Category: Mumbai Police

  • Government-Owned PEC Ltd Allegedly Duped of ₹631 Crore by  Soumit Ranjan Jena and His Wife: सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड को मोहन भागवत के फंटर सौमित रंजन जेना और उसकी पत्नी प्रीति ने लगाई 631 करोड़ की चपत

    Government-Owned PEC Ltd Allegedly Duped of ₹631 Crore by Soumit Ranjan Jena and His Wife: सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड को मोहन भागवत के फंटर सौमित रंजन जेना और उसकी पत्नी प्रीति ने लगाई 631 करोड़ की चपत

    PEC Limited कंपनी से सौमित ने चीन को लौह अयस्क की सप्लाई के लिए थे 348 करोड़, व्याज सहित हो गए 613 करोड़

    मुंबई। सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड से जुड़े 613 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय डागर ने जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है। डागर का दावा है कि उन्होंने इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन का अध्ययन कर कई महत्वपूर्ण बिंदु जांच एजेंसियों के समक्ष रखे हैं।
    डागर के अनुसार, वर्ष 2011-12 में पिसीज एक्सिम के मुंबई यूनिट के प्रोपराइटर सौमित जेना ने पीईसी लिमिटेड से चीन को लौह अयस्क निर्यात के लिए करीब 613 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। उनका आरोप है कि बाद में कंपनी की संरचना में बदलाव कर कुछ कर्मचारियों को पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक बनाया गया और जेना तथा उनकी पत्नी ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। डागर का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए ऋण की जिम्मेदारी नए निदेशकों वाली कंपनी पर डाल दी गई।
    डागर स्वयं पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के वित्त वर्ष 2011-12 के वैधानिक ऑडिटर थे। उनके खिलाफ गोवा में SPCC/10/2019 मामला दर्ज होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन पर सरस्वत को-ऑपरेटिव बैंक से लिए गए करीब 3 करोड़ रुपये के सुरक्षित ऋण को कंपनी की पुस्तकों में नहीं दिखाने का आरोप लगाया गया। डागर का कहना है कि उक्त ऋण वास्तव में पिसीज एक्सिम के प्रोपराइटर सौमित जेना की प्रोपराइटरी इकाई से संबंधित था और ऋण की राशि उसी खाते में दर्ज एवं बाद में चुकाई गई थी।
    डागर का कहना है कि इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने सरस्वत बैंक से संबंधित बैंक स्टेटमेंट हासिल करने का प्रयास किया, लेकिन बैंक ने उन्हें तीसरा पक्ष बताते हुए स्टेटमेंट उपलब्ध नहीं कराया। उनका आरोप है कि बैंक खाते और उसमें हुए लेन-देन की विस्तृत जांच होने पर 613 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय लेन-देन और धन के हस्तांतरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।


    उन्होंने SPCC/11/2019 और SPCC/12/2019 का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिसीज एक्सिम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में बाद में बनाए गए कुछ निदेशकों को भी मामले में आरोपी बनाया गया, जबकि उनकी भूमिका और नियुक्ति की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। डागर ने एक पूर्व कानूनी प्रबंधक की मौत का भी उल्लेख किया है और इस संबंध में जांच की मांग की है।
    डागर ने आरोप लगाया कि कथित घोटाले में निर्यात से प्राप्त धन के स्थानांतरण, नकद निकासी, कथित फर्जी कारोबार तथा दुबई स्थित खातों में धन भेजे जाने जैसे कई पहलुओं की जांच की जरूरत है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित एजेंसियों अथवा न्यायालय के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।


    उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में आरोपी बताए जा रहे सौमित जेना वर्ष 2018 में भारत से बाहर चला गया, उसकी इतनी पहुंच थी कि उसने अपने रसूख से दो दिन के अंदर अपना और अपनी पत्नी का पासपोर्ट रिन्यू कराकर नेपाल के रास्ते प्राईवेट जेट से दुबई चला गया. सीबीआई दावा करती है कि दुबई की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है लेकिन खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। इस कांड में मोहन भागवत का हाथ है और उनकी सह पर सौमित रंजन जेना वर्ष 2018 में सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड द्वारा दिए गए ऋण को गटकने में सफल हो सका।


