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  • Government-Owned PEC Ltd Allegedly Duped of ₹631 Crore by  Soumit Ranjan Jena and His Wife: सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड को मोहन भागवत के फंटर सौमित रंजन जेना और उसकी पत्नी प्रीति ने लगाई 631 करोड़ की चपत

    Government-Owned PEC Ltd Allegedly Duped of ₹631 Crore by Soumit Ranjan Jena and His Wife: सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड को मोहन भागवत के फंटर सौमित रंजन जेना और उसकी पत्नी प्रीति ने लगाई 631 करोड़ की चपत

    PEC Limited कंपनी से सौमित ने चीन को लौह अयस्क की सप्लाई के लिए थे 348 करोड़, व्याज सहित हो गए 613 करोड़

    मुंबई। सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड से जुड़े 613 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय डागर ने जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है। डागर का दावा है कि उन्होंने इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन का अध्ययन कर कई महत्वपूर्ण बिंदु जांच एजेंसियों के समक्ष रखे हैं।
    डागर के अनुसार, वर्ष 2011-12 में पिसीज एक्सिम के मुंबई यूनिट के प्रोपराइटर सौमित जेना ने पीईसी लिमिटेड से चीन को लौह अयस्क निर्यात के लिए करीब 613 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। उनका आरोप है कि बाद में कंपनी की संरचना में बदलाव कर कुछ कर्मचारियों को पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक बनाया गया और जेना तथा उनकी पत्नी ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। डागर का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए ऋण की जिम्मेदारी नए निदेशकों वाली कंपनी पर डाल दी गई।
    डागर स्वयं पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के वित्त वर्ष 2011-12 के वैधानिक ऑडिटर थे। उनके खिलाफ गोवा में SPCC/10/2019 मामला दर्ज होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन पर सरस्वत को-ऑपरेटिव बैंक से लिए गए करीब 3 करोड़ रुपये के सुरक्षित ऋण को कंपनी की पुस्तकों में नहीं दिखाने का आरोप लगाया गया। डागर का कहना है कि उक्त ऋण वास्तव में पिसीज एक्सिम के प्रोपराइटर सौमित जेना की प्रोपराइटरी इकाई से संबंधित था और ऋण की राशि उसी खाते में दर्ज एवं बाद में चुकाई गई थी।
    डागर का कहना है कि इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने सरस्वत बैंक से संबंधित बैंक स्टेटमेंट हासिल करने का प्रयास किया, लेकिन बैंक ने उन्हें तीसरा पक्ष बताते हुए स्टेटमेंट उपलब्ध नहीं कराया। उनका आरोप है कि बैंक खाते और उसमें हुए लेन-देन की विस्तृत जांच होने पर 613 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय लेन-देन और धन के हस्तांतरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।


    उन्होंने SPCC/11/2019 और SPCC/12/2019 का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिसीज एक्सिम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में बाद में बनाए गए कुछ निदेशकों को भी मामले में आरोपी बनाया गया, जबकि उनकी भूमिका और नियुक्ति की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। डागर ने एक पूर्व कानूनी प्रबंधक की मौत का भी उल्लेख किया है और इस संबंध में जांच की मांग की है।
    डागर ने आरोप लगाया कि कथित घोटाले में निर्यात से प्राप्त धन के स्थानांतरण, नकद निकासी, कथित फर्जी कारोबार तथा दुबई स्थित खातों में धन भेजे जाने जैसे कई पहलुओं की जांच की जरूरत है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित एजेंसियों अथवा न्यायालय के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।


    उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में आरोपी बताए जा रहे सौमित जेना वर्ष 2018 में भारत से बाहर चला गया, उसकी इतनी पहुंच थी कि उसने अपने रसूख से दो दिन के अंदर अपना और अपनी पत्नी का पासपोर्ट रिन्यू कराकर नेपाल के रास्ते प्राईवेट जेट से दुबई चला गया. सीबीआई दावा करती है कि दुबई की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है लेकिन खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। इस कांड में मोहन भागवत का हाथ है और उनकी सह पर सौमित रंजन जेना वर्ष 2018 में सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड द्वारा दिए गए ऋण को गटकने में सफल हो सका।


    डागर ने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) से भी इस मामले के लेखांकन पक्ष पर विशेषज्ञ राय देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि 3 करोड़ रुपये के बैंक ऋण की वास्तविक प्रकृति और उधारकर्ता की स्थिति स्पष्ट हो जाती है तो उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही के महत्वपूर्ण पहलुओं का समाधान हो सकता है।
    उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग, सीबीआई और अन्य संस्थानों को शिकायतें भेजे जाने का भी दावा किया है। डागर का आरोप है कि वर्ष 2022 में उनसे मामला समाप्त कराने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। इस आरोप की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
    डागर का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वह इस मामले में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें दो बार जान से मारने की धमकी भी मिली है। उनका कहना है कि इतने बड़े सरकारी वित्तीय मामले में केवल आरोपियों की पहचान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बैंकिंग लेन-देन, निर्यात प्राप्तियों और धन के अंतिम उपयोग का फॉरेंसिक ऑडिट कर वास्तविक लाभार्थियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
    उन्होंने केंद्र सरकार, सीबीआई, संबंधित न्यायिक संस्थाओं और वित्तीय नियामक एजेंसियों से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने के लिए शिकायत की गई है तथा यदि सरकारी धन की हेराफेरी प्रमाणित होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

