Story Time: चिपकाने की कला में माहिर महारथियों के जीवन में, सोशल मीडिया से हर वक्त बहार छाई रहती है। फेविकॉल से भी प्रगाढ़ जोड़ है इनका अपनी कला से, जो हर वक्त इसमें रमें रहते हैं। किसी के मुँह से बात निकली और लपककर पकड़ लिया। आनन-फानन ही चिपका आए किसी और महफ़िल में। मुँहजुबानी की तो बात छोड़िए, नाम, गाँव, पते के साथ लिखी बातों को भी ये मनमौजी आसानी से उड़ा ले जाते हैं।
चिपकाने की कला में समय कम लगता है परंतु मेहनत बहुत ज़्यादा है। पहले पढ़ो, निर्णय करो कि कैसे उठाना है और कहाँ चिपकाना है। गूगल बाबा ने सारी समस्याओं का हल समय रहते ही सोच लिया था। हर बात पर हामी भरने, विचार चिपकाने के लिए शब्दों की जगह इमोजी बना दिए। समय और माँग के अनुसार इनकी गुणवत्ता, संख्या, रूप में बदलाव मानो चिपकाने वाले कलाकारों के लिए वरदान साबित हो गई।
रचना, पोस्ट पढ़ने की भी जरूरत नहीं, उठाओ रंग-बिरंगे दिलों में से अपने पसंदीदा रंग का दिल और चिपका आओ। कहीं ठेंगा, कहीं ताली, कहीं नमस्कार का चमत्कार तो कहीं सुबह चाय की प्याली। चिपकाने में माहिर इन मनमौजियों को क्या लिखा है यह जानने उसी प्रकार इच्छा नहीं रहती जैसे कुछ को संसद में चलने वाले सत्र के विषय की।
इमोजी चिपकाने का मायाजाल इतना भाने लगा कि अब एक-दो शब्द लिखना भी इनके बस का रोग नहीं रहा। आपातकालीन स्थिति में दो शब्द लिखने की ज़रूरत पड़ी तो फिर बस, गूगल शरणम् गच्छामि का रास्ता अपना लिया। अब कुछ शुभ प्रभात, शुभरात्रि, शुभकामनाओं के संदेश चिपकाने वाले दल की बात करते हैं। प्रतिदिन सूर्योदय से पहले, निष्ठा के साथ उगते सूरज, मुस्कुराते सूरज, लालिमा लपेटे सूरज को अपने सभी मित्रों-अमित्रों को चिपकाकर ही, बिस्तर से बाहर आते हैं।
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विभिन्न रूपों के चाँद, घटते-बढ़ते, बादलों में छिपे, तारों संग चमकते चाँदों को जब-तक अपने सब कांटेक्ट में नहीं भेज देते, उनकी स्वयं की रात्रि शुभ नहीं होती। बधाई और शुभकामना शब्दों में न ढालकर रंग-बिरंगे, देशी-विदेशी फूल, गुलदस्ते चिपकाकर, कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेने वाले, इस चिपकाऊ गैंग की महिमा, शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।
चिपकाने के व्यापक तंत्र में दूसरों की कविताएं, रचनाएं अपनी दीवार पर चिपकाकर, बेसब्री से रंग-बिरंगे दिलों, फूलों और शाब्दिक शुभकामनाओं का इंतजार करते ये मनमौजी आसानी से देखे जा सकते हैं। इधर का संदेश उधर करने में माहिर इन तस्करों की तन्मयता, इन्हें पुरस्कार का पात्र बनाती है। काटने और चिपकाने में निष्ठा से लगे ये मनमौजी, साहित्य की आन-बान-शान हैं।
सारे अच्छे, संस्कारी संदेशों, सूक्तियों, तुकबंदियों का कॉपीराइट लिए यह दल, सक्रियता से अपने आपको साधारण मानव से श्रेष्ठ साबित करने में जुटा है। इमोजी, संदेश काटकर चिपकाने वाले इन कलाकारों ने सोशल मीडिया में अपना वर्चस्व बनाया है। सारे मुहावरे, सारी कहावतों को अपने बगल में दबाए, चिपकाओ और राज करो की प्रधानता वाले इन कलाकारों की हर तरफ जय-जयकार है। इंतज़ार है किसी मंच द्वारा, इस कला में पारंगत लोगों के लिए पुरस्कारों की, श्रेणीबद्ध घोषणा की जाए। अपनी जगह सुरक्षित रखने के लिए लेखक ने आज ही आवेदन कर दिया है।

शर्मिला चौहान

