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  • World of Concrete India 2026: वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया 2026 में एस्कोलाइट ने पेश किए आधुनिक निर्माण समाधान!

    World of Concrete India 2026: वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया 2026 में एस्कोलाइट ने पेश किए आधुनिक निर्माण समाधान!

    World of Concrete India 2026: एडवांस्ड कंस्ट्रक्शन ब्लॉक और कंस्ट्रक्शन केमिकल्स बनाने वाली कंपनी एस्कोलाइट ने 3 से 5 जून तक आयोजित वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया 2026 प्रदर्शनी में भाग लेकर अपने अत्याधुनिक निर्माण समाधानों का प्रदर्शन किया।

    प्रदर्शनी में कंपनी ने वॉलिंग सॉल्यूशन्स, वॉटरप्रूफिंग सिस्टम, टाइल एवं स्टोन इंस्टॉलेशन, स्ट्रक्चरल रिपेयर और प्रोटेक्टिव कोटिंग्स से जुड़े उत्पादों को लाइव डेमो के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस दौरान आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर्स, बिल्डर्स और अन्य उद्योग विशेषज्ञों ने कंपनी के उत्पादों और तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक नवीन अश्वानी ने कहा कि इस मंच ने उद्योग जगत के विशेषज्ञों को नए विचारों और नवाचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि एस्कोलाइट का लक्ष्य उच्च गुणवत्ता, टिकाऊ और भरोसेमंद निर्माण समाधान उपलब्ध कराना है, जो भविष्य की बुनियादी ढांचा आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

  • Shramjeevi Sanghatana Protests: घटिया कंक्रीट सड़क के खिलाफ श्रमजीवी संगठन का प्रदर्शन, सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय पर मोर्चा

    Shramjeevi Sanghatana Protests: घटिया कंक्रीट सड़क के खिलाफ श्रमजीवी संगठन का प्रदर्शन, सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय पर मोर्चा

    Shramjeevi Sanghatana Protests: भिवंडी तालुका के गोमतारा किला से देपोली मार्ग पर जिला योजना समिति के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कंक्रीट सड़क की गुणवत्ता को लेकर श्रमजीवी संगठन ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने भादवड स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग (लोनिवि) कार्यालय पर मोर्चा निकालकर धरना दिया और सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।

    जानकारी के अनुसार, पिळंझे ग्राम पंचायत के अंतर्गत देपोली से गोमतारा किला मार्ग पर स्थित भवरपाडा, नंबरपाडा और खरमपाडा जैसे आदिवासी बस्तियों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिला योजना समिति के माध्यम से दो करोड़ रुपये की निधि मंजूर की गई थी।

    श्रमजीवी संगठन का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण कार्य अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया गया है। इस संबंध में स्थानीय ग्रामीणों और संगठन की ओर से 16 मार्च को सार्वजनिक निर्माण विभाग को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने न तो स्थल निरीक्षण किया और न ही तकनीकी जांच कर कोई कार्रवाई की।

    विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व श्रमजीवी संगठन के तालुका सचिव विश्वनाथ पासारी, उपाध्यक्ष चंद्रकांत रायत, महापोली गुट अध्यक्ष दयानंद पाटील सहित तानाजी लहांगे, सुरेश ठाकरे, दशरथ गवळी, किशोर पाटील, विठ्ठल पस्टे, निलेश शेलार, भीमाबाई पवार और सुनीताबाई भवर ने किया।

    प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सड़क निर्माण शुरू करते समय नियमानुसार परियोजना की जानकारी, स्वीकृत निधि और कार्य विवरण दर्शाने वाला सूचना फलक नहीं लगाया गया। इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान आवश्यक रोलर कॉम्पैक्शन नहीं किया गया और सीमेंट कंक्रीट सड़क पर निर्धारित मानकों के अनुसार पानी का छिड़काव भी नहीं किया गया।

    संगठन का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क पर कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। सड़क किनारे बनाई गई नालियां भी निम्न गुणवत्ता की सामग्री के कारण टूटने और ध्वस्त होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। कई जगहों पर सड़क की मोटाई स्वीकृत अनुमान (एस्टीमेट) से कम होने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है।

    श्रमजीवी संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है तथा संबंधित ठेकेदार को संरक्षण दिया जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की तत्काल निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, ठेकेदार का भुगतान रोका जाए तथा निर्धारित मानकों और स्वीकृत बजट के अनुसार सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही, कार्य की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

  • Mumbai–Ahmedabad Bullet Train: पालघर में तीसरी पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू पूरा

    Mumbai–Ahmedabad Bullet Train: पालघर में तीसरी पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू पूरा

    Mumbai–Ahmedabad Bullet Train: मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र की तीसरी पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू पालघर जिले के दहानू तालुका स्थित अंबेसरी गांव में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।यह सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, जिसे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की अप और डाउन दोनों पटरियों को समायोजित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

    सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग एवं ब्लास्टिंग (Controlled Drilling and Blasting) तकनीक का उपयोग करके की गई। खुदाई कार्य के दौरान संरचनात्मक स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्नत मॉनिटरिंग प्रणालियों और भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया।

    खुदाई गतिविधियों के दौरान कंपन, सुरंग के व्यवहार तथा आसपास की संरचनाओं की सतत निगरानी के लिए सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (SSP), 3D टार्गेट्स, स्ट्रेन गेज और सीस्मोग्राफ सहित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए गए।सुरंग के भीतर कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके लिए उचित वेंटिलेशन प्रणाली, अग्नि सुरक्षा उपाय, नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था तथा निरंतर भू-तकनीकी निगरानी सुनिश्चित की गई।

    गुजरात एवं महाराष्ट्र में पर्वतीय सुरंगों (MT) की स्थिति
    परियोजना में कुल आठ (08) पर्वतीय सुरंगों में से सात (07) महाराष्ट्र के पालघर जिले में तथा एक (01) गुजरात के वलसाड जिले में स्थित है।
    •⁠ ⁠MT-08 (350 मीटर) का ब्रेकथ्रू 5 अक्टूबर 2023 को पूरा किया गया
    •⁠ ⁠MT-07 (417 मीटर) का ब्रेकथ्रू 1 जून 2026 को पूरा किया गया
    •⁠ ⁠MT-06 (454 मीटर) का ब्रेकथ्रू 3 फरवरी 2026 को पूरा किया गया
    •⁠ ⁠MT-05 (1.5 किमी) का ब्रेकथ्रू 2 जनवरी 2026 को पूरा किया गया
    •⁠ ⁠MT-04 में लगभग 60% कार्य प्रगति हासिल की जा चुकी है
    •⁠ ⁠MT-03 में 80% से अधिक खुदाई कार्य पूरा हो चुका है
    •⁠ ⁠MT-02 और MT-01 का कार्य निरंतर प्रगति पर है

    इस पर्वतीय सुरंग की खुदाई पूर्ण होने के साथ ही महाराष्ट्र में पिछले पाँच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का सफलतापूर्वक उत्खनन पूरा किया जा चुका है, जो परियोजना के सबसे जटिल खंडों में से एक में तीव्र प्रगति को दर्शाता है।वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित सभी तीन पर्वतीय सुरंगों का उत्खनन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

    मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इन दोनों औद्योगिक शहरों के बीच के मार्ग में तीन (03) पर्वतीय सुरंगें (MT-08, MT-07 एवं MT-06) शामिल हैं।

  • Kalyan-Dombivli Infrastructure: कल्याण-डोंबिवली बनेगा विकास और रोजगार का नया हब; सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का वादा!

    Kalyan-Dombivli Infrastructure: कल्याण-डोंबिवली बनेगा विकास और रोजगार का नया हब; सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का वादा!

    Kalyan-Dombivli Infrastructure: शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा है कि आने वाले वर्षों में कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र विकास और रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने बताया कि महायुति सरकार मुंबई पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए एमएमआर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं शुरू कर रही है। डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक हब, मेट्रो विस्तार और जल परिवहन परियोजनाओं से क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाली है।

    डॉ. शिंदे ने बताया कि बढ़वण बंदरगाह परियोजना में करीब 75 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वहीं कल्याण रोड, ऐरोली-कटई फ्रीवे, मेट्रो नेटवर्क और वॉटर ट्रांसपोर्ट जैसी योजनाओं से पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना के तहत देशभर में 101 जलमार्ग विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कल्याण को जलमार्ग के जरिए मुंबई, नवी मुंबई और वसई-विरार से जोड़ा जाएगा। इसके लिए जेट्टी निर्माण का काम भी शुरू हो चुका है।

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    सांसद शिंदे के अनुसार, एमएमआर क्षेत्र में करीब 4 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रगति पर हैं। साथ ही मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में 377 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिलेगा और रोजाना मुंबई की यात्रा की जरूरत कम होगी।

    उन्होंने बताया कि बदलापुर से मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट तक एक्सेस कंट्रोल रोड बनाया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक की समस्या में राहत मिलेगी। वहीं अंबरनाथ के ऐतिहासिक शिव मंदिर का विकास सोमनाथ मंदिर और महाकाल लोक कॉरिडोर की तर्ज पर किया जाएगा, जिस पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    डॉ. शिंदे ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच क्लस्टर योजना आम लोगों को आधुनिक सुविधाओं वाले घर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा शुरू की गई इस योजना को मुंबई, ठाणे, कल्याण, डोंबिवली और अंबरनाथ में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

  • Chendani Koliwada: विकास के साथ विरासत बचाने की मांग, डिमार्केशन में लोकल लोगों की भूमिका जरूरी!

    Chendani Koliwada: विकास के साथ विरासत बचाने की मांग, डिमार्केशन में लोकल लोगों की भूमिका जरूरी!

