शिवसेना सांसद का तीखा हमला, वक्फ संशोधन, CAA-NRC, ट्रिपल तलाक और राष्ट्रीय मुद्दों पर उद्धव ठाकरे से पूछे कई सवाल
आर.एस. नेटवर्क | दिनेश चंद्र रावल
ठाणे | शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने रविवार को आयोजित पत्रकार परिषद में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता की राजनीति के लिए हिंदुत्व की मूल विचारधारा से समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा कि आज की UBT पहले वाली शिवसेना नहीं रही, बल्कि वह “उलेमा बचाओ टोली” बनकर रह गई है और लगातार मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
म्हस्के ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा हिंदुत्व और राष्ट्रहित के मुद्दों पर स्पष्ट, निडर और अडिग रहे, लेकिन उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर उनके विचारों से दूरी बना ली। उनका आरोप था कि 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को जनादेश मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार बनाकर हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता किया गया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर उद्धव ठाकरे का रुख बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से पूरी तरह अलग रहा। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), ट्रिपल तलाक और वक्फ संशोधन विधेयक जैसे विषयों पर उद्धव ठाकरे ने ऐसा रुख अपनाया, जो उनके अनुसार हिंदुत्व और राष्ट्रहित के विपरीत था।
सांसद म्हस्के ने आरोप लगाया कि वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध कर उद्धव ठाकरे ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में वक्फ संपत्तियों के कथित दुरुपयोग और अनियमितताओं पर कभी सवाल नहीं उठाए गए, जबकि राम मंदिरों और हिंदू धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार बयानबाजी की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान UBT के सांसदों ने प्रभावी भूमिका नहीं निभाई।
उन्होंने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर भी उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और न्याय का विषय था, लेकिन इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिया। वहीं CAA और NRC के मुद्दे पर उन्होंने सवाल उठाया कि उद्धव ठाकरे इन कानूनों का लगातार विरोध क्यों करते रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर उनका रुख क्या था।
म्हस्के ने कहा कि आज राम मंदिरों में दान पेटियों में कथित चोरी और अन्य मामलों पर सवाल उठाने वाले उद्धव ठाकरे ने वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और कुप्रबंधन के मुद्दों पर कभी आवाज नहीं उठाई। उन्होंने पूछा कि यदि हिंदू ट्रस्टों में गैर-हिंदुओं को स्थान नहीं दिया जाता, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों के शामिल किए जाने का विरोध क्यों किया गया।
उन्होंने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET), म्हाडा भर्ती और स्वास्थ्य विभाग भर्ती सहित कई भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही। उन्होंने कहा कि आज NEET पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर UBT राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जबकि अपने कार्यकाल के मामलों पर वह जवाब देने से बच रही है।
पत्रकार परिषद के दौरान सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि उद्धव ठाकरे को हिंदुत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा, वक्फ बोर्ड, CAA-NRC, ट्रिपल तलाक और अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुए पेपर लीक जैसे मुद्दों पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

