Congress Flag Controversy: मुंबई के तिलक भवन में आयोजित कांग्रेस की राज्यस्तरीय रणनीति बैठक के दौरान एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान और संगठन मजबूती पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता अपनी लग्जरी गाड़ियों में पहुंचे, लेकिन अधिकांश वाहनों पर कांग्रेस का हाथ पंजा झंडा नजर नहीं आया। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी और निराशा देखी गई।
बैठक में हर्षवर्धन सपकाल, सुशिलकुमार शिंदे, विजय वडेट्टीवार, बालासाहब थोराट, नसीम खान समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक समय था जब कांग्रेस नेताओं की गाड़ियों पर पार्टी का झंडा गर्व के साथ लहराता था, लेकिन अब पार्टी कमजोर पड़ते ही नेताओं ने झंडे से दूरी बना ली है।
कई कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पार्टी के बड़े नेता ही कांग्रेस का झंडा लगाने में शर्म महसूस करेंगे, तो छोटे कार्यकर्ताओं का मनोबल कैसे बढ़ेगा। उनका कहना था कि भाजपा कार्यकर्ता सत्ता रहे या न रहे, अपनी गाड़ियों पर पार्टी का झंडा लगाकर गर्व महसूस करते हैं, जबकि कांग्रेस में स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
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कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि अगर पार्टी की पहचान और विचारधारा को सार्वजनिक रूप से दिखाने में ही नेताओं को संकोच हो रहा है, तो जनता के बीच संगठन कैसे मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि “जो दिखता है वही बिकता है” राजनीति में यह कहावत पूरी तरह लागू होती है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गाँधी को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। साथ ही पार्टी के सभी बड़े नेताओं और पदाधिकारियों के लिए अपनी गाड़ियों पर कांग्रेस का झंडा लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत हो और जनता के बीच पार्टी की मौजूदगी दिखाई दे।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि संगठन में यही स्थिति बनी रही तो महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना मुश्किल साबित हो सकता है।

