि वह कार्यकर्ता देता है, लेकिन राजनीतिक फैसलों में उसका सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    संघ की कार्यशैली पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस स्वयंसेवकों के पास किसी और काम के लिए समय नहीं होता। माताएं-बहनें भी शिकायत करती हैं कि स्वयंसेवकों को घर के लिए वक्त नहीं मिलता। संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है।

    उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का हवाला देते हुए कहा कि संघ खुद कुछ नहीं करता, लेकिन स्वयंसेवक कुछ भी छोड़ते नहीं हैं। स्वयंसेवक समाज के हर अहम क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं, लेकिन पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। संघ में नियंत्रण नहीं, बल्कि सहयोग और विचार की शक्ति काम करती है।

    भागवत ने अंत में कहा कि संघ का उद्देश्य किसी को सत्ता या राजनीतिक लाभ पहुंचाना नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए एक विचार गढ़ना और उसे समाज में जीवित रखना है।

  • Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    दूसरे दलों से आए नेताओं को सत्ता में हिस्सेदारी, पुराने भाजपा कार्यकर्ता हाशिये पर

    अश्विनी कुमार दुबे

    मुंबई: भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विपक्ष और राजनीतिक जानकार आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी वर्षों तक सत्ता से बाहर संघर्ष करने वाले अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है, जबकि कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों से आए नेताओं को मंत्री पद, निगम मंडलों की अध्यक्षता और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

    मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा, “कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई है। पार्टी में अपने नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी नहीं हैं; दिल्ली से लेकर गलियों तक, भाजपा को दूसरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”

    राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, सत्ता में भागीदारी अब विचारधारा या वर्षों के संघर्ष के बजाय दल-बदल की राजनीति पर आधारित हो गई है। पार्टी की जमीनी ताकत माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को केवल झंडा उठाने और रैलियों में हिस्सा लेने तक सीमित कर दिया गया है(Bjp old workers marginalized new leaders power), जबकि वास्तविक सत्ता का लाभ बाहरी नेताओं को मिल रहा है।

    विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है, “जो पार्टी खुद को अनुशासन और कार्यकर्ता आधारित संगठन बताती थी, वही अब अपने ही कार्यकर्ताओं का अपमान कर रही है। वर्षों तक सत्ता-विहीन रहने वाले कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन पार्टी को समर्पित किया, उन्हें अब नजरअंदाज किया जा रहा है।”

    राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भाजपा को इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर कर रही है, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

    पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की चर्चा अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।

  • Fire Accident: भिवंडी में भीषण आग की चपेट में आकर छह गोदाम जलकर खाक, लाखों का सामान स्वाहा

    Fire Accident: भिवंडी में भीषण आग की चपेट में आकर छह गोदाम जलकर खाक, लाखों का सामान स्वाहा

    भिवंडी: भिवंडी तालुका के मानकोली स्थित हरिहर कंपाउंड में रविवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई, जिसमें छह गोदाम पूरी तरह जलकर खाक (Fire Accident) हो गए। आग ‘ए 2’ नामक दो मंजिला इमारत में लगी, जहाँ बॉम्बे ट्रॉफी कंपनी के गद्दे और कागज के रोल बनाए जाते थे।

    रविवार होने के कारण कंपनी में कर्मचारियों की संख्या कम थी। आग लगते ही मौजूद कर्मचारियों ने इमारत से बाहर भागकर अपनी जान बचाई। हालांकि, गोदाम में ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। घटना की सूचना पाकर भिवंडी दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने में जुट गईं। दमकल कर्मियों ने बताया कि पानी की कमी ने आग बुझाने में मुश्किलें बढ़ा दीं।

    सौभाग्य से इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन छह गोदामों में रखे लाखों रुपये मूल्य के गद्दे और कागज के रोल पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए।

    स्थानीय प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित व्यापारियों को राहत देने की तैयारियां की जा रही हैं।

