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Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

अमेरिका–वेनेज़ुएला तनाव: ट्रंप का मादुरो को अल्टीमेटम
अमेरिका–वेनेज़ुएला तनाव: ट्रंप का मादुरो को अल्टीमेटम
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अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक फोन कॉल में साफ शब्दों में चेतावनी दी है—“अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे।”

जानकारी के मुताबिक यह बातचीत हाल ही में हुई, जिसमें ट्रंप ने मादुरो के शासन को “अवैध और दमनकारी” करार दिया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला की जनता “तानाशाही से मुक्ति चाहती है” और मादुरो को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना चाहिए ताकि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो सके।

हालांकि मादुरो सरकार ने इस कथित कॉल को “फर्जी” बताया है और कहा है कि विपक्ष तथा अमेरिकी राजनीति में चल रहे चुनावी माहौल का फायदा उठाने के लिए इस तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं। वेनेज़ुएलाई अधिकारियों ने कहा कि मादुरो “जनता के समर्थन” से चुने गए हैं और किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

ट्रंप और मादुरो के बीच संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप प्रशासन ने वेनेज़ुएला पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। अब इस नए विवाद से एक बार फिर लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कॉल वास्तव में हुई है, तो आने वाले दिनों में वेनेज़ुएला में राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, मादुरो सरकार ने देश में “स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने” का भरोसा दिलाया है।

शर्तों की वजह से अटका समाधान

सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान मादुरो ने दो प्रमुख मांगें रखीं:

  1. वैश्विक स्तर पर पूर्ण माफी, ताकि उन पर और उनकी टीम पर लगे सभी मौजूदा आरोप हट जाएं।
  2. वेनेज़ुएला की सेना पर उनका नियंत्रण बना रहे, चाहे भविष्य में देश में स्वतंत्र चुनाव ही क्यों न हों।

अमेरिका ने दोनों शर्तों को प categorically खारिज कर दिया और दोहराया कि मादुरो को “तुरंत पद छोड़ना चाहिए”। इसके बाद मादुरो प्रशासन ने बातचीत बहाल करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मादुरो शासन पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और सैन्य दबाव बनाती है।


कैरेबियन में बढ़ी हलचल

बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने न केवल अपने बयान कड़े किए, बल्कि अपनी सैन्य गतिविधियां भी तेज कर दीं। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिकी सैन्य अभियान कभी भी शुरू हो सकते हैं। इसके बाद कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों की गतिविधि अचानक बढ़ गई।

अमेरिका का आरोप है कि वेनेज़ुएला से निकलने वाली ड्रग तस्करी की वजह से अमेरिकी समाज में लगभग 1 लाख मौतें हुई हैं।
सीनेटर डेव मैकॉरमिक ने इसे “फेंटेनाइल, कोकीन और ओपिऑयड का युद्ध” बताते हुए मादुरो सरकार पर संकट बढ़ाने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, आलोचकों ने अमेरिकी कार्रवाई को एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल बताया है। कांग्रेस एक विवादित डबल-टैप हमले की जांच भी कर रही है, जिसने बहस को और गरमा दिया है।


जवाबी कदम और बढ़ता गतिरोध

अमेरिका द्वारा एयरस्पेस प्रतिबंध लगाने के बाद वेनेज़ुएला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई विदेशी एयरलाइनों के परिचालन अधिकार रद्द कर दिए। मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका की मौजूदा नीति “औपनिवेशिक आक्रामकता” जैसी है और वह कैरेबियन में तनाव बढ़ाकर वेनेज़ुएला को झुकाना चाहता है।

एयरस्पेस बंद होने का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है—

  • कई रूट बदले गए,
  • यात्रियों को घंटों अतिरिक्त समय लगा,
  • और एयरलाइंस को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संगठनों ने हालात पर चिंता जताई है और स्थिति को “गंभीर और अस्थिर करने वाली” बताया है।


आगे क्या?

अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्ते जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे विशेषज्ञों को आशंका है कि कैरेबियन क्षेत्र आने वाले हफ्तों में नई भू-राजनीतिक टकराहट का केंद्र बन सकता है।
अभी तक न तो कॉल की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही किसी पक्ष ने पीछे हटने के संकेत दिए हैं।

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