    डागर ने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) से भी इस मामले के लेखांकन पक्ष पर विशेषज्ञ राय देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि 3 करोड़ रुपये के बैंक ऋण की वास्तविक प्रकृति और उधारकर्ता की स्थिति स्पष्ट हो जाती है तो उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही के महत्वपूर्ण पहलुओं का समाधान हो सकता है।
    उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग, सीबीआई और अन्य संस्थानों को शिकायतें भेजे जाने का भी दावा किया है। डागर का आरोप है कि वर्ष 2022 में उनसे मामला समाप्त कराने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। इस आरोप की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
    डागर का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वह इस मामले में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें दो बार जान से मारने की धमकी भी मिली है। उनका कहना है कि इतने बड़े सरकारी वित्तीय मामले में केवल आरोपियों की पहचान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बैंकिंग लेन-देन, निर्यात प्राप्तियों और धन के अंतिम उपयोग का फॉरेंसिक ऑडिट कर वास्तविक लाभार्थियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
    उन्होंने केंद्र सरकार, सीबीआई, संबंधित न्यायिक संस्थाओं और वित्तीय नियामक एजेंसियों से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने के लिए शिकायत की गई है तथा यदि सरकारी धन की हेराफेरी प्रमाणित होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

    पीईसी लिमिटेड 613 करोड़ रुपये का वित्तीय घोटाला

    • घोटाले का स्वरूप: वर्ष 2011-12 में ‘पिसीज एक्सिम’ के मुंबई यूनिट के प्रोपराइटर सौमित जेना द्वारा सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड से चीन को लौह अयस्क निर्यात के नाम पर लगभग 613 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था।
    • कंपनी संरचना में बदलाव का आरोप: आरोप है कि बाद में कंपनी की संरचना बदलकर कुछ अन्य कर्मचारियों को ‘पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड’ का निदेशक बना दिया गया, जबकि जेना और उनकी पत्नी ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। इस प्रक्रिया के जरिए ऋण की देयता नई कंपनी पर डाले जाने का दावा किया गया है।
    • फॉरेंसिक ऑडिट और निष्पक्ष जांच की मांग: मामले के वित्तीय लेन-देन, निर्यात प्राप्तियों, धन के अंतिम उपयोग, दुबई स्थित खातों में धन ट्रांसफर और नकद निकासी की गहराई से फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है।

    चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय डागर के दावे और पक्ष

    • वैधानिक ऑडिटर की भूमिका: विजय डागर वर्ष 2011-12 के दौरान पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के वैधानिक ऑडिटर थे।
    • गोवा मामला (SPCC/10/2019): डागर पर सरस्वत को-ऑपरेटिव बैंक से लिए गए लगभग 3 करोड़ रुपये के सुरक्षित ऋण को कंपनी की पुस्तकों में नहीं दिखाने का आरोप है। डागर का स्पष्ट कहना है कि यह ऋण सौमित जेना की प्रोपराइटरी इकाई से संबंधित था और उसी खाते में दर्ज एवं चुकाया गया था।
    • अन्य मामले: डागर ने SPCC/11/2019 और SPCC/12/2019 का हवाला देते हुए बाद के निदेशकों की भूमिका और नियुक्ति की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही, उन्होंने एक पूर्व कानूनी प्रबंधक की संदिग्ध मौत की जांच की भी मांग उठाई है।
    • संस्थानों से अपील: डागर ने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) से इस मामले के लेखांकन पक्ष पर विशेषज्ञ राय देने का आग्रह किया है।
    • सुरक्षा और धमकियां: डागर का दावा है कि वह लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें दो बार जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2022 में मामला समाप्त करने के एवज में रिश्वत मांगे जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

    एजेंसियों और सरकार से मांग

    • प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई जैसी प्रमुख संस्थाओं को शिकायतें भेजी गई हैं।
  • Remove AC From Mahim Police Staion: माहिम पुलिस स्टेशन में बिना अनुमति लगाए गए एयर कंडीशनर हटाए गए

    Remove AC From Mahim Police Staion: माहिम पुलिस स्टेशन में बिना अनुमति लगाए गए एयर कंडीशनर हटाए गए

    नागरिक की शिकायत पर डीसीपी ज़ोन-5 के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई

    आर एस नेटवर्क। गिरीश मिश्रा

    मुंबई | माहिम पुलिस स्टेशन परिसर में बिना अनुमति लगाए गए कथित अवैध एयर कंडीशनर (Remove AC From Mahim Police Staion) को हटाने की कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई एक नागरिक द्वारा लगातार की गई शिकायतों के बाद की गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाॅयर गिरीश मिश्रा द्वारा दिनांक 26 दिसंबर 2024 को डीसीपी ज़ोन-5 माहिम, मुंबई कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद उन्होंने हर महीने रिमाइंडर पत्र देकर मामले में कार्रवाई की मांग की। अंततः मई 2026 में डीसीपी ज़ोन-5 माहिम, मुंबई द्वारा बिना अनुमति लगाए गए एयर कंडीशनर हटाए जाने की पुष्टि की गई। 23 मई 2026 को एसीपी माहिम विभाग, मुंबई कार्यालय की एक महिला कर्मचारी ने शिकायतकर्ता को फोन कर जानकारी दी कि डीसीपी ज़ोन-5 के निर्देश पर माहिम पुलिस स्टेशन परिसर में लगे कथित इल्लीगल एवं बिना परमिशन वाले एयर कंडीशनर हटा दिए गए हैं।

    महाराष्ट्र शासन के नियमों तथा सरकारी परिसरों में संरचनात्मक बदलाव से संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी सरकारी भवन में स्थायी अथवा बाहरी उपकरण लगाने से पहले संबंधित विभाग एवं सक्षम प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक होती है। बिना स्वीकृति लगाए गए उपकरण नियम विरुद्ध माने जाते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, शिकायत में सरकारी परिसर में नियमों का उल्लंघन कर एयर कंडीशनर लगाए जाने का मुद्दा उठाया गया था, जिसके बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की।स्थानीय नागरिकों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों में नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई प्रशासन की जवाबदेही को दर्शाती है।

  • DCP Zone-5 police stations unauthorized AC controversy:महाराष्ट्र शासन के जीआर की पुलिस विभाग उड़ा रही हैं धज्जियाँ? डीसीपी ज़ोन-5 के पुलिस स्टेशनों में “अनधिकृत एसी ”

    DCP Zone-5 police stations unauthorized AC controversy:महाराष्ट्र शासन के जीआर की पुलिस विभाग उड़ा रही हैं धज्जियाँ? डीसीपी ज़ोन-5 के पुलिस स्टेशनों में “अनधिकृत एसी ”

    मुंबई: मुंबई पुलिस के मुंबई पुलिस डीसीपी ज़ोन-5(DCP Zone5) के अंतर्गत आने वाले कई पुलिस स्टेशनों और एसीपी कार्यालयों में कथित रूप से अनधिकृत एयर कंडीशनर(Air Conditioner) लगाए जाने का मामला प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी और बाद में विभागीय समजपत्र में सामने आए विरोधाभासों ने पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    महाराष्ट्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय (जीआर) के अनुसार केवल उच्च वेतन श्रेणी के अधिकारियों को सरकारी कार्यालयों में एसी सुविधा की पात्रता है। इसके बावजूद आरोप है कि कई पुलिस स्टेशनों और एसीपी कार्यालयों में वर्षों से स्प्लिट और विंडो एसी बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं।

    सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता गिरीश केशवराम मिश्रा ने दिसंबर 2022 में संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) को लिखित शिकायत भेजकर इस मामले को उठाया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई पुलिस कार्यालयों में शासन नियमों की अनदेखी कर एसी लगाए गए हैं और सरकारी बिजली का उपयोग हो रहा है।

    इसके बाद सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछा गया कि कितने पुलिस स्टेशनों में एसी वैध अनुमति से लगाए गए, कितने बिना अनुमति संचालित हैं, कितने हटाए गए और जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं। लेकिन जून 2023 में माहीम पुलिस स्टेशन की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि उपलब्ध अभिलेखों में ऐसी जानकारी मौजूद नहीं है।

    मामले ने तब नया मोड़ लिया जब अप्रैल 2026 में उसी थाने की प्रशासन शाखा से जारी समजपत्र में कहा गया कि निरीक्षण के दौरान कोई अनधिकृत एसी नहीं पाया गया और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिना अनुमति एसी न लगाए जाएँ।

    यहीं सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आता है, जब रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, तो निरीक्षण किस दस्तावेज़ के आधार पर किया गया? और यदि कोई अनधिकृत एसी था ही नहीं, तो बिना अनुमति एसी न लगाने की चेतावनी क्यों जारी करनी पड़ी?

    अब इस पूरे मामले में कई गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं:

    • ●क्या शासन के GR का उल्लंघन हुआ?
    • ●क्या सरकारी बिजली और संसाधनों का अनुचित उपयोग हुआ?
    • ●क्या रिकॉर्ड जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराया गया?
    • ●क्या यह मामला केवल माहिम पुलिस स्टेशन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे डीसीपी ज़ोन-5 में फैला है?

