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  • Forged Certificate: अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे के बाद भाई ने किया बड़ा खुलासा, प्रशासन में मचा हड़कंप

    Forged Certificate: अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे के बाद भाई ने किया बड़ा खुलासा, प्रशासन में मचा हड़कंप

    फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी?

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। GST विभाग में डिप्टी कमिश्नर पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले प्रशांत कुमार सिंह की कहानी अब एक बड़े विवाद में तब्दील होती नजर आ रही है।

    इस्तीफे के बाद इस पूरे मामले में ऐसा धमाकेदार ट्विस्ट आया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। खुद उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने सामने आकर आरोप लगाया है कि प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की।


    “पूरी तरह स्वस्थ हैं, फिर कैसे बने दिव्यांग?” — भाई का सनसनीखेज दावा

    डॉ. विश्वजीत सिंह ने मीडिया और प्रशासन के समक्ष खुलकर कहा है कि

    “प्रशांत कुमार सिंह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी आंखों में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिससे उन्हें नेत्र दिव्यांग माना जाए।”

    इसके बावजूद आरोप है कि उन्होंने खुद को 40 प्रतिशत नेत्र विकलांग बताकर सरकारी सेवा में एंट्री ली, जो नियमों के खिलाफ ही नहीं बल्कि सरकारी तंत्र के साथ खुली धोखाधड़ी मानी जा रही है।

    भाई का दावा है कि जिस दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी मिली, वह पूरी तरह फर्जी, भ्रामक और नियम विरुद्ध है।


    भाई बनाम भाई, सच्चाई बनाम सिस्टम

    इस पूरे मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब आरोप परिवार के भीतर से सामने आए।
    भाई द्वारा भाई पर लगाए गए आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—

    • क्या सरकारी विभागों में दस्तावेजों की सही जांच हुई थी?
    • क्या दिव्यांग कोटे का दुरुपयोग किया गया?
    • और अगर आरोप सही हैं, तो ऐसे कितने अधिकारी सिस्टम में बैठे हैं?

    प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच की मांग तेज

    इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है।
    सूत्रों के मुताबिक, मामला अब उच्च स्तरीय जांच की ओर बढ़ सकता है और अगर आरोप सही पाए गए तो—

    • नौकरी रद्द होने
    • सेवा लाभ वापस लेने
    • और आपराधिक कार्रवाई
      तक की नौबत आ सकती है।

    सवाल जो देश पूछ रहा है

    आज हर आम नागरिक के मन में एक ही सवाल है—

    क्या फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे सिस्टम को चकमा देना इतना आसान हो गया है?

    अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या सच में दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

  • UGC ACT 2026: यूजीसी के समानता विनियम 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    UGC ACT 2026: यूजीसी के समानता विनियम 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    नई दिल्ली।
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित किए गए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नियम जाति आधारित भेदभाव की संकीर्ण और गैर-समावेशी परिभाषा अपनाते हैं, जिससे समाज के एक बड़े वर्ग को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है।

    याचिकाकर्ता विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका में विशेष रूप से नियम 3(सी) को कटघरे में खड़ा किया गया है। याचिका के अनुसार, यह नियम जाति आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित करता है, जबकि सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को इसके दायरे से बाहर रखता है।

    “जाति आधारित उत्पीड़न केवल आरक्षित वर्ग तक सीमित नहीं”

    याचिका में कहा गया है कि यूजीसी का यह दृष्टिकोण वास्तविक सामाजिक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करता। जाति के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव किसी भी व्यक्ति के साथ हो सकता है, चाहे वह किसी भी वर्ग से हो। ऐसे में केवल कुछ वर्गों को ही संस्थागत संरक्षण देना न्याय और समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि मौजूदा स्वरूप में नियम लागू रहने पर, सामान्य वर्ग के वे छात्र या शिक्षक, जो जाति के नाम पर उत्पीड़न का शिकार होते हैं, न तो शिकायत दर्ज करा सकते हैं और न ही उन्हें कोई प्रभावी निवारण तंत्र उपलब्ध है।

    संविधान के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

    याचिका में इन विनियमों को संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 का उल्लंघन बताया गया है।

    • अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है।
    • अनुच्छेद 15(1) राज्य को धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है।
    • वहीं अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