    पीईसी लिमिटेड 613 करोड़ रुपये का वित्तीय घोटाला

    • घोटाले का स्वरूप: वर्ष 2011-12 में ‘पिसीज एक्सिम’ के मुंबई यूनिट के प्रोपराइटर सौमित जेना द्वारा सरकारी कंपनी पीईसी लिमिटेड से चीन को लौह अयस्क निर्यात के नाम पर लगभग 613 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था।
    • कंपनी संरचना में बदलाव का आरोप: आरोप है कि बाद में कंपनी की संरचना बदलकर कुछ अन्य कर्मचारियों को ‘पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड’ का निदेशक बना दिया गया, जबकि जेना और उनकी पत्नी ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। इस प्रक्रिया के जरिए ऋण की देयता नई कंपनी पर डाले जाने का दावा किया गया है।
    • फॉरेंसिक ऑडिट और निष्पक्ष जांच की मांग: मामले के वित्तीय लेन-देन, निर्यात प्राप्तियों, धन के अंतिम उपयोग, दुबई स्थित खातों में धन ट्रांसफर और नकद निकासी की गहराई से फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है।

    चार्टर्ड अकाउंटेंट विजय डागर के दावे और पक्ष

    • वैधानिक ऑडिटर की भूमिका: विजय डागर वर्ष 2011-12 के दौरान पिसीज एक्सिम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के वैधानिक ऑडिटर थे।
    • गोवा मामला (SPCC/10/2019): डागर पर सरस्वत को-ऑपरेटिव बैंक से लिए गए लगभग 3 करोड़ रुपये के सुरक्षित ऋण को कंपनी की पुस्तकों में नहीं दिखाने का आरोप है। डागर का स्पष्ट कहना है कि यह ऋण सौमित जेना की प्रोपराइटरी इकाई से संबंधित था और उसी खाते में दर्ज एवं चुकाया गया था।
    • अन्य मामले: डागर ने SPCC/11/2019 और SPCC/12/2019 का हवाला देते हुए बाद के निदेशकों की भूमिका और नियुक्ति की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही, उन्होंने एक पूर्व कानूनी प्रबंधक की संदिग्ध मौत की जांच की भी मांग उठाई है।
    • संस्थानों से अपील: डागर ने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) से इस मामले के लेखांकन पक्ष पर विशेषज्ञ राय देने का आग्रह किया है।
    • सुरक्षा और धमकियां: डागर का दावा है कि वह लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें दो बार जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2022 में मामला समाप्त करने के एवज में रिश्वत मांगे जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

    एजेंसियों और सरकार से मांग

    • प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई जैसी प्रमुख संस्थाओं को शिकायतें भेजी गई हैं।
  • Barahsingha Movie Release:मुंबई में रिलीज़ होते ही छाई ‘बारहसिंगा’

    Barahsingha Movie Release:मुंबई में रिलीज़ होते ही छाई ‘बारहसिंगा’

    पिता के संघर्ष, पारिवारिक मूल्यों और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती सशक्त फिल्म

    मुंबई। एमबी मीडिया वर्क्स (MB Media Works) के बैनर तले निर्मित हिंदी फीचर फिल्म “बारहसिंगा” मुंबई में रिलीज़ होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। पारिवारिक मूल्यों, पिता के त्याग, संघर्ष, सपनों और सामाजिक व्यवस्था की सच्चाई को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करने वाली इस फिल्म को सिनेमाघरों में दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। कहानी, निर्देशन, अभिनय और संगीत की हर वर्ग के दर्शक सराहना कर रहे हैं।

    फिल्म के निर्माता आर. एस. शर्मा तथा निर्देशक राजीव रंजन दास हैं। फिल्म एक ऐसे संघर्षशील पिता की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है, जो आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपने परिवार और बेटे के सपनों को साकार करने के लिए हर मुश्किल का सामना करता है। फिल्म यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, ईमानदारी, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

    फिल्म केवल पारिवारिक भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में फैले भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और आम नागरिकों के संघर्ष को भी प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है। बैंक और पुलिस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ फिल्म बेबाकी से सवाल उठाती है और यह संदेश देती है कि अंततः सत्य और न्याय की ही जीत होती है।

    फिल्म में अनिल रस्तोगी, राजेश शर्मा, सुषमा मिश्रा, भावेश बाबानी, मुस्कान मुलचंदानी, रोशनी तिवारी, प्रकाश चौहान, धर्मेश तरैया, किशोर भानुशाली, प्रकाश शुक्ला, आलोक कपूर, एम. डी. अली पारा, प्रियंका खेमानी, दिनेश कृपालानी, भगवान असवानी, हितेश शर्मा और नीरज शर्मा ने अपने दमदार अभिनय से प्रत्येक किरदार को जीवंत बना दिया है।

