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  • Thane Firm Buys India’s First 250T Hybrid Crane: ठाणे की कंपनी ने खरीदी देश की पहली 250 टन इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन क्रेन, हिंदुस्तान जिंक में होगी तैनात

    Thane Firm Buys India’s First 250T Hybrid Crane: ठाणे की कंपनी ने खरीदी देश की पहली 250 टन इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन क्रेन, हिंदुस्तान जिंक में होगी तैनात

    सालाना 93,600 लीटर डीजल की होगी बचत, 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी

    ठाणे: Dinesh Cranes Limited ने देश की पहली 250 टन क्षमता वाली डीजल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड ऑल-टेरेन क्रेन खरीदकर भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। इस अत्याधुनिक क्रेन को Hindustan Zinc Limited के राजस्थान के देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर में तैनात किया जाएगा।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक सुमित महेश जोशी ने बताया कि यह अपनी श्रेणी की भारत की पहली इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन क्रेन है। इसका उद्देश्य भारी उद्योगों में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और कम-कार्बन तकनीक को बढ़ावा देना है।

    डीजल और बिजली दोनों से चलेगी क्रेन (Thane Firm Buys India’s First 250T Hybrid Crane)

    यह आधुनिक हाइब्रिड क्रेन डीजल और बिजली, दोनों माध्यमों से संचालित होगी। कंपनी के अनुसार इसके उपयोग से हर वर्ष लगभग 93,600 लीटर डीजल की बचत होगी, जबकि 250.8 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी।

    हिंदुस्तान जिंक ने बताया बड़ा कदम

    विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल उद्योग क्षेत्र में हरित प्रौद्योगिकी (ग्रीन टेक्नोलॉजी) और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    Hindustan Zinc Limited के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण मिश्रा ने कहा कि कंपनी सतत विकास (Sustainability) और स्वच्छ प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। यह नई हाइब्रिड क्रेन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।

    वहीं SANY India के प्रबंध निदेशक दीपक गर्ग ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय खनन और औद्योगिक क्षेत्र में आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल मशीनरी के उपयोग को नई गति देगी।

    यह पहल न केवल ऊर्जा लागत कम करने में सहायक होगी, बल्कि भारत के औद्योगिक क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

  • India’s Largest Rail TBM Begins Work: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में बड़ा मील का पत्थर, विक्रोली से भारत की सबसे बड़ी रेल TBM ने शुरू की सुरंग की खुदाई

    India’s Largest Rail TBM Begins Work: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में बड़ा मील का पत्थर, विक्रोली से भारत की सबसे बड़ी रेल TBM ने शुरू की सुरंग की खुदाई

    13.6 मीटर व्यास और 3,100 टन वजनी टनल बोरिंग मशीन 6 किमी लंबी सुरंग बनाएगी, घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से गुजरेगा मार्ग

    ठाणे/मुंबई: National High Speed Rail Corporation Limited ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए विक्रोली शाफ्ट से भारत की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए भूमिगत सुरंग निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। यह मशीन निर्माणाधीन मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन (बीकेसी) की दिशा में सुरंग की खुदाई करेगी।

    परियोजना के तहत कुल 21 किलोमीटर लंबा भूमिगत कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसमें से 16 किलोमीटर का हिस्सा सावली (घंसोली) से Bandra Kurla Complex (बीकेसी) तक टनल बोरिंग मशीन से तैयार किया जाएगा, जबकि शेष 5 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही एनएटीएम (New Austrian Tunnelling Method) तकनीक से पूरा किया जा चुका है।

    6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग बनाएगी मशीन (Mumbai Bullet Train Tunnel Begins)

    विक्रोली से लॉन्च की गई यह अत्याधुनिक TBM करीब 6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग की खुदाई करेगी। इस सुरंग को बुलेट ट्रेन के अप और डाउन दोनों ट्रैक को समायोजित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सुरंग बहुमंजिला इमारतों, प्रमुख सड़कों, मीठी नदी और अन्य महत्वपूर्ण शहरी ढांचों के नीचे से होकर गुजरेगी।

