Vande Mataram: वंदे मातरम् गीत के 150वें वर्ष पर जिलास्तरीय कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न

“वंदे मातरम्” गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को जिलास्तरीय कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी डॉ. इंदु राणी जाखड की अध्यक्षता में जिला नियोजन सभागार, जिलाधिकारी कार्यालय, पालघर में किया गया।

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राष्ट्रीय स्वाभिमान: अखिलेश चौबे
पालघर: “वंदे मातरम्” गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को जिलास्तरीय कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी डॉ. इंदु राणी जाखड की अध्यक्षता में जिला नियोजन सभागार, जिलाधिकारी कार्यालय, पालघर में किया गया।

कार्यक्रम में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे, पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख, अपर जिलाधिकारी भाऊसाहेब फटांगरे, अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे, निवासी उपजिल्हाधिकारी सुभाष भागडे, उपजिल्हाधिकारी रविंद्र राजपूत, उपजिल्हाधिकारी रणजीत देसाई, उपजिल्हाधिकारी (रोहयो) विजया जाधव, उपजिल्हाधिकारी तेजस चव्हाण सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, विद्यालयों एवं आईटीआई के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

अपने उद्बोधन में जिलाधिकारी डॉ. इंदु राणी जाखड ने कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इस गीत की प्रत्येक पंक्ति भारत की एकता, त्याग और मातृभूमि प्रेम की प्रेरणा देती है। यह गीत स्वतंत्रता की भावना का शक्तिस्रोत है।”

उन्होंने कहा कि अक्सर लोग ‘वंदे मातरम्’ के केवल प्रारंभिक शब्द जानते हैं, किंतु इसके पूर्ण अर्थ, इतिहास और भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया है।

डॉ. जाखड ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कांग्रेस अधिवेशन में प्रथम बार गाया, जबकि 1905 के बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन में यह गीत स्वतंत्रता का मुख्य प्रतीक बन गया।

उन्होंने आगे बताया कि मॅडम भिकाजी कामा ने जब विदेश में पहली बार तिरंगा ध्वज फहराया, तब उसी पर “वंदे मातरम्” अंकित था। 1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के निवेदन पर संविधान सभा ने इस गीत को राष्ट्रगान “जन गण मन” के समान सम्मान का दर्जा प्रदान किया।

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