  • The fight for power: भिवंडी की महापौर कुर्सी पर भाजपा की नजर,बंदरों की लड़ाई और बिल्ली की चाल-सत्ता से दूर होती कांग्रेस

    The fight for power: भिवंडी की महापौर कुर्सी पर भाजपा की नजर,बंदरों की लड़ाई और बिल्ली की चाल-सत्ता से दूर होती कांग्रेस

    अश्विनी कुमार दुबे

    भिवंडी।
    भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में महापौर पद की सियासत(The fight for power) अब बिल्कुल उसी कहावत को चरितार्थ करती दिख रही है, “दो बंदरों की लड़ाई में बिल्ली रोटी ले जाती है।” सत्ता के लिए सेक्युलर फ्रंट की पार्टियां आपस में उलझी हुई हैं और इसी उहापोह के बीच भारतीय जनता पार्टी ‘बिल्ली’ की तरह सही मौके की ताक में बैठी है, ताकि भिवंडी की महापौर कुर्सी चुपचाप अपने पाले में खींच ले जाए।

    कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और समाजवादी पार्टी द्वारा गठित ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ संख्या बल के लिहाज से मजबूत जरूर है, लेकिन नेतृत्व और श्रेय को लेकर जारी खींचतान ने उसकी ताकत को कमजोर कर दिया है। महापौर पद पर कांग्रेस का दावा होगा या समाजवादी पार्टी का—इसी सवाल ने फ्रंट को भीतर से बांध रखा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि कांग्रेस के लिए सत्ता तक पहुंच पाना अब आसान नहीं, बल्कि मुश्किल नजर आ रहा है।

    दूसरी ओर भाजपा ने प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर नारायण रतन चौधरी के नाम की घोषणा कर साफ संकेत दे दिया है कि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। भाजपा और शिवसेना के पास फिलहाल 34 पार्षद हैं, जो बहुमत से कम हैं, लेकिन राजनीति में केवल गणित ही सब कुछ नहीं होता। पार्टी के भीतर गुटबाजी और वर्चस्व की जंग के बावजूद भाजपा का पूरा फोकस सेक्युलर फ्रंट की अंदरूनी कमजोरी पर टिका है। यही कमजोरी भाजपा के लिए अवसर बनती जा रही है।

    भाजपा के भीतर विधायक महेश चौघुले और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल के बीच चल रही खींचतान इसे और दिलचस्प बनाती है। वहीं सुमित पाटिल की दावेदारी ने पार्टी के सामने अनुशासन और रणनीति की परीक्षा खड़ी कर दी है। इसके बावजूद भाजपा की नजर साफ है—यदि विरोधी खेमे आपस में लड़ते रहे, तो सत्ता की ‘रोटी’ उसके हिस्से आ सकती है।

    इस पूरे खेल में भिवंडी विकास अघाड़ी, कोणार्क विकास अघाड़ी और निर्दलीय पार्षद मिलकर ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं। ये पार्षद तय करेंगे कि बंदरों की लड़ाई लंबी चलेगी या बिल्ली बाज़ी मार ले जाएगी। अफसोस की बात यह है कि इस राजनीतिक शतरंज में शहर के विकास का एजेंडा पूरी तरह हाशिए पर चला गया है।

    जलापूर्ति, स्वच्छता, यातायात, अवैध निर्माण और उद्योग-व्यापार जैसे बुनियादी सवालों पर चर्चा की जगह सिर्फ कुर्सी की गणना हो रही है। भिवंडी की जनता यह देख रही है कि नेता सत्ता की बाज़ी में उलझे हैं, जबकि शहर को स्थिर नेतृत्व की सख्त जरूरत है।

    अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि महापौर कौन बनेगा, बल्कि यह है कि क्या राजनीतिक दल यह समझ पाएंगे कि सत्ता कोई शिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। अगर सेक्युलर फ्रंट आपसी लड़ाई में उलझा रहा, तो भिवंडी की महापौर कुर्सी भाजपा की ‘बिल्ली’ उठा ले जाएगी—और कांग्रेस को सत्ता के सपने से हाथ धोना पड़ सकता है।