    याचिका के अनुसार, यूजीसी का यह विनियम इन मौलिक अधिकारों की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि यह समान परिस्थितियों में अलग-अलग नागरिकों के साथ अलग व्यवहार करता है।

    नियम 3(सी) पर रोक और पुनर्परिभाषा की मांग

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह नियम 3(सी) को उसके वर्तमान स्वरूप में लागू करने पर रोक लगाए और यूजीसी को निर्देश दे कि जाति आधारित भेदभाव को जाति-तटस्थ और संविधान-सम्मत तरीके से परिभाषित किया जाए।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि भेदभाव की परिभाषा ऐसी होनी चाहिए, जिससे हर नागरिक को, उसकी जाति की परवाह किए बिना, समान सुरक्षा और शिकायत निवारण का अधिकार मिल सके।

    समान अवसर केंद्र और हेल्पलाइन सभी के लिए खोलने की मांग

    इसके अतिरिक्त, याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी से अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में स्थापित ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ जैसी व्यवस्थाएं किसी भी प्रकार के वर्गीय भेदभाव के बिना सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए उपलब्ध कराई जा सकें।

    शिक्षा में समानता की बहस फिर तेज

    इस याचिका के बाद उच्च शिक्षा में समानता, आरक्षण और जाति आधारित संरक्षण को लेकर एक बार फिर संवैधानिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।

  • Army Vehicle Accident: खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद, 7 गंभीर घायल

    Army Vehicle Accident: खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद, 7 गंभीर घायल

    जम्मू: डोडा जिले के भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टाप के पास एक भयानक सैन्य वाहन दुर्घटना में 10 जवानों की जान चली गई और 7 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह वाहन बुलेट-प्रूफ आर्मी गाड़ी थी, जिसमें कुल 17 जवान सवार थे। वाहन ऊंची पोस्ट की ओर जा रहा था, तभी ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और गाड़ी करीब 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी।

    घायलों को एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया:
    घायलों को तुरंत बचाया गया और गंभीर रूप से घायल 7 सैनिकों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के तुरंत बाद सेना और पुलिस ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया। अधिकारी बता रहे हैं कि हादसे में जान गंवाने वाले सभी सैनिकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

    लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने जताया शोक
    लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुख जताया और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश हमेशा सैनिकों की बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान को याद रखेगा। उपराज्यपाल ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल जवानों को सर्वोत्तम इलाज सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए।

    स्थानीय अधिकारियों और सेना की टीम लगातार घायलों की देखभाल और दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी हुई है। घटना ने एक बार फिर सेना और सुरक्षा बलों की निष्ठा और साहस के सामने देशवासियों की संवेदनशीलता को उजागर किया है।

  • Donald Trump Tarrif: भारत-यूरोपियन यूनियन की ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’, ट्रंप की टैरिफ नीति पर बड़ा झटका

    Donald Trump Tarrif: भारत-यूरोपियन यूनियन की ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’, ट्रंप की टैरिफ नीति पर बड़ा झटका

    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और यूरोप के दबावों के बीच भारत ने यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। इस डील को दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल ट्रेड” कहा है और इसे वैश्विक व्यापार की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।

    डील से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा:
    इस समझौते के तहत भारत यूरोप के करीब 27 देशों के 2 अरब लोगों के बाजार तक सीधे पहुंच सकेगा। यूरोप में भारत के कपड़े, चमड़े, आभूषण और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद अब ड्यूटी-फ्री पहुंचेंगे। वहीं, यूरोप से आने वाले वाइन, डेयरी प्रोडक्ट और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुएं भारत में कम टैक्स के साथ उपलब्ध होंगी।

    डॉलर की दादागिरी पर रोक:
    सबसे बड़ा प्रभाव वित्तीय क्षेत्र में होगा। यूरोप और भारत के बीच सीधे मुद्रा आदान-प्रदान से डॉलर पर निर्भरता कम होगी। यूरो और रुपया मजबूत होंगे, जबकि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक दबदबे वाली स्थिति कमजोर हो सकती है।

