
बीएमसी में भाजपा की छह महिला पार्षदें रेस में, तेजस्वी घोसालकर बाहर
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद के लिए लॉटरी सिस्टम से आरक्षण तय होते ही राजनीतिक तस्वीर साफ हो गई है। इस बार मेयर की कुर्सी महिला आरक्षण में जाने के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदल गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर अब छह प्रमुख महिला पार्षदों के नामों पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है, जिन्हें इस प्रतिष्ठित पद का दावेदार माना जा रहा है।
लंबे समय से मेयर पद को लेकर जारी सस्पेंस उस वक्त खत्म हुआ जब आरक्षण प्रक्रिया में यह पद महिला के लिए सुरक्षित घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही भाजपा खेमे में संभावित नामों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम यह रहा कि चुनाव नतीजों के बाद से मेयर पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे तेजस्वी घोसालकर अब इस दौड़ से बाहर हो गए हैं। घोसालकर ने चुनाव से ठीक पहले अविभाजित शिवसेना छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और वार्ड नंबर 2 से जीत दर्ज की थी, लेकिन ताजा राजनीतिक समीकरणों में उनका नाम रेस से बाहर होना कई विश्लेषकों को हैरान कर रहा है।
भाजपा की ओर से ये छह नाम चर्चा में
महिला आरक्षण के बाद भाजपा में अब जिन छह महिला पार्षदों को मेयर पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है, उनमें से अलका केरकर (वार्ड 98): तीन बार की पार्षद और पूर्व उपमहापौर रह चुकी हैं। पार्टी के कोर ग्रुप में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
हर्षिता नार्वेकर (वार्ड 225): महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की रिश्तेदार होने के कारण राजनीतिक प्रभाव रखती हैं।
रितू तावडे (वार्ड 132): पार्टी नेतृत्व का भरोसा इस नाम पर भी माना जा रहा है।
राजश्री शिरवडकर (वार्ड 172): संगठन में सक्रिय भूमिका के चलते प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
शीतल गंभीर (वार्ड 190): हालिया जीत के बाद उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
आशा मराठे (वार्ड 152): जमीनी पकड़ और संगठनात्मक सक्रियता के कारण चर्चा में हैं।
महायुति की मजबूत स्थिति
बीएमसी चुनाव नतीजों में भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन महायुति ने शानदार प्रदर्शन किया है। 16 जनवरी को घोषित परिणामों में महायुति को कुल 118 सीटें मिलीं, जिनमें भाजपा के 89 और शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं। बहुमत का यह आंकड़ा भाजपा को मेयर पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने की मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट को 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
अब राजनीतिक हलकों की निगाहें दिल्ली और राज्य नेतृत्व पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इन छह महिला नामों में से किसके सिर पर मुंबई के मेयर का ताज सजता है।