    सूत्रों के अनुसार यदि इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाती है, तो मुंबई पुलिस के थानों के भीतर सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आ सकता है। फिलहाल बिजली खर्च ऑडिट, संपत्ति रजिस्टर की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।

  • Pune Municipal Corporation:अनुशासन’ वाली बीजेपी में अंदरूनी जंग, दो महिला पार्षदों का विवाद सीएम तक पहुंचा

    Pune Municipal Corporation:अनुशासन’ वाली बीजेपी में अंदरूनी जंग, दो महिला पार्षदों का विवाद सीएम तक पहुंचा

    Pune Municipal Corporation: भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पूणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) के प्रभाग 22 की दो महिला पार्षदों के बीच विवाद अब पुलिस स्टेशन से होते हुए सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है, जिससे पार्टी की अनुशासित छवि पर सवाल उठने लगे हैं। (Internal Strife within the BJP)

    जानकारी के अनुसार, भाजपा पार्षद अर्चना पाटील और मृणाल कांबळे के बीच लंबे समय से चल रहा मतभेद अब खुले टकराव में बदल गया है। अर्चना पाटील ने आरोप लगाया है कि मृणाल कांबळे ने उनका मॉर्फ किया हुआ वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की। साथ ही पुलिस आयुक्त की मौजूदगी में हुई बैठक के बयानों को भी तोड़-मरोड़कर उनके नाम से प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

    अर्चना पाटील ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और देवेन्द्र फडणवीस को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर कई बार मुद्दा उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकला। दूसरी ओर, मृणाल कांबळे ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे “पब्लिसिटी स्टंट” करार दिया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में बाधा डालने के लिए जानबूझकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुशासन और कैडर आधारित राजनीति का दावा करने वाली भाजपा के भीतर इस तरह का खुला विवाद नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर जब मामला सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका हो। फिलहाल, पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • Traffic in Malad: मालाड में ट्रैफिक पुलिस नदारद, ‘मीट चौकी’ बना जाम का जाल

    Traffic in Malad: मालाड में ट्रैफिक पुलिस नदारद, ‘मीट चौकी’ बना जाम का जाल

    मुंबई: Malad के मीट चौकी इलाके में बुधवार दोपहर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी के चलते भीषण जाम लग गया, जिसमें हजारों लोग घंटों फंसे रहे। (Traffic in Malad) तेज धूप और उमस भरी गर्मी के बीच यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि जाम की वजह किसी विशेष चेकिंग अभियान नहीं, बल्कि चौराहे पर ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति रही।

    इसी दौरान एक समुदाय के पर्व के चलते मंदिर के पास अचानक भीड़ बढ़ गई, लेकिन उसे संभालने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। नतीजतन सड़क पर अव्यवस्था फैल गई और वाहन चालक अपनी-अपनी दिशा में निकलने की कोशिश में जाम और बढ़ता गया।इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और डिलीवरी कर्मियों पर पड़ा, जबकि गर्मी के कारण बच्चों और बुजुर्गों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर ट्रैफिक पुलिस तैनात होती और भीड़ प्रबंधन किया जाता, तो हालात इतने बिगड़ते नहीं। यह घटना एक बार फिर मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था की कमजोर तैयारियों को उजागर करती है, जहां संभावित भीड़ के बावजूद प्रभावी योजना का अभाव नजर आया।

  • पत्रकार सलीम खतीब ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) में किया प्रवेश

    पत्रकार सलीम खतीब ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) में किया प्रवेश

    मुंबई (संवाददाता): वरिष्ठ पत्रकार सलीम खतीब ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) में आधिकारिक रूप से प्रवेश किया। यह पक्ष प्रवेश समारोह मुंबई मराठी पत्रकार संघ में उत्साहपूर्ण माहौल में आयोजित किया गया, जहां पार्टी प्रमुख Ramdas Athawale की उपस्थिति में उन्हें पार्टी में शामिल किया गया।

    इस अवसर पर पार्टी के मुंबई जिलाध्यक्ष संजय पवार, दक्षिण मुंबई जिला उपाध्यक्ष विजय जाधव, कुलाबा तालुका अध्यक्ष विशाल गायकवाड सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    सभी ने सलीम खतीब का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।समारोह के दौरान पार्टी नेतृत्व ने विश्वास जताया कि सलीम खतीब के अनुभव और सामाजिक कार्यों से संगठन को मजबूती मिलेगी।

  • नवी मुंबई में 14 साल के छात्र ने की आत्महत्या, शिक्षक पर संदेह !