    ट्रंप के लिए बड़ा झटका:
    ट्रंप की मेक अमेरिका ग्रेट अगेन योजना और टैरिफ की धमकी यूरोप और भारत को अमेरिकी दबदबे से मुक्त कर रही है। इससे ट्रंप ने यूरोपियन यूनियन के साथ संभावित ट्रेड डील का अवसर खो दिया है और उनकी वैश्विक आर्थिक रणनीति को चुनौती मिल रही है।

    भविष्य में रणनीतिक फायदे:
    यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी। इससे भारत को रक्षा सौदे, साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग में भी मजबूती मिलेगी। आईटी और स्किल्ड प्रोफेशनल्स को यूरोप में काम करने के अवसर भी बढ़ेंगे।

    भारत की तैयारी:
    आरबीआई ने विदेशी बैंकों को भारत में स्पेशल रुपये वोस्ट्रो अकाउंट खोलने का निर्देश दिया है। इसके जरिए भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच रुपये और यूरो में सीधे कारोबार शुरू हो सकेगा। रूस, श्रीलंका, UAE और जर्मनी सहित 22 से अधिक देश भी इस प्रणाली में शामिल होने के लिए सहमत हैं।

    विशेषज्ञों की राय:
    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस डील से भारत वैश्विक आर्थिक नक्शे में अपनी स्थिति मजबूत करेगा और ट्रंप के टैरिफ दवाब का असर यूरोप और भारत के सहयोग से कम होगा। यह डील भारत के लिए आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक प्रभाव के मामले में अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

  • Richa Industries बैंक घोटाला: ED ने पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता को गिरफ्तार, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

    Richa Industries बैंक घोटाला: ED ने पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता को गिरफ्तार, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

    गुरुग्राम: रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड(Richa Industries) से जुड़े बड़े बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गुरुग्राम जोनल टीम ने कंपनी के पूर्व प्रमोटर और सस्पेंडेड मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें ED की कस्टडी में 8 दिन के लिए भेजा गया।

    236 करोड़ का चूना, फर्जी बिलिंग का खेल:
    ED की जांच में सामने आया है कि संदीप गुप्ता ने 2015 से 2018 के बीच जानबूझकर बिना माल सप्लाई किए फर्जी बिक्री दिखाकर सार्वजनिक बैंकों को 236 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाया। इसमें कॉटन फैब्रिक सेल 7.42 करोड़ और सोलर संबंधित फर्जी बिक्री 8.50 करोड़ की पाई गई। फर्जी लेन-देन के लिए कई शेल कंपनियों का सहारा लिया गया और इनवॉइस व अकाउंट बुक्स में हेराफेरी की गई।

    फर्जी खरीद और लोन का घोटाला:
    कंपनी ने ZLD प्लांट और मशीनरी की 9.23 करोड़ की फर्जी खरीद दिखाई, जबकि FY 2015-16 से 2017-18 के बीच 16.40 करोड़ रुपये ग्रुप कंपनियों में लोन रीपेमेंट के नाम पर घुमाए गए। FY 2018-19 में RIL के पैसों से रिचा कृष्णा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड में controlling stake खरीदकर अहम प्रोजेक्ट को बाहर ले जाया गया।

    संपत्तियों में हेरफेर, CIRP प्रभावित:
    ED ने आरोप लगाया कि CIRP शुरू होने से ठीक पहले संदीप गुप्ता ने कंपनी की कीमती संपत्तियों को डायवर्ट करने में भूमिका निभाई। इसके लिए कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। दिसंबर 2018 में CIRP शुरू हुआ, लेकिन कोई रिज़ॉल्यूशन प्लान पास नहीं हो सका। 11 जून 2025 को NCLT ने कंपनी को लिक्विडेशन में डाल दिया।

    बैंकों को भारी नुकसान, रिजर्व प्राइस पर बेची गई कंपनी:
    16 अक्टूबर 2025 को कंपनी को ई-ऑक्शन में 96 करोड़ के रिजर्व प्राइस पर बेचा गया। इससे IOB और यूनियन बैंक जैसे पब्लिक सेक्टर बैंकों को 696 करोड़ के दावों के बदले मात्र 40.29 करोड़ मिले, यानी लगभग 94% का हेयरकट झेलना पड़ा।