    फिल्म का संगीत राजीव–मोना, प्रकाश चौहान और अनुश्री जैन ने तैयार किया है, जबकि सचिन दास ने संगीत संयोजन (अरेंजर) की जिम्मेदारी निभाई है। फिल्म के गीतों को प्रकाश चौहान, राजेश तिवारी, बुद्धा आदित्य और आंचल ने अपनी मधुर आवाज़ से और अधिक प्रभावशाली बनाया है।

    प्रीमियर शो में अतिथियों ने की फिल्म की जमकर तारीफ

    फिल्म के प्रीमियर शो में लॉयर गिरीश मिश्रा, राष्ट्रीय स्वाभिमान के संपादक अश्विनीकुमार दुबे, कुर्ला के समाजसेवी एवं व्यवसायी दीनदयाल राय, सिविल कॉन्ट्रैक्टर राजेश चौहान, Zen 10 News के सर्वेसर्वा राजहंस मौर्य तथा तुषार मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    प्रीमियर के बाद सभी अतिथियों ने फिल्म की कहानी, निर्देशन और सामाजिक संदेश की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

    लॉयर गिरीश मिश्रा ने कहा, “बारहसिंगा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली एक प्रेरणादायी फिल्म है। इसमें परिवार, संघर्ष और न्याय की भावना को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।”

    संपादक अश्विनीकुमार दुबे ने कहा, “आज के दौर में ऐसी सार्थक फिल्मों का निर्माण बेहद आवश्यक है। ‘बारहसिंगा’ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी ऐसी फिल्म है, जिसे हर परिवार को अवश्य देखना चाहिए।”

    समाजसेवी एवं व्यवसायी दीनदयाल राय ने कहा, “फिल्म भावनात्मक रूप से दर्शकों को जोड़ती है और परिवार के प्रति जिम्मेदारी तथा ईमानदारी का मजबूत संदेश देती है। यह हर वर्ग के दर्शकों को पसंद आएगी।”

    सिविल कॉन्ट्रैक्टर राजेश चौहान ने कहा, “निर्देशक राजीव रंजन दास ने एक संवेदनशील विषय को बेहद सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है। फिल्म शुरू से अंत तक दर्शकों को बांधे रखती है।”

    Zen 10 News के प्रमुख राजहंस मौर्य ने कहा, “बारहसिंगा एक ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन के साथ समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी गंभीर सवाल उठाती है। यह निश्चित रूप से दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाएगी।”

    तुषार मिश्रा ने कहा, “फिल्म की कहानी, अभिनय, संगीत और भावनात्मक प्रस्तुति उत्कृष्ट है। यह फिल्म समाज को सकारात्मक सोच और संघर्ष की प्रेरणा देती है।”

    “बारहसिंगा” मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक चेतना का संदेश देने वाली एक सशक्त फिल्म बनकर उभरी है। निर्माता आर. एस. शर्मा, निर्देशक राजीव रंजन दास और एमबी मीडिया वर्क्स की पूरी टीम ने एक ऐसी फिल्म प्रस्तुत की है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी देती है।

  • El-Nino Impact Pacific Ocean Temperature rise India Monsoon warning: अल नीनो का बढ़ता असर! प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रहा तापमान, भारत के मानसून पर मंडरा रहा खतरा

    El-Nino Impact Pacific Ocean Temperature rise India Monsoon warning: अल नीनो का बढ़ता असर! प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रहा तापमान, भारत के मानसून पर मंडरा रहा खतरा

    नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलवायु क्षेत्रों में से एक ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है। अमेरिकी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के समुद्री सतह तापमान के ताजा आंकड़ों से संकेत मिले हैं कि वर्ष 2026 में प्रशांत महासागर के नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान पिछले साल की तुलना में काफी अधिक दर्ज किया गया है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार नीनो 3.4 क्षेत्र मध्य प्रशांत महासागर का वह हिस्सा है, जहां समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव के आधार पर अल नीनो और ला नीना जैसी वैश्विक जलवायु घटनाओं की निगरानी की जाती है।

    2026 में समुद्र का तापमान 2025 से काफी अधिक (El-Nino Impact Pacific Ocean Temperature rise)

    NOAA के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 4 जुलाई 2026 के बीच नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान लगातार वर्ष 2025 की इसी अवधि से अधिक रहा।

    • 1 जून 2026: तापमान 28.90 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
    • 4 जुलाई 2026: तापमान बढ़कर 29.23 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।

    वहीं, वर्ष 2025 में इसी अवधि के दौरान तापमान 27.84 डिग्री सेल्सियस से घटकर 27.59 डिग्री सेल्सियस तक आ गया था।

    आंकड़ों के अनुसार 2026 में 1 जून को तापमान का अंतर 1.06 डिग्री सेल्सियस था, जो 4 जुलाई तक बढ़कर 1.64 डिग्री सेल्सियस हो गया। यानी करीब 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    लगातार 29 डिग्री से ऊपर तापमान वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय

    2026 में नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान लगातार 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। वैज्ञानिक इसे गंभीर संकेत मान रहे हैं, क्योंकि गर्म समुद्री सतह वातावरण में अधिक गर्मी और नमी छोड़ती है।