    13.6 मीटर व्यास और 3,100 टन वजनी टनल बोरिंग मशीन 6 किमी लंबी सुरंग बनाएगी, घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से गुजरेगा मार्ग

    भारत की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन

    (India’s Largest Rail TBM Begins Work)

    यह मशीन भारत में रेल सुरंग निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में शामिल है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं—

    • कटरहेड का व्यास: 13.6 मीटर (लगभग चार मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर)
    • कुल वजन: 3,100 टन (करीब 500 एशियाई हाथियों के वजन के बराबर)
    • कुल लंबाई: 96 मीटर (लगभग एक फुटबॉल मैदान जितनी)
    • कटर व्हील की गति: 4 RPM (प्रति मिनट चार चक्कर)

    मशीन में कटर व्हील, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, मेन शील्ड, टेल शील्ड, इरेक्टर और चार विशेष गैंट्री जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।

    मिक्सशील्ड तकनीक से होगी सुरक्षित खुदाई

    इस परियोजना में मिक्सशील्ड TBM का उपयोग किया जा रहा है, जो स्लरी आधारित आधुनिक टनलिंग तकनीक है। यह तकनीक मिश्रित भूगर्भीय संरचना और उच्च भूजल दबाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षित खुदाई के लिए विकसित की गई है।

    दबावयुक्त बेंटोनाइट स्लरी की मदद से सुरंग के अग्रभाग को स्थिर रखा जाता है, जिससे जमीन धंसने का खतरा कम होता है और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सतह पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

    खुदाई और लाइनिंग का काम एक साथ

    इस अत्याधुनिक मशीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सुरंग की खुदाई और कंक्रीट सेगमेंट की रिंग लगाने का कार्य एक साथ करती है। इससे निर्माण कार्य अधिक सुरक्षित, तेज और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जा सकेगा।

    56 मीटर गहरे शाफ्ट से हुआ लॉन्च

    टीबीएम को लॉन्च करने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा शाफ्ट तैयार किया गया है, जिसकी गहराई लगभग 20 मंजिला इमारत के बराबर है।

    यहां अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें—

    • वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट
    • स्लरी ट्रीटमेंट प्लांट
    • बेंटोनाइट स्टोरेज सिस्टम
    • समर्पित पावर सबस्टेशन
    • बैकअप जनरेटर
    • रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट
    • सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
    • स्लरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम
    • लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर

    शामिल हैं।

    रियल-टाइम मॉनिटरिंग से होगी सुरक्षा सुनिश्चित

    निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों और भूमिगत संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके तहत सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स, ऑप्टिकल डिस्प्लेसमेंट सेंसर, 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सीस्मोग्राफ जैसे उपकरण लगातार निगरानी करेंगे।

    महापे कास्टिंग यार्ड में बन रहे 77 हजार कंक्रीट सेगमेंट

    Mahape स्थित 11.17 हेक्टेयर में फैले विशेष कास्टिंग यार्ड में सुरंग के लिए 77,000 कंक्रीट सेगमेंट तैयार किए जा रहे हैं। इनसे 7,700 टनल रिंग्स बनाई जाएंगी। प्रत्येक रिंग में नौ घुमावदार सेगमेंट और एक की-सेगमेंट होगा तथा एक रिंग का वजन लगभग 100 टन होगा।

    पूरी तरह वॉटरप्रूफ होगी सुरंग

    पूरे टीबीएम सेक्शन को पूर्णतः वॉटरप्रूफ संरचना के रूप में विकसित किया जा रहा है। सुरंग की लाइनिंग में डबल-लेयर EPDM गैस्केट और हाइड्रोफिलिक सील का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी का रिसाव रोका जा सके और लंबे समय तक संरचना की मजबूती बनी रहे।

  • FDA Cracks Down on Hotels Across Maharashtra: तुकाराम मुंढे ने दो दिन में 20 होटल-रेस्टोरेंट की जांच, सात के लाइसेंस निलंबित, पूरे महाराष्ट्र में FDA की सख्त कार्रवाई

