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नई दिल्ली/मुंबई: यूएस-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जिससे एलपीजी (LPG Cylinder) की सप्लाई पर भी असर पड़ा। भारत सरकार ने एलपीजी की घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दावा किया है कि घरेलू डिलीवरी सामान्य समय पर ही जारी रहेगी।

लेकिन वास्तविक स्थिति जनता के लिए भयावह बनी हुई है। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी और ऊँचे होलसेल दाम आम जनता को परेशान कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार बड़े कारोबारी और डीलर एलपीजी की उपलब्धता को नियंत्रित कर उसके दाम बढ़ा रहे हैं। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने में मुश्किल हो रही है, और सरकारी राहत की योजनाएं प्रभावी रूप से जमीन पर नहीं पहुंच पा रही हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एलपीजी की सुरक्षित सप्लाई और नए LNG कार्गो की व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि घरेलू सेक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है और नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर जैसे हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को भी जरूरत के अनुसार आवंटन किया जा रहा है। वहीं एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
सरकार का दावा है कि घरेलू डिलीवरी सामान्य रूप से 2.5 दिन में होगी, लेकिन जनता का कहना है कि होलसेल दामों और कालाबाजारी के कारण सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहा। BPCL, IOC और HPCL की संयुक्त समिति मांग और आवंटन की समीक्षा कर रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में लोग निजी डीलरों के बढ़ते दाम और काले बाजारी आपूर्ति से परेशान हैं।
केंद्रीय गृह सचिव ने राज्यों के डीजीपी और सचिवों से कहा है कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ। हालांकि जनता का अनुभव बताता है कि इस दिशा में कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के उपायों और अतिरिक्त LNG आयात के बावजूद स्थानीय डीलरों द्वारा किए जा रहे मनमाने दामों और कालाबाजारी पर नजर रखना बेहद जरूरी है, वरना आम जनता की परेशानी और बढ़ सकती है।
सरकार का दावा और जनता का अनुभव फिलहाल आमने-सामने हैं, और एलपीजी संकट को लेकर वास्तविक राहत जनता तक पहुँचने में देरी हो रही है।