    नवी मुंबई में 14 साल के छात्र ने की आत्महत्या, शिक्षक पर संदेह !

    नवी मुंबई| एक चौंकाने वाली घटना हुई है जिसमें नवी मुंबई के घनसोली में रहने वाले एक 14 साल के लड़के ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रबाले पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच कर रही है कि उसने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट का नाम प्रीत रंकर है। वह अपने माता-पिता के साथ घनसोली गांव के रंकर अली में रहता था। शुक्रवार शाम को जब घर पर कोई नहीं था, तो उसने पर्दे की रॉड पर तौलिए से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।इस मामले मे शिक्षक पर संदेह जताया जा रहा है फिलहाल मामले की जांच शुरू है |

    जब माता-पिता बाहर से घर आए तो इस बात का पता चला। रबाले पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज कर लिया है और आत्महत्या का कारण अभी तक सामने नहीं आया है। यह जानकारी सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर बालकृष्ण पाटिल ने दी। पुलिस परिवार से कुछ नाराजगी, स्कूल में हुई कोई बात, दोस्तों से झगड़ा जैसे सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस ने शुरुआती शक जताया है कि यह पढ़ाई का तनाव हो सकता है।

    स्टूडेंट का आत्महत्या करना एक गंभीर समस्या है। नवी मुंबई में स्टूडेंट सुसाइड एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। वैसे तो इसके कई कारण हैं, लेकिन पढ़ाई का स्ट्रेस एक बड़ा कारण है। 2 जून, 2025 को सीवुड्स के एक स्टूडेंट ने स्कूल की पांचवीं मंज़िल से कूदकर सुसाइड कर लिया। सुबह 7 बजे स्कूल बंद होने से पहले, वह सबकी नज़रों से बचकर छत पर गया और वहां से सीधे कूद गया। इस घटना ने न सिर्फ नवी मुंबई को हिलाकर रख दिया, बल्कि स्कूल में स्टूडेंट सेफ्टी का मुद्दा भी उठा दिया।

    12 दिसंबर, 2023 को नवी मुंबई में एक ही दिन दो स्टूडेंट्स ने सुसाइड कर लिया। करावे गांव के एक तालाब में पंद्रह साल के लड़के ने सुसाइड कर लिया। स्टूडेंट का नाम दर्शिक पाटिल है। दर्शिक क्लास 10 में पढ़ता था। वह रविवार आधी रात को चुपके से अपने घर से निकल गया। और करावे गांव के तालाब में कूदकर अपनी जान दे दी। दूसरी घटना में पता चला कि नेरुल सेक्टर 16 में रहने वाले क्लास 9 के स्टूडेंट पृथ्वी धवले ने अपने घर में चादर के सहारे फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। इस समय उसके माता-पिता काम से बाहर गए हुए थे। जब घर पर कोई नहीं था, तो उसने अपनी जान दे दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सुसाइड से पहले लिखे नोट में उसने पढ़ाई न कर पाने को वजह बताया था।

    पढ़ाई के स्ट्रेस में मां ने जान दे दी
    वैसे तो पढ़ाई के स्ट्रेस में स्टूडेंट्स के सुसाइड करने की कई घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन 30 अगस्त, 2021 को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जब एक मां ने अपनी ही बेटी को इसलिए मार डाला क्योंकि वह उसे पढ़ाई के लिए मजबूर कर रही थी। शुरुआत में इस घटना को सुसाइड माना गया, लेकिन जांच में पता चला कि यह सुसाइड नहीं बल्कि मर्डर था, और यह मर्डर उसकी अपनी नाबालिग बेटी ने ही किया था।

  • नाबालिग ने की ऑटो चालक की हत्या

    नाबालिग ने की ऑटो चालक की हत्या

    मुंबई के कुर्ला इलाके में एक 17 वर्षीय नाबालिग ने 48 वर्षीय ऑटो चालक जयराज नायडू की हत्या कर दी। यह घटना न्यू रेलवे कॉलोनी में हुई।

    जानकारी के अनुसार, नायडू अपनी ऑटो घर के पास पार्क करते थे। आरोपी नाबालिग पहले भी ऑटो में बैठता था, जिस पर नायडू ने उसे समझाया था। मंगलवार रात जब नायडू ने उसे फिर टोका, तो नाबालिग ने धारदार हथियार से उनकी गर्दन पर हमला कर दिया और फरार हो गया।नायडू को राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नेहरूनगर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह भेज दिया है और हत्या का मामला दर्ज किया है।