    FDA Cracks Down on Hotels Across Maharashtra: तुकाराम मुंढे ने दो दिन में 20 होटल-रेस्टोरेंट की जांच, सात के लाइसेंस निलंबित, पूरे महाराष्ट्र में FDA की सख्त कार्रवाई

    मुंबई/नासिक/वाशिम: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ा अभियान छेड़ दिया है। विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में राज्यभर में होटल, रेस्तरां और ढाबों पर लगातार छापेमारी और निरीक्षण किए जा रहे हैं। खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। कई होटलों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि अन्य को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं।

    नासिक में 20 होटलों की जांच, 7 के लाइसेंस निलंबित

    एफडीए की टीम ने नासिक क्षेत्र में दो दिनों के भीतर 20 होटल और रेस्तरां का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया गया। इसके बाद 7 प्रतिष्ठित होटल और रेस्तरां के खाद्य सुरक्षा लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों को पहले सुधार नोटिस दिए गए थे और जिन्होंने निर्धारित समय में सुधार नहीं किया, उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

    जांच में क्या-क्या मिलीं खामियां?

    एफडीए की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें शामिल हैं:

    • रसोईघर में गंदगी और अस्वच्छ वातावरण।
    • मक्खियों और कीटों की मौजूदगी।
    • खाद्य पदार्थों को खुले में रखना।
    • कोल्ड स्टोरेज और निर्धारित तापमान संबंधी नियमों का उल्लंघन।
    • कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता मानकों का पालन नहीं करना।
    • खाद्य पदार्थों के दूषित होने की आशंका पैदा करने वाली व्यवस्थाएं।

    एफडीए के अनुसार, ऐसी लापरवाही सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।

    मुंबई से शुरू हुई कार्रवाई अब पूरे राज्य में

    यह अभियान केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। मुंबई के कई बड़े होटल और रेस्तरां में कार्रवाई के बाद अब नासिक, वाशिम और अन्य जिलों में भी व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। आयुक्त तुकाराम मुंडे ने संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

    वाशिम में भी कार्रवाई

    वाशिम में खाद्य सुरक्षा विभाग ने तीन होटलों का निरीक्षण किया। जांच के बाद साई ढाबा का खाद्य सुरक्षा लाइसेंस निलंबित कर दिया गया, जबकि होटल गणेश और होटल चिंतामणी को आवश्यक सुधार करने के लिए नोटिस जारी किया गया।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान

    खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।

  • Nagad Pe: दूधवालों और अख़बार विक्रेताओं के लिए ‘नगदपे’ ऐप लॉन्च, डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा

    Nagad Pe: दूधवालों और अख़बार विक्रेताओं के लिए ‘नगदपे’ ऐप लॉन्च, डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा

    मुंबई। असंगठित क्षेत्र के कामगारों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से फिनटेक प्लेटफॉर्म NagadPe का रविवार को मुंबई में शुभारंभ किया गया। यह ऐप खासतौर पर दूध विक्रेताओं, अख़बार वितरकों और छोटे दैनिक कमाई करने वाले कामगारों के लिए तैयार किया गया है।इस ऐप के जरिए उपयोगकर्ता डिजिटल चालान बना सकते हैं, समय पर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं और अपनी एक विश्वसनीय वित्तीय पहचान विकसित कर सकते हैं। इससे उन्हें भविष्य में ऋण और अन्य औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकेगी।

    भारत में आज भी लाखों छोटे कामगार कागज़ी हिसाब-किताब और महीने के अंत में नकद भुगतान पर निर्भर हैं, जिससे देरी और लेनदेन संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं। NagadPe इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलने का प्रयास करता है, जहां भुगतान संग्रह, ग्राहक प्रबंधन और बहीखाते की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