    इसका असर केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दुनिया के कई हिस्सों में:

    • बारिश के पैटर्न,
    • हवा के प्रवाह,
    • मानसून प्रणाली,
    • सूखे और गर्मी की स्थिति

    को प्रभावित कर सकता है।

    इस साल 19 जून को नीनो 3.4 क्षेत्र का अधिकतम तापमान 29.41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 1 जून को 28.90 डिग्री सेल्सियस रहा।

    भारत के मानसून पर पड़ सकता है असर

    प्रशांत महासागर में बढ़ता तापमान भारत के लिए चिंता का कारण बन सकता है। भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है। मानसून देश की सालाना बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराता है।

    अल नीनो की स्थिति मजबूत होने पर अक्सर भारत में:

    • सामान्य से कम बारिश,
    • लंबे समय तक गर्मी,
    • सूखे जैसे हालात,
    • बारिश के असमान वितरण

    का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पर केवल अल नीनो का ही असर नहीं पड़ता। इंडियन ओशन डाइपोल (IOD), स्थानीय मौसम प्रणालियां और अन्य समुद्री परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    IMD ने जुलाई में कम बारिश का जताया अनुमान

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही जुलाई महीने में सामान्य से कम बारिश की संभावना जता चुका है। विभाग के अनुसार इक्वेटोरियल पैसिफिक क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति मजबूत हो रही है।

    यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब भारत ने 1901 के बाद से जून महीने में सबसे कम बारिश वाले वर्षों में से एक का अनुभव किया है। कई राज्यों में मानसून की रफ्तार धीमी रही, जिसके कारण:

    • खेती प्रभावित हुई,
    • जलाशयों में पानी की कमी बढ़ी,
    • गर्मी का असर लंबे समय तक बना रहा।

    सरकार ने तैयारियों के दिए निर्देश

    मानसून की संभावित कमी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबंधित मंत्रालयों को आकस्मिक योजनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

    सरकार का फोकस खास तौर पर:

    • कृषि क्षेत्र को राहत,
    • जल प्रबंधन,
    • सूखा प्रभावित क्षेत्रों की तैयारी,
    • आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता

    पर है।

    विशेषज्ञों की नजर अब प्रशांत महासागर पर

    जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में प्रशांत महासागर के तापमान का रुख भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों के मौसम को प्रभावित कर सकता है। यदि अल नीनो का प्रभाव और मजबूत होता है, तो मानसून की स्थिति पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

    फिलहाल वैज्ञानिक समुद्र के तापमान, वायुमंडलीय बदलाव और मानसूनी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

  • Monsoon Alert (Heavy Rain in 13 States): 13 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट; अगले 12 घंटे कई इलाकों के लिए बेहद अहम

    Monsoon Alert (Heavy Rain in 13 States): 13 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट; अगले 12 घंटे कई इलाकों के लिए बेहद अहम

    नई दिल्ली: देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। भारत मौसम विभाग (IMD) ने 8 जुलाई के लिए मौसम का नया अलर्ट जारी करते हुए उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी है।

    मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में तेज हवाओं की रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी संभावना जताई गई है। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

    13 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट(Heavy Rain in 13 States)

    IMD ने 8 जुलाई को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

    इन राज्यों के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। किसानों, मछुआरों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली में तेज बारिश और 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा की संभावना

    राजधानी दिल्ली में बुधवार को तेज बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक बारिश के दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

    दिल्ली में अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम विभाग ने भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है।

    अलर्ट वाले प्रमुख जिलों में मथुरा, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, झांसी, महोबा, हमीरपुर, ललितपुर, जालौन, अलीगढ़, कानपुर, अमरोहा, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और देवरिया शामिल हैं।

    इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    बिहार में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

    बिहार के कई जिलों में मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें पटना, गया, सारण, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, अररिया, किशनगंज और बेगूसराय शामिल हैं।

    यहां तेज हवाओं की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पटना में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मौसम बिगड़ने के संकेत

    झारखंड के रांची, दुमका, देवघर, हजारीबाग, पलामू, गढ़वा, लातेहार और खूंटी समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। यहां हवा की गति 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है।

    वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, हुगली, मालदा, नादिया, दार्जिलिंग, उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना, कूचबिहार और पूर्व मेदिनीपुर में भी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है।

    पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का खतरा

    उत्तराखंड में पिथौरागढ़, नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी, हरिद्वार, चमोली और ऋषिकेश समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। यहां तेज हवाएं 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं।

    हिमाचल प्रदेश के शिमला, सोलन, कुल्लू, ऊना, कांगड़ा, चंबा और किन्नौर में भी बारिश और तेज हवाओं की संभावना है।

    जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर, जम्मू, राजौरी, अनंतनाग, पुंछ और कुलगाम सहित कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने का अनुमान जताया गया है।

    राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी बारिश का दौर जारी

    राजस्थान के जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, जैसलमेर, अलवर, जोधपुर और डूंगरपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। यहां हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है।