  • प्रेमिका के परिवार की मानसिक प्रताड़ना से तंग कॉन्स्टेबल ने किया आत्महत्या

    प्रेमिका के परिवार की मानसिक प्रताड़ना से तंग कॉन्स्टेबल ने किया आत्महत्या

    मुंबई: मुंबई पुलिस में हाल ही में भर्ती हुए 32 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल ने अपनी प्रेमिका के परिवार द्वारा किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि प्रेमिका की मां ने उसे धमकी दी थी—“जान दे दे, नहीं तो तेरी नौकरी खत्म करवा देंगे।” इस घटना से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। इस मामले में वाकोला पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रशिक्षण केंद्र में दी जान

    जानकारी अनुसार मृतक का नाम भैयासाहब भीमराव व्हावले (32) है। उनकी नियुक्ति 7 फरवरी 2026 को मुंबई पुलिस में चालक पद पर हुई थी। वह कलिना स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग ले रहे थे। 15 मार्च की सुबह उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

    सुसाइड नोट में चौंकाने वाला खुलासा

    घटना के बाद पुलिस को उनकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला। इस नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम लिखे हैं। भैयासाहब का नांदेड़ जिले के हादगांव की दिव्या नाम की युवती से प्रेम संबंध था, लेकिन लड़की के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।सुसाइड नोट के अनुसार, युवती के पिता ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी, जबकि मां ने कहा था—“आत्महत्या कर लो, नहीं तो तुम्हारी नौकरी खत्म करवा देंगे।” लगातार हो रहे मानसिक दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।

    आरोपियों पर केस दर्ज

    भैयासाहब के पिता की शिकायत पर वाकोला पुलिस ने युवती के माता-पिता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रकाश खांडेकर के मार्गदर्शन में जांच जारी है।सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

  • Mumbai:मुंबई में हाई अलर्ट: महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी

    बजट सत्र के बीच खाली कराया गया पूरा परिसर

    मुंबई । गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल मिलने की खबर सामने आई। यह धमकी ऐसे समय आई जब महाराष्ट्र विधानसभा बजट सत्र की कार्यवाही जारी थी और बड़ी संख्या में मंत्री, विधायक और अधिकारी भवन परिसर में मौजूद थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे विधान भवन को तुरंत खाली करा लिया गया और इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया।प्राथमिक जानकारी के अनुसार कुछ विधायकों और विधान भवन की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक धमकी भरा मेल भेजा गया था, जिसमें इमारत को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। जैसे ही इस मेल की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिली, तुरंत आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया गया और परिसर में मौजूद सभी कर्मचारियों, अधिकारियों और विधायकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।मुंबई पुलिस और बम निरोधक दस्ते की जांच तेजधमकी की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस और Bomb Detection and Disposal Squad (BDDS) की टीमें तुरंत विधान भवन पहुंच गईं। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को घेर लिया और चप्पे-चप्पे की गहन तलाशी शुरू कर दी।विशेष उपकरणों और डॉग स्क्वॉड की मदद से भवन के हर हिस्से की जांच की जा रही है। सुरक्षा अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि परिसर में कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री मौजूद न हो। एहतियात के तौर पर पूरे परिसर को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है।बजट सत्र के बीच मचा हड़कंपधमकी भरा ईमेल ऐसे समय आया जब विधान भवन में बजट सत्र की महत्वपूर्ण कार्यवाही चल रही थी। इस दौरान कई अहम विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी। अचानक सुरक्षा अलर्ट जारी होने के बाद सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और पूरे परिसर में हड़कंप मच गया।सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत ‘फ्लैश अलर्ट’ जारी किया, जिसके बाद सभी विधायकों और कर्मचारियों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया।तकनीकी टीम ईमेल के स्रोत की जांच में जुटीधमकी देने वाले ईमेल की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की साइबर और तकनीकी टीम भी सक्रिय हो गई है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह ईमेल किस आईपी एड्रेस से भेजा गया और इसके पीछे कौन लोग शामिल हो सकते हैं।फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के लिए डिजिटल ट्रेसिंग की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जब तक पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक विधान भवन परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कड़ी पाबंदी रहेगी।सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, तलाशी अभियान जारीअधिकारियों के मुताबिक अभी भी पूरे भवन परिसर को सैनिटाइज किया जा रहा है और हर मंजिल की बारीकी से जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए पूरी सतर्कता बरत रही हैं।हालांकि अभी तक किसी विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस इसे गंभीर धमकी मानते हुए हर एंगल से जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विधान भवन की सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू की जाएंगी।