    कंपनी के सह-संस्थापक गजेंद्र गर्ग ने कहा कि “देश की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था इन छोटे कामगारों पर टिकी है, लेकिन उनकी वित्तीय व्यवस्था अब भी पुरानी है। हमारा लक्ष्य उन्हें सरल और पारदर्शी डिजिटल समाधान देकर सशक्त बनाना है।”इस प्लेटफॉर्म की खासियतों में आसान ऑनबोर्डिंग, तकनीकी ज्ञान की जरूरत न होना और जल्द ही स्थानीय भाषाओं का समर्थन शामिल है। मुंबई से शुरू हुआ यह ऐप जल्द ही महाराष्ट्र और देश के अन्य शहरों में विस्तार करेगा।

    NagadPe फिलहाल एंड्रॉइड पर उपलब्ध है और दूध वितरण, अख़बार सप्लाई, लॉन्ड्री, छोटे दुकानदारों सहित नियमित नकद लेनदेन करने वाले कामगारों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

  • Drishti Eye Hospital: विरार में ‘दृष्टि आई हॉस्पिटल’ का अत्याधुनिक केंद्र शुरू, अब मिलेगी विश्वस्तरीय नेत्र सेवा

    Drishti Eye Hospital: विरार में ‘दृष्टि आई हॉस्पिटल’ का अत्याधुनिक केंद्र शुरू, अब मिलेगी विश्वस्तरीय नेत्र सेवा

    विरार। विरार पश्चिम में Drishti Eye Hospital के विस्तारित और अत्याधुनिक केंद्र का उद्घाटन गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में किया गया। इस नए केंद्र के शुरू होने से विरार और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अब उच्चस्तरीय नेत्रचिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होंगी।

    उद्घाटन समारोह में Hitendra Thakur, Kshitij Thakur, Rajeev Patil, Ajiv Patil सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।अस्पताल के संस्थापक एवं संचालक Dr Hemant Chasia के नेतृत्व में Drishti Eye Hospital पिछले 19 वर्षों से नेत्र सेवाएं प्रदान कर रहा है। वर्ष 2007 में शुरू हुए इस अस्पताल में अब तक 20,000 से अधिक सफल मोतियाबिंद सर्जरी की जा चुकी हैं और यह LASIK व अन्य रिफ्रेक्टिव सर्जरी में विशेषज्ञता रखता है।

    नए केंद्र में विरार का पहला ‘अल्ट्रा एचडी LASIK’ मशीन स्थापित किया गया है, जो जर्मन तकनीक पर आधारित है और अत्यंत सटीक व सुरक्षित दृष्टि सुधार में सक्षम है। यहां कैटरैक्ट सर्जरी, LASIK, ग्लूकोमा उपचार, रेटिना केयर और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    इस अवसर पर Dr Hemant Chasia ने कहा कि मरीजों का विश्वास उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और इस विस्तार का उद्देश्य विश्वस्तरीय नेत्र सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों को बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।यह नया केंद्र विरार के यशवंत प्रेस्टीज बिल्डिंग, डी-मार्ट के पास और न्यू विवा कॉलेज के सामने स्थित है, जो क्षेत्र के मरीजों के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • Rajya Sabha Election: महाराष्ट्र की राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने घोषित की नई सूची: पुराने वफादार और जातीय संतुलन पर फोकस

    Rajya Sabha Election: महाराष्ट्र की राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने घोषित की नई सूची: पुराने वफादार और जातीय संतुलन पर फोकस

    मुंबई। भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र से खाली होने वाली राज्यसभा(Rajya sabha Election) सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक कर दी है। इस बार पार्टी ने “पुराने वफादार” और “जातीय संतुलन” को ध्यान में रखते हुए चार प्रमुख चेहरों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, माया ईवनाते और रामराव वडकुते शामिल हैं। इस चयन ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।

    1. विनोद तावड़े: संगठन के भरोसेमंद ‘संकटमोचक’
    कोंकण क्षेत्र के गिरगांव से आने वाले तावड़े का राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। महाराष्ट्र में शिक्षा और सांस्कृतिक मंत्री रहे तावड़े 2019 में विधानसभा टिकट कटने के बाद कुछ समय हाशिए पर दिखे, लेकिन संगठन में उनके काम को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। तावड़े को राज्यसभा भेजकर बीजेपी का लक्ष्य मराठा और शहरी मध्यम वर्ग को साधना है।