    मध्य प्रदेश में भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सतना, रीवा, विदिशा, बालाघाट, सिवनी, देवास और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    प्रशासन ने जारी की सावधानी बरतने की अपील

    मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि बिजली चमकने और तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें। पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर निर्माण वाले स्थानों के पास खड़े होने से बचें। मानसून के इस सक्रिय दौर में अगले कुछ घंटे कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • भारत-चीन के बीच संतुलन पर बोले न्यूजीलैंड के PM लक्सन, कहा- ‘जहां सहयोग संभव हो, वहां करें, मतभेदों को समझदारी से संभालें’

    भारत-चीन के बीच संतुलन पर बोले न्यूजीलैंड के PM लक्सन, कहा- ‘जहां सहयोग संभव हो, वहां करें, मतभेदों को समझदारी से संभालें’

    पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से पहले क्रिस्टोफर लक्सन का बड़ा बयान, खालिस्तान पर भी अपनाया सख्त रुख

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से पहले वहां के प्रधानमंत्री Christopher Luxon (क्रिस्टोफर लक्सन) ने भारत, चीन और वैश्विक कूटनीति को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ संबंधों का आधार व्यावहारिक सहयोग और स्पष्ट संवाद होना चाहिए। जहां सहयोग की संभावना हो, वहां साथ काम किया जाए और जहां मतभेद हों, उन्हें स्वीकार कर समझदारी से संभाला जाए।

    न्यूज18 को दिए एक इंटरव्यू में लक्सन ने भारत और चीन के बीच संतुलन बनाने के सवाल पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध किसी भी सामान्य रिश्ते की तरह होते हैं। उन्होंने कहा कि देशों को उन क्षेत्रों में सहयोग करना चाहिए जहां साझा हित हों, जबकि मतभेद वाले मुद्दों पर खुलकर बातचीत और समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

    अमेरिका का उदाहरण देकर समझाया संतुलन

    लक्सन ने कहा कि न्यूजीलैंड के United States के साथ गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, लेकिन टैरिफ जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद भी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यूजीलैंड उच्च आयात शुल्क (हाई टैरिफ) की नीति का समर्थक नहीं है और मुक्त व्यापार को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभकारी मानता है।

    चीन के साथ रिश्तों पर क्या बोले?

    China के साथ संबंधों पर लक्सन ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग जारी है, लेकिन इतिहास, राजनीतिक व्यवस्था और कई नीतिगत मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन मतभेदों को टकराव में बदलने के बजाय स्पष्टता, ईमानदारी और संवाद के जरिए संभालना ही सबसे बेहतर तरीका है।

    उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड अपने समान विचारधारा वाले साझेदार देशों के साथ मिलकर हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और मूल्यों को प्राथमिकता देगा।

    पीएम मोदी के दौरे से पहले अहम संदेश

    प्रधानमंत्री Narendra Modi तीन देशों की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं, जिसमें न्यूजीलैंड भी शामिल है। इस यात्रा को भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई मजबूती देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लक्सन के बयान को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    खालिस्तान पर अपनाया सख्त रुख

    इंटरव्यू के दौरान लक्सन ने खालिस्तान समर्थक गतिविधियों पर भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि खालिस्तान से जुड़ी गतिविधियों ने भारत को काफी नुकसान पहुंचाया है और न्यूजीलैंड किसी भी प्रकार की धमकी, हिंसा या डराने-धमकाने वाली गतिविधियों को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा।

    उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को मिलेगा नया आयाम

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित न्यूजीलैंड यात्रा व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है। लक्सन का बयान यह संकेत देता है कि न्यूजीलैंड भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है।

  • Israel-Hezbollah Ceasefire: इजरायल और हिज्बुल्लाह युद्धविराम को फिर से लागू करने पर सहमत हुए!

    Israel-Hezbollah Ceasefire: इजरायल और हिज्बुल्लाह युद्धविराम को फिर से लागू करने पर सहमत हुए!

    Israel-Hezbollah Ceasefire: इजरायल और हिज्बुल्लाह एक भीषण संघर्ष के बाद शुक्रवार को एक बार फिर युद्धविराम को लागू करने पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि यह युद्धविराम स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे शुरू होने की उम्मीद थी और इसमें अमेरिका व कतर ने मध्यस्थता की है।

    वहीं एक अन्य राजनयिक सूत्र ने बताया कि इस समझौते में कतर, अमेरिका और ईरान ने मिलकर मध्यस्थता की थी। हालांकि, इजरायली सेना के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार दोपहर को एक बैठक के दौरान इस युद्धविराम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इजरायल की लेबनान में की गयी कड़ी कार्रवाई के कारण स्विटरलैंड में अमेरिका और ईरान में समझौते को लेकर आगे होने वाली बातचीत टल गयी थी।