    कोरपोरेट गारंटी और शेल कंपनियों का इस्तेमाल:
    ED की जांच में खुलासा हुआ कि CIRP शुरू होने से पहले रिचा इंडस्ट्रीज़ ने छह कंपनियों को 232 करोड़ से ज्यादा की कॉरपोरेट गारंटी दी, जिनमें CoC में करीब 48.25% वोटिंग राइट्स थे। संदीप गुप्ता ने शेल कंपनी सारिगा कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड बनाई, जिसमें पूर्व कर्मचारी नेहा सिंह को बेनामी डायरेक्टर बनाया गया।

    ED की जांच जारी:
    ED ने आरोप लगाया कि CIRP के दौरान संदीप गुप्ता और उनके परिवार ने गैरकानूनी तरीके से कंपनी पर कंट्रोल बनाए रखा, एग्रीमेंट किए और सैलरी भी ली। CIRP शुरू होने से पहले मसूरी के एक बड़े प्रोजेक्ट को प्रमोटर से जुड़ी कंपनी को सब-कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया, जिससे करीब 40 करोड़ रुपये बाहर चले गए।

  • Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    New Delhi: हिजाब को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में घमासान मच गया है। कथावाचक और धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने ओवैसी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका सपना है कि भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने, तो “हमारा भी सपना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में तिलक और भगवा वस्त्र पहनने वाले लोग सत्ता में आएं।”

    देवकीनंदन ठाकुर ने इसे विचारधाराओं की टक्कर बताते हुए कहा कि जैसे ओवैसी भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, वैसे ही सनातन समाज भी अपनी आकांक्षाएं रखता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    ओवैसी के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि ओवैसी “आधा सच” बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब को मजबूरी मानती हैं और ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

    गौरतलब है कि ओवैसी ने सोलापुर की जनसभा में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है और भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी इस पद तक पहुंचेगी। इसी बयान ने अब सियासी आग में घी डालने का काम किया है।

  • Lessons from the Gurukul- Sustaining Life with Minimal Resources: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कर-कमलों से ‘गुरुकुल सिखाता है’ पुस्तक का विमोचन

    Lessons from the Gurukul- Sustaining Life with Minimal Resources: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कर-कमलों से ‘गुरुकुल सिखाता है’ पुस्तक का विमोचन

    वाराणसी। संवाददाता
    शंकराचार्य सम्मान कार्यक्रम के अवसर पर ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के कर-कमलों द्वारा “गुरुकुल सिखाता है: कम संसाधनों में जीवन निर्वाह” (Lessons from the Gurukul: Sustaining Life with Minimal Resources) नामक पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया।

    यह ज्ञानवर्धक पुस्तक शंकराचार्य जी के नैष्ठिक ब्रह्मचारी शिष्य स्वामी प्रभुतानंद ब्रह्मचारी द्वारा संकलित की गई है। पुस्तक का उद्देश्य आधुनिक समाज को यह संदेश देना है कि प्राचीन गुरुकुल परंपरा के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी अनुशासित, आत्मनिर्भर और श्रेष्ठ जीवन जिया जा सकता है।

    पुस्तक विमोचन के अवसर पर आशीर्वचन देते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति में यह ग्रंथ नई पीढ़ी को सादगी, संयम और आत्मसंयम का मार्ग दिखाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि गुरुकुल जीवन केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-दर्शन है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है।

    महाराज जी ने स्वामी प्रभुतानंद ब्रह्मचारी जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुकुलों की शिक्षा पद्धति ही मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति की सशक्त आधारशिला है। पुस्तक में गुरुकुलों के उन सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जो न्यूनतम साधनों में भी जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हैं।

    इस अवसर पर विभिन्न पूज्य संतगण, विद्वान आचार्य एवं वैदिक गुरुकुलम् के बटुक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस पुस्तक को वर्तमान समय की अत्यंत आवश्यक कृति बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

    उल्लेखनीय है कि स्वामी प्रभुतानंद ब्रह्मचारी जी बाल्यकाल से ही वेद शिक्षा के लिए काशी आ गए थे। उन्होंने कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का पूर्ण अध्ययन किया तथा शंकराचार्य जी की सेवा में रहते हुए नैष्ठिक ब्रह्मचारी की दीक्षा ग्रहण की। वर्तमान में वे देवार्चन एवं सेवा करते हुए पूर्णतः विरक्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

  • पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार: शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली की यात्रा के लिए रुके थे

    पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार: शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली की यात्रा के लिए रुके थे

    लखनऊ / देवरिया। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी अमिताभ ठाकुर को लखनऊ क्राइम ब्रांच और देवरिया पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर देवरिया ले जाया है। ठाकुर उस समय लखनऊ–दिल्ली जा रही ट्रेन में सवार थे जब उन्हें हिरासत में लिया गया।

    गिरफ्तारी का विवरण

    स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, ठाकुर को ट्रेन रुकने पर सादे कपड़ों में उपस्थित पुलिसकर्मियों ने उठाकर हिरासत में लिया और उन्हें देवरिया ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ शुरू की गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि गिरफ्तारी योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई।

    आरोप क्या हैं?

    पुलिस का दावा है कि वर्ष 1999 में देवरिया में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान ठाकुर ने अपने पद का दुरुपयोग कर जिला उद्योग केंद्र, देवरिया के औद्योगिक प्लॉट संख्या B-2 का आवंटन अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर कराया। आरोप है कि आवंटन के लिए कूट रचित (जाली) दस्तावेज तैयार किए गए — जिसमें छद्म नाम, झूठे पते और परिवर्तित अभिलेख शामिल थे — और बाद में प्लॉट को लाभ के लिए बेचा गया। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने यह प्रार्थना-पत्र/शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई।

    दर्ज धाराएँ और सजा की जानकारी

    • धारा 419 — किसी अन्य की पहचान धारण कर धोखाधड़ी: सजा तक 3 वर्ष या जुर्माना या दोनों।
    • धारा 420 — धोखाधड़ी व संपत्ति हानि: सजा तक 7 वर्ष व जुर्माना।
    • धारा 467 — मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी: आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा व जुर्माना।
    • धारा 468 — जाली दस्तावेज बनाना धोखाधड़ी के उद्देश्य से: सजा तक 7 वर्ष व जुर्माना (अक्सर जमानत पर संकुल)।
    • धारा 471, 34, 120B भी आरोपपत्र में शामिल हैं। (नोट: सजा का निर्धारण अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।)

    पुलिस का बयान और वर्तमान स्थिति

    लखनऊ क्राइम ब्रांच और देवरिया पुलिस ने मामले की जांच और सत्यापन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ठाकुर को देवरिया सदर कोतवाली में रखा गया और उनसे पूछताछ जारी है; आगे की कानूनी कार्यवाही—रिमांड, पेशी या जमानत—आगामी सुनवाई के अनुसार तय होगी।


    ठाकुर के प्रति प्रतिक्रिया

    पूर्व आईपीएस और सामाजिक सक्रियता में जुड़े ठाकुर ने इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में आरोपों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ या ‘मंसूबाबद्ध’ बताकर खारिज किया था; इस गिरफ्तारी से जुड़े उनके हालिया बयान उपलब्ध होते ही उसे जोड़ा जाएगा। पहले भी इस प्रकरण पर मीडिया पर और सोशल प्लेटफॉर्म पर ठाकुर व उनके वकील की प्रतिक्रिया दर्ज रही है।


    निष्कर्ष — आगे क्या होने की सम्भावना है

    • पुलिस के बयान, दर्ज धाराओं और गिरफ्तारी के बाद प्राथमिकी के आधार पर जांच तेज़ कर दी गई है।
    • अगला कदम़: पुलिस द्वारा पूछताछ, सम्भवतः रिमांड के लिए अदालत में पेशी, और यदि आवश्यक हुआ तो जमानत याचिका/जमानत सुनवाई।
    • कोर्ट(Delhi High Court) और जांच एजेंसियों के आधिकारिक प्रवक्ताओं से प्राप्त बयानों के बाद ही केस की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।
  • Fail Modi Government:लूथरा ब्रदर्स ने जमानत के लिए दिल्ली कोर्ट में लगाई अर्जी, गिरफ्तारी से बचने के लिए भागे थाईलैंड

    Fail Modi Government:लूथरा ब्रदर्स ने जमानत के लिए दिल्ली कोर्ट में लगाई अर्जी, गिरफ्तारी से बचने के लिए भागे थाईलैंड