    2. रामदास आठवले: दलित राजनीति का मजबूत चेहरा
    केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख आठवले बीजेपी के पुराने और वफादार सहयोगियों में गिने जाते हैं। दलित पैंथर आंदोलन से जुड़े आठवले तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। राज्यसभा में उनकी वापसी महाराष्ट्र के दलित, विशेषकर बौद्ध वोट बैंक को पार्टी से जोड़ने का संदेश देती है।

    3. माया चिंतामण ईवनाते: महिला और आदिवासी नेतृत्व का प्रतिनिधित्व
    माया ईवनाते का नाम इस सूची का ‘सरप्राइज एलिमेंट’ है। नागपुर की पूर्व मेयर और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य रह चुकी माया ईवनाते को बीजेपी ने महिला नेतृत्व, आदिवासी प्रतिनिधित्व और विदर्भ क्षेत्र के लिए चुना है। आदिवासी समुदाय में उनका प्रभाव और दिल्ली में मंत्रालय का अनुभव उन्हें राज्यसभा के लिए उपयुक्त बनाता है।

    4. रामराव वडकुते: एनसीपी छोड़ भाजपा में शामिल हुए सक्रिय नेता
    मराठवाड़ा के धनगर समुदाय से आने वाले रामराव वडकुते पहले एनसीपी में सक्रिय थे, लेकिन 2019 में विधानसभा टिकट न मिलने के बाद उन्होंने भाजपा जॉइन किया। वडकुते महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाते हैं। उनकी राज्यसभा नॉमिनेशन से बीजेपी को मराठवाड़ा क्षेत्र में आरक्षण और सामाजिक संतुलन का लाभ मिलेगा।

    इस सूची के माध्यम से बीजेपी ने पुराने वफादारों को सम्मानित करने के साथ-साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।

  • Blood Moon: 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण: भारत में कब दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें समय और खास बातें

    Blood Moon: 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण: भारत में कब दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें समय और खास बातें

    नई दिल्ली। 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसके दौरान चांद लालिमा लिए दिखाई देगा। इसी वजह से इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है।


    भारत में कब लगेगा चंद्र ग्रहण?

    भारतीय समय (IST) के अनुसार अनुमानित समय इस प्रकार है:

    • 🌒 आंशिक ग्रहण शुरू: देर रात लगभग 3:20 बजे
    • 🔴 पूर्ण ग्रहण (Blood Moon) शुरू: सुबह करीब 4:30 बजे
    • 🌕 पूर्ण ग्रहण समाप्त: लगभग 5:40 बजे
    • 🌑 ग्रहण समाप्त: सुबह लगभग 6:50 बजे

    (सटीक समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।)


    कितनी देर दिखेगा ‘ब्लड मून’?

    पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवस्था लगभग 1 घंटा 10 मिनट तक रहने की संभावना है। इस दौरान चंद्रमा गहरे लाल या तांबे रंग का दिखाई देगा।

    हालांकि भारत के कई हिस्सों में सूर्योदय के कारण पूरा चरण स्पष्ट रूप से देखने में कठिनाई हो सकती है। पश्चिमी और मध्य भारत में दृश्यता अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है।


    क्यों लाल दिखता है चांद?

    जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं। वायुमंडल नीली रोशनी को अधिक बिखेर देता है और लाल रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी कारण चांद लालिमा लिए दिखाई देता है।


    क्या रखें सावधानी?

    • चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित होता है।
    • दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर दृश्य और भी आकर्षक दिखता है।
    • किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती (यह सूर्य ग्रहण से अलग है)।

    धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं

    भारत में चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। कई लोग ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करते और मंत्र जाप या पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है।


    3 मार्च 2026 की यह खगोलीय घटना आसमान में दुर्लभ नजारा पेश करेगी। मौसम साफ रहा तो देशभर में लाखों लोग ‘ब्लड मून’ का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे।

  • Air New Zealand: बिना शोर और धुएं की उड़ान: एयर न्यूजीलैंड ने किया ऑल-इलेक्ट्रिक विमान का सफल परीक्षण