    इससे ईरान और अमेरिका में हुए समझौते पर आशंकाओं के बादल छाने लगे थे। मगर अब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम का संकेत मिलने से एक बार फिर समझौते के सही दिशा में जाने की उम्मीद बंधी है। गौरतलब है कि हिज्बुल्लाह द्वारा लेबनान के दक्षिणी हिस्से में चार इजरायली सैनिकों को मार दिए जाने के बाद, इजरायली सेना ने शुक्रवार को लेबनान में नए सिरे से भीषण हमले किए थे, जिसमें कम से कम 21 लोग मारे गए थे।

    ईरान ने तुरंत इजरायल की इस बमबारी की कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ उसका कोई भी समझौता लेबनान में युद्धविराम पर ही निर्भर है। उसने दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित शुरुआती समझौते की पहली शर्त का हवाला दिया। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में तेहरान के साथ होने वाली निर्धारित बातचीत को टाल दिया।

    वेंस ने लेबनान में इजरायल के हमलों की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे यह मुश्किल बातचीत खतरे में पड़ गई है। उधर संघर्ष विराम के लागू होने की खबरों के बीच इजरायली सेना ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में कार्रवाई की ‘पूरी आजादी’ बरकरार है। इजरायली मीडिया द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार सेना के प्रवक्ता ने कहा, “हम मौजूदा राजनीतिक निर्देशों के अनुसार काम करना जारी रखेंगे। जब तक वे निर्देश नहीं बदलते, हम उसी के अनुसार अपना अभियान चलाते रहेंगे।”

    इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि हिज्बुल्लाह के साथ युद्धविराम के बावजूद, इजरायली सैनिकों के पास दक्षिणी लेबनान में किसी भी खतरे के खिलाफ कार्रवाई करने की “पूरी आजादी” है। उन्होंने कहा कि सैनिक अब भी कुछ पहाड़ी इलाकों और पुराने किलों के पास काम कर रहे हैं, ताकि हिज्बुल्लाह के उन बड़े सुरंग तंत्रों को नष्ट किया जा सके जो इस सशस्त्र समूह के “मुख्य कमान केंद्र” के रूप में काम करते हैं।

    डेफ्रिन ने कहा, “हमारी सेनाओं को इन बुनियादी ढांचों को पूरी तरह नष्ट करने से रोकने के लिए हिज्बुल्लाह यह रक्षात्मक लड़ाई लड़ रहा है।” उन्होंने कहा, “हिज्बुल्लाह ने ही युद्धविराम का उल्लंघन किया है। वह उन क्षमताओं को बचाने की कोशिश कर रहा है जो उसने सालों में बनाई हैं।”

  • Iran Economy After US Deal: अमेरिका के साथ समझौता ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त नहीं, बोले विशेषज्ञ

    Iran Economy After US Deal: अमेरिका के साथ समझौता ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त नहीं, बोले विशेषज्ञ

    Iran Economy After US Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से प्रतिबंधों में संभावित राहत, जब्त विदेशी परिसंपत्तियों तक पहुंच और तेल निर्यात में वृद्धि की उम्मीदें जरूर जगी हैं, लेकिन ईरानी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल कूटनीतिक प्रगति से देश की गहरी आर्थिक चुनौतियों का समाधान नहीं होगा।

    समझौते में 60 दिनों की वार्ता अवधि, होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने की दिशा में कदम, ईरानी तेल निर्यात पर अमेरिकी छूट और प्रतिबंधों व जब्त संपत्तियों पर चर्चा का प्रावधान शामिल है। इन संभावनाओं से ईरानी मुद्रा को मजबूती मिलने, महंगाई घटने और आम लोगों की जीवन स्थितियों में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

    हालांकि, विशेषज्ञों ने इन उम्मीदों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। ईरान के पूर्व केंद्रीय बैंक उप-गवर्नर हैदर मोस्तख्देमीन-हुसैनी ने कहा कि समझौता आर्थिक सुधार के लिए आवश्यक शर्त हो सकता है, लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है।

    विशेषज्ञों के अनुसार समझौते से मिलने वाले अधिकांश आर्थिक लाभ कई शर्तों और भविष्य की वार्ताओं की प्रगति पर निर्भर करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों में स्वतः राहत, जब्त धनराशि की तत्काल वापसी या ईरान को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी।

    समझौते के तहत प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यक्रम को भी प्रत्यक्ष अमेरिकी सहायता के बजाय तीसरे देशों और निजी निवेशकों की संभावित भागीदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिका ईरान को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराएगा।

    ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती ने कहा कि समझौते में परिसंपत्तियों की रिहाई से जुड़े अमेरिकी दायित्वों का उल्लेख जरूर है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईरान की समस्याएं केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं हैं। बजट घाटा, मुद्रा आपूर्ति में तेज वृद्धि, बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरियां, कम उत्पादकता, ऊर्जा संकट, निवेश की कमी और तकनीकी पिछड़ापन जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

    अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अली गनबरी ने कहा कि यह मान लेना उचित नहीं होगा कि किसी प्रारंभिक समझौते से ईरान की सभी आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि स्थायी आर्थिक विकास के लिए व्यापक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।

    ईरान फिलहाल 80 प्रतिशत से अधिक वार्षिक मुद्रास्फीति का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया समझौता तेल निर्यात बढ़ाने और विदेशी राजस्व तक पहुंच आसान बनाने में मददगार हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए घरेलू सुधारों को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।

  • Sri Lanka’s DNA Revealed: श्रीलंका के डीएनए में छिपे 57,000 साल पुराने मानव सफर खुलासा!