    गोवा। गोवा के एक नाइटक्लब में भीषण आग(Goa Fire) की घटना के बाद आरोपी रेस्टोरेंट मालिक गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा(Luthra Brothers) ने गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली कोर्ट में जमानत याचिका दायर (Bail Application) की है। दोनों पर आरोप है कि घटना के कुछ ही घंटों के भीतर वे थाईलैंड के फुकेत भाग गए।

    शनिवार रात ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’(Birch by Romeo Lane) रेस्टोरेंट में लगी आग में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में ज्यादातर रेस्टोरेंट के कर्मचारी शामिल थे।


    आग के बाद विदेश भागे आरोपी

    गोवा पुलिस के अनुसार, अरपोरा में आग की घटना के बाद:

    • दोनों भाई इंडिगो की फ्लाइट से फुकेत रवाना हुए
    • जांच एजेंसियों को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी
    • अब CBI और इंटरपोल के साथ समन्वय किया जा रहा है

    DIG वर्षा शर्मा ने कहा:

    “हमने CBI और इंटरपोल के साथ तालमेल किया है। ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।”


    एक अन्य मालिक अजय गुप्ता हिरासत में

    गोवा पुलिस ने बुधवार को नाइटक्लब के चार मालिकों में से एक अजय गुप्ता को क्राइम ब्रांच ऑफिस लाया। मामले में उनके बयान और भूमिका की जांच हो रही है। गुप्ता को आज बाद में कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है।


    रेस्टोरेंट का हिस्सा गिराया गया

    जिला प्रशासन ने वागाटोर में स्थित रोमियो लेन रेस्टोरेंट के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। यह रेस्टोरेंट भी गौरव और सौरभ लूथरा के स्वामित्व में है। कार्रवाई अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई।


    घटना की जांच जारी

    ये घटनाक्रम तब सामने आए हैं जब रविवार तड़के लगी भीषण आग से:

    • 25 लोगों की मौत
    • कई घायल
    • भारी संपत्ति नुकसान

    गोवा सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष समिति का गठन किया है।

  • INDIGO FLIGHT: इंडिगो संकट पर कोर्ट नाराज़: “जिम्मेदारी कौन लेगा?”

    INDIGO FLIGHT: इंडिगो संकट पर कोर्ट नाराज़: “जिम्मेदारी कौन लेगा?”

    नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को इंडिगो एयरलाइन द्वारा बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द किए जाने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई, जिसे अदालत ने “संकट” करार दिया। अदालत ने कहा कि न केवल यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ता है।

    मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने केंद्र से पूछा कि जब हज़ारों यात्री हवाई अड्डों पर फंसे हुए थे, तो अन्य एयरलाइंस टिकटों की कीमतें बढ़ाकर इस स्थिति का फायदा कैसे उठा सकती हैं?

    अदालत ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा का मामला नहीं, बल्कि यात्रियों के अधिकारों और आर्थिक नुकसान का मुद्दा भी है।


    कारण बताओ नोटिस जारी – सरकार का दावा

    केंद्र और निदेशालय महानिदेशक नागर विमानन (DGCA) की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि:

    • इंडिगो को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है
    • एयरलाइन ने लिखित रूप से खेद जताया है
    • संकट की स्थिति कई दिशानिर्देशों के उल्लंघन के कारण पैदा हुई
    • इसमें कर्मियों की उड़ान ड्यूटी घंटों से जुड़े नियम भी शामिल हैं

    सरकारी वकील ने कहा कि वर्तमान में कानूनी प्रावधान लागू किए जा रहे हैं और जांच जारी है।


    यात्रियों की मदद और रिफंड पर सुनवाई

    अदालत एक ऐसी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें मांग की गई है कि:

    • फंसे यात्रियों को तुरंत सहायता दी जाए
    • रद्द उड़ानों का पूरा रिफंड(Refund) मिले
    • भविष्य में इस तरह का संकट न हो इसके लिए नीति तैयार की जाए

    अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी(Responsibility) बढ़ जाती है, क्योंकि आम यात्री इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बनते हैं।


    आगे क्या?

    दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से विस्तृत जवाब मांगते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की। अदालत ने स्पष्ट कहा:

    “यह जानना ज़रूरी है कि इस स्थिति से निपटने की जिम्मेदारी कौन लेगा।”