    Air New Zealand: बिना शोर और धुएं की उड़ान: एयर न्यूजीलैंड ने किया ऑल-इलेक्ट्रिक विमान का सफल परीक्षण

    कल्पना कीजिए कि आप बादलों के ऊपर सफर कर रहे हैं, लेकिन न इंजन का तेज शोर है और न ही धुआं। यह अब सपना नहीं रहा। Air New Zealand ने अपने ‘मिशन नेक्स्ट जेनरेशन एयरक्राफ्ट’ के तहत पहले ऑल-इलेक्ट्रिक विमान की सफल टेस्टिंग पूरी कर ली है।

    यह पहल विमानन क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति मानी जा रही है, जो भविष्य में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम कर सकती है।


    अमेरिका–न्यूजीलैंड की साझेदारी

    ग्रीन एयर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए एयर न्यूजीलैंड ने अमेरिकी कंपनी BETA Technologies के साथ साझेदारी की है।

    इस समझौते के तहत ‘ALIA’ नाम के इलेक्ट्रिक विमान को चुना गया है। यह विमान eVTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग) तकनीक पर आधारित है, यानी यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधा ऊपर उठ सकता है और उतर सकता है।

    टेस्टिंग के दौरान इस विमान ने न्यूजीलैंड के पहाड़ी इलाकों और समुद्र के ऊपर उड़ान भरते हुए एक बार चार्ज होने पर 480 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की। छोटे रूटों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


    क्यों खास है ALIA?

    • यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है और उड़ान के दौरान कार्बन उत्सर्जन नहीं करता।
    • इसका शोर बेहद कम है—घरेलू वैक्यूम क्लीनर या मिक्सी से भी कम।
    • खराब मौसम और तेज हवाओं में भी इसने 2000 फीट की ऊंचाई पर सफल उड़ान भरी।
    • इसकी ताकत पारंपरिक टर्बोप्रॉप इंजनों के बराबर मानी जा रही है।

    2050 नेट-जीरो लक्ष्य की ओर कदम

    न्यूजीलैंड सरकार ने 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। एयर न्यूजीलैंड का यह कदम न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा, बल्कि दुनिया को यह संदेश देगा कि बिजली से हवाई सफर अब हकीकत बनने की राह पर है।

    अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले समय में आसमान में उड़ते विमान शोर और धुएं से मुक्त नजर आ सकते हैं।

  • INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    मोदी सरकार की एग्री-डील पर उठते सवाल और हकीकत

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि क्षेत्र (INDIA-US Agro Trade Deal) में बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और “किसानों के डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर जैसा कदम है।

    लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


    कृषि समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही जारी है। भारत अमेरिका से बादाम, सेब, दालें और कृषि तकनीक आयात करता है, जबकि अमेरिका को चावल, मसाले, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद निर्यात करता है।

    हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच:

    • कृषि बाजारों को खोलने,
    • टैरिफ कम करने,
    • जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात,
    • डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के व्यापार
      को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    इसी संदर्भ में प्रस्तावित या चर्चित “कृषि डील” को लेकर किसानों में आशंकाएँ पैदा हुई हैं।


    किसानों की प्रमुख चिंताएँ

    1. सस्ते आयात का खतरा

    अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे की जाती है। यदि भारतीय बाजार अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन या डेयरी उत्पादों के लिए खुलता है, तो:

    • भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान हो सकता है
    • एमएसपी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है
    • छोटे और सीमांत किसान बाजार से बाहर हो सकते हैं

    2. जीएम फसलों का मुद्दा

    अमेरिका जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का बड़ा उत्पादक है। यदि ऐसे उत्पाद भारत में व्यापक रूप से आयात होते हैं, तो:

    • जैव विविधता पर असर पड़ सकता है
    • पारंपरिक बीजों और स्थानीय खेती पर संकट आ सकता है
    • बीज कंपनियों की निर्भरता बढ़ सकती है

    3. डेयरी सेक्टर पर दबाव

    भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्यतः छोटे किसानों और सहकारी मॉडल (जैसे अमूल) पर आधारित है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अनुमति मिलने से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


    सरकार का पक्ष क्या है?