    Sri Lanka’s DNA Revealed: श्रीलंका के डीएनए में छिपे 57,000 साल पुराने मानव सफर खुलासा!

    Sri Lanka’s DNA Revealed: क्या आधुनिक मानव ने अफ्रीका से निकलकर पूरी दुनिया में पैर पसारने के लिए समुद्र के किनारों को अपना रास्ता बनाया था। दशकों से वैज्ञानिक इस गुत्थी को सुलझाने में लगे थे। अब, प्लॉस वन जर्नल में प्रकाशित एक व्यापक जेनेटिक अध्ययन ने न केवल इस सवाल का जवाब दिया है, बल्कि श्रीलंका को मानव इतिहास के ‘प्रवेश द्वार’ के रूप में स्थापित कर दिया है।

    काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और कोलंबो विश्वविद्यालय समेत विश्व भर के पांच संस्थानों के 16 शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस संयुक्त अध्ययन में श्रीलंका के तीन प्रमुख समुदायों सिंहली, श्रीलंकाई तमिल और वेद्दा के पूर्वजों का विस्तृत डीएनए विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं ने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का सहारा लिया, जो केवल माँ से संतान में जाता है और हजारों वर्ष पुरानी वंशावली का पता लगाने में मदद करता है।

    शोध की प्रथम लेखिका श्रीलंका की डॉ. अंजना वेलिकला ने बताया कि इस अध्ययन में 139 नए जीनोम सीक्वेंस किए गए और उन्हें दुनिया भर के 247 वैश्विक डेटासेट्स के साथ मिलाकर विश्लेषण किया गया। यह अब तक इस क्षेत्र का सबसे बड़ा जेनेटिक अध्ययन है। ‘टाइम मशीन’ बना डीएनए, दक्षिणी मार्ग की पहेली सुलझी और पता लगा कि श्रीलंका चार चरणों में बसा।

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    प्रमुख शोधकर्ता और जीन विज्ञानी डॉ. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि वैज्ञानिक लंबे समय से इस बहस में थे कि आधुनिक मानव अफ्रीका से निकलकर ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया तक कैसे पहुँचा। दो संभावित रास्ते थे ‘इनलैंड रूट’ (जमीनी रास्ता) और ‘कोस्टल रूट’ (समुद्री किनारा)। श्रीलंका के जेनेटिक डेटा ने ‘कोस्टल रूट’ की पुष्टि की है।

    लगभग 57,000 साल पहले अफ्रीका से निकले शुरुआती आधुनिक मानवों का एक समूह हिंद महासागर के तटों के सहारे श्रीलंका पहुँचा। उस समय समुद्र का स्तर आज से काफी कम था, जिस कारण भारत और श्रीलंका के बीच ‘लैंड ब्रिज’ (जमीनी पुल) मौजूद था। शोधकर्ताओं ने श्रीलंका में मानव बसावट की कहानी को चार प्रमुख कालखंडों में विभाजित किया है। प्रथम चरण (57,000 साल पहले): आधुनिक मानव की दक्षिण एशिया में पहली बसावट।

    श्रीलंका की फह-हिएन लेना और बटाडोम्बा-लेना गुफाओं में मिले 40,000 वर्ष पुराने अवशेष भी इसी यात्रा की पुष्टि करते हैं। ऐतिहासिक काल (7,000 साल से कम): खेती-बाड़ी और व्यापार के विस्तार से भारत-श्रीलंका के बीच आबादी का आदान-प्रदान बढ़ा। आधुनिक प्रवासन युग: व्यापारिक जहाजों और विदेशी आक्रमणों के कारण नए जेनेटिक मिश्रण बने।

    शोध में श्रीलंका के आदिवासी वेद्दा समुदाय पर भी रोशनी डाली गई है। वेद्दा लोग सीधे उन प्राचीन मेसोलिथिक शिकारी-संग्राहकों के वंशज हैं जो सबसे पहले श्रीलंका में बसे थे। उनके डीएनए में ‘फाउंडर इफेक्ट’ स्पष्ट दिखता है। हजारों वर्षों तक बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहने के कारण उनका जेनेटिक पूल प्राचीन बना रहा है, हालांकि उनकी आबादी तेजी से घट रही है।

    अध्ययन से यह भी पता चला है कि श्रीलंका में ‘वेस्ट यूरेशियन’ जीन (जैसे हेप्लोग्रुप यू7 और एच13) सीधे नहीं, बल्कि भारत के माध्यम से आए। शोध से स्पष्ट हुआ है कि भले ही सिंहली और तमिल समुदायों की भाषा व संस्कृति अलग हो, लेकिन उनका जेनेटिक आधार काफी हद तक समान है। दोनों समूहों में दक्षिण भारतीय आबादी का गहरा प्रभाव देखा गया है। यह अध्ययन मानव प्रवासन के इतिहास को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

  • US Iran Tension 2026: ट्रंप का ईरान को आखिरी अल्टीमेटम, बोले- “समझौता करो या कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहो”

    US Iran Tension 2026: ट्रंप का ईरान को आखिरी अल्टीमेटम, बोले- “समझौता करो या कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहो”

    अमेरिका-ईरान वार्ता अंतिम चरण में, ट्रंप बोले- जरूरत पड़ी तो उठाएंगे “कठोर कदम”; ईरान ने कहा- दबाव में नहीं झुकेंगे

    वॉशिंगटन / तेहरान: अमेरका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि या तो तेहरान अमेरिका के साथ समझौता कर ले, या फिर “कठोर कदमों” के लिए तैयार रहे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है।बुधवार को जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, “हम ईरान के साथ बातचीत के अंतिम चरण में हैं। देखते हैं क्या होता है। या तो वे समझौता कर लेंगे या हम कुछ ऐसे कदम उठाएंगे जो थोड़े कठोर होंगे।”हालांकि ट्रंप ने उम्मीद जताई कि मामला युद्ध तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

    नेतन्याहू की खुलकर तारीफ

    इस दौरान ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू वही करेंगे जो वे उनसे करवाना चाहेंगे और इजरायल में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं हो रहा है।ट्रंप ने कहा, “वे बहुत अच्छे इंसान हैं। यह मत भूलिए कि वे युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि इजरायल में उनका समर्थन इतना ज्यादा है कि वे वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव भी लड़ सकते हैं।

    युद्धों का जिक्र कर ट्रंप ने दिया संदेश

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक और कोरिया युद्धों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक कई युद्धों में शामिल रहा है, लेकिन ईरान के खिलाफ मौजूदा स्थिति को केवल तीन महीने हुए हैं और अधिकतर समय युद्धविराम जैसी स्थिति बनी रही।

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने पुराने युद्धों में लाखों सैनिक खोए हैं और वे नहीं चाहते कि हालात फिर उसी दिशा में जाएं।

    ईरान ने कहा- दबाव में नहीं झुकेंगेवहीं दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्रंप के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कूटनीति और आपसी सम्मान युद्ध से कहीं अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रास्ता है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ईरान ने हमेशा अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया है और युद्ध टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। हमारी ओर से सभी रास्ते खुले हैं। दबाव डालकर ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना केवल एक भ्रम है।”

    (US Iran Tension 2026)मध्य पूर्व में बढ़ सकती है चिंता

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होती है, तो मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी से वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • Upendra Dwivedi’s Warning to Pak: सेना प्रमुख की पाकिस्तान को दो टूक, आतंकवाद का समर्थन करेगा तो मिटा दिया जायेगा मानचित्र से!

    Upendra Dwivedi’s Warning to Pak: सेना प्रमुख की पाकिस्तान को दो टूक, आतंकवाद का समर्थन करेगा तो मिटा दिया जायेगा मानचित्र से!

    Upendra Dwivedi’s Warning to Pak: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को एक बार फिर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि उसे तय करना होगा कि वह विश्व मानचित्र पर अपनी पहचान बनाए रखना चाहता है या आतंकवादियों को आश्रय देने और भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधि जारी रखकर खुद को इतिहास से मिटाने का जोखिम लेना चाहता है।

    शनिवार को यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक संवाद सत्र में यह पूछे जाने पर कि अगर ऑपरेशन सिंदूर जैसी परिस्थितियां फिर से उत्पन्न होती हैं तो भारतीय सेना कैसा जवाब देगी, तो जनरल द्विवेदी ने दो टूक उत्तर देते हुए कहा, “अगर आपने पहले मेरी बातें सुनी हैं, तो मैंने कहा है कि पाकिस्तान अगर आतंकवादियों को पनाह देता रहा और भारत के खिलाफ गतिविधियां करता रहा, तो उसे तय करना होगा कि वह भौगोलिक मानचित्र का हिस्सा रहना चाहता है या इतिहास का।”

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    सेना प्रमुख की यह टिप्पणी भारत के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की ओर से एक मजबूत चेतावनी के रूप में देखी जा रही है जो यह संकेत देती है कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की सहनशीलता सीमित है और भविष्य में कोई भी भड़काने वाली कार्रवाई का निर्णायक जवाब दिया जायेगा।

    जनरल द्विवेदी ने पिछले वर्ष नवंबर में ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग’ को संबोधित करते हुए कहा था , “ऑपरेशन सिंदूर केवल एक ट्रेलर था, जो 88 घंटे में समाप्त हुआ। हम भविष्य में किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार हैं। अगर पाकिस्तान अवसर देगा, तो हम उसे यह सिखाएंगे कि पड़ोसी देश के साथ जिम्मेदारी से व्यवहार कैसे करना चाहिए।”

    ऑपरेशन सिंदूर के समय सैन्य संचालन महानिदेशक रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इस ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर कहा था कि भारत की सैन्य कार्रवाई के कारण पाकिस्तान को नियंत्रण रेखा पर भारी नुकसान उठाना पड़ा जिसके बाद उसे भारत के सामने संघर्षविराम की गुहार लगानी पड़ी।