    सरकार का कहना है कि:

    • कोई भी समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ही किया जाएगा।
    • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
    • कृषि तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा।
    • भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार यह भी तर्क देती है कि वैश्विक व्यापार से अलग रहकर भारत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकता।


    “डेथ वारंट” वाली राजनीति

    “डेथ वारंट” जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। विपक्ष इसे 2020 के कृषि कानूनों की याद से जोड़ता है, जब बड़े कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर व्यापक किसान आंदोलन हुआ था।

    आलोचकों का कहना है कि:

    • यह समझौता धीरे-धीरे कृषि बाजार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल देगा
    • एमएसपी कानूनी गारंटी से ध्यान हटाया जा रहा है
    • आत्मनिर्भर कृषि मॉडल कमजोर होगा

    वहीं समर्थकों का दावा है कि:

    • भारतीय किसान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं
    • निर्यात-आधारित कृषि से आय दोगुनी करने का लक्ष्य मजबूत होगा

    वास्तविक खतरा कहाँ है?

    सवाल यह नहीं है कि अमेरिका के साथ समझौता हो या न हो। असली मुद्दा यह है कि:

    • क्या भारतीय किसानों को बराबर की सब्सिडी और सुरक्षा मिलेगी?
    • क्या एमएसपी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली बरकरार रहेगी?
    • क्या छोटे किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी?

    यदि सुरक्षा उपायों के बिना बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो छोटे किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि समझौता संतुलित शर्तों और चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, तो यह अवसर भी बन सकता है।

  • Discovery Channel: डिस्कवरी चैनल पर 11 फरवरी को प्रसारित होगी ‘यूनानी की कहानी’, जिम सर्भ बने नैरेटर

    Discovery Channel: डिस्कवरी चैनल पर 11 फरवरी को प्रसारित होगी ‘यूनानी की कहानी’, जिम सर्भ बने नैरेटर

    मुंबई। अपनी दमदार आवाज़, बेबाक अंदाज़ और अलग पहचान वाले किरदारों के लिए मशहूर अभिनेता जिम सर्भ एक बार फिर दर्शकों को नए अनुभव से रूबरू कराने जा रहे हैं। इस बार वे अभिनय नहीं, बल्कि एक खास डॉक्यूमेंट्री के नैरेटर (सूत्रधार) के रूप में नजर आएंगे। हमदर्द लेबोरेटरीज के सहयोग से बनी यह डॉक्यूमेंट्री ‘यूनानी की कहानी’(Unani Ki Kahaani) 11 फरवरी 2026 को डिस्कवरी चैनल(Discovery Channel) पर प्रसारित होगी।

    डॉक्यूमेंट्री से जुड़ी ज्यादा जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है, लेकिन जिम सर्भ और हमदर्द लेबोरेटरीज का यह सहयोग पहले से ही चर्चा में है। एक ओर आधुनिक सिनेमा का अलग तेवर रखने वाले जिम सर्भ हैं, तो दूसरी ओर भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक हमदर्द—इस संयोजन ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

    सूत्रों के मुताबिक, ‘यूनानी की कहानी’ डॉक्यूमेंट्री यूनानी चिकित्सा पद्धति की शुरुआत, उसके ऐतिहासिक विकास और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता को दर्शाएगी। इसे आधुनिक प्रस्तुति शैली में तैयार किया गया है, ताकि युवा दर्शक और इतिहास व समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों में रुचि रखने वाले लोग इसे नए दृष्टिकोण से समझ सकें।

    डॉक्यूमेंट्री का टीज़र खुद जिम सर्भ ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया है। यह टीज़र रिलीज़ से पहले शुरू होने वाले मल्टी-फेज़ प्रमोशनल कैंपेन की पहली झलक माना जा रहा है। प्रीमियर की तारीख नजदीक आने के साथ-साथ इससे जुड़ी और जानकारियां, फर्स्ट लुक और बिहाइंड-द-सीन्स कंटेंट सामने लाया जाएगा।