    Chendani Koliwada: महाराष्ट्र सरकार के 29 जनवरी, 2026 के फैसले के मुताबिक, कोंकण इलाके में कोलीवाड़ा के डिमार्केशन का प्रोसेस शुरू हो गया है और ठाणे में चेंदनी कोलीवाड़ा का भी डिमार्केशन प्रपोज़्ड है। चेंदनी कोलीवाड़ा कोली जमात ट्रस्ट ने एडमिनिस्ट्रेशन से मांग की है कि लोकल कोली कम्युनिटी को भरोसे में लिए बिना यह प्रोसेस लागू न किया जाए। इस बारे में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर हरिश्चंद्र पाटिल को दिए गए आवेदन में सीधा सवाल उठाया गया है कि क्या डेवलपमेंट के नाम पर कोलीवाड़ा के वजूद पर किया जा सकता है।

    मनपा एरिया में अर्बन रिन्यूअल (क्लस्टर) स्कीम, अंडरग्राउंड मेट्रो, रेलवे लाइन पैरेलल रोड, कोस्टल रोड और पटनी से कोपरी ब्रिज प्रोजेक्ट्स से यह चिंता बढ़ गई है कि चेंदनी कोलीवाड़ा की असली बस्ती पर असर पड़ेगा।इससे पहले, ट्रांस हार्बर रेलवे प्रोजेक्ट से कई घर प्रभावित हुए हैं, और लगातार शहरीकरण के कारण कोली समुदाय के पारंपरिक मछली पकड़ने के कारोबार और लाइफस्टाइल को खतरा पैदा हो गया है। इसलिए, ट्रस्ट ने यह रुख अपनाया है कि सीमांकन करते समय न केवल जमीन बल्कि जीवनशैली को भी बचाना जरूरी है।

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    प्रस्तावित सीमांकन में मांग की गई है कि बढ़ा हुआ गांव, मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले इलाके, मैंग्रोव, सेज, नाव और जाल रखने की जगहें, पारंपरिक व्यवसाय के रास्ते, अंदरूनी सड़कें, आम खुली जगहें, साथ ही गांव के देवता और मंदिर परिसर को प्रस्तावित सीमांकन में शामिल किया जाए। चेंदनी कोलीवाड़ा को ठाणे की असली संस्कृति का एक स्तंभ माना जाता है।

    यहां काम करने वाली कोऑपरेटिव फिशिंग सोसाइटी न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि परंपरा की विरासत को भी बचाती हैं। इसलिए, आवेदन में साफ़ किया गया है कि डेवलपमेंट प्लान में कोलीवाड़ा को बचाना और कोली समुदाय का अस्तित्व पक्का करना ज़रूरी है। चेंदनी कोलीवाड़ा कोली जमात ट्रस्ट के प्रेसिडेंट अमरीश थानेकर, डिमार्केशन कमेटी के मेंबर सचिन थानेकर और आनंद कोली आवेदन देते समय मौजूद थे।

  • AMRUT 2.0: एएमआरयूटी 2.0 के लागू होने से ओडिशा शीर्ष राज्यों में शामिल!

    AMRUT 2.0: एएमआरयूटी 2.0 के लागू होने से ओडिशा शीर्ष राज्यों में शामिल!

    भुवनेश्वर: ओडिशा मजबूत शासन और शहरी जल सुरक्षा की दिशा में केंद्रित अपने प्रयासों को तेजी से लागू करने की दिशा में अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) 2.0 के तहत देश के सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है।(AMRUT 2.0)

    आवास और शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र (Minister Krishna Chandra Mohapatra) ने कहा कि ओडिशा की राष्ट्रीय रैंकिंग मौजूदा सरकार की मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता, निर्णायक नीतिगत ढांचे और परिणामोन्मुख शासन को दर्शाती है।

    उन्होंने कहा कि राज्य ‘विकसित ओडिशा’ (Viksit Odisha) के विजन के तहत मजबूत और भविष्य का शहर बनाने के लिए हर घर तक सुरक्षित और भरोसेमंद पीने का पानी पहुंचाने हेतु बड़े पैमाने पर शहरी जल परिवर्तन (Urban Water Transformation) का काम कर रहा है।

    राज्य सरकार ने 89 शहरी स्थानीय निकायों में एएमआरयूटी 2.0 को लागू करने की गति तेज कर दी है, जिसके तहत 4,030.18 करोड़ रुपये के कुल निवेश से 345 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सभी तक पानी पहुंचाना और शहरी जल निकायों का कायाकल्प करना है।

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    कुल परियोजनाओं में से 107 पहले ही पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी परियोजनाएं कड़ी निगरानी में तेजी से आगे बढ़ते हुए समय पर काम पूरा करने और जवाबदेही पर सरकार के जोर को दिखाता है। ओडिशा ने अपने शहरी जल एजेंडे के तहत 43 मिलियन लीटर प्रति दिन (MLD) की संयुक्त क्षमता वाले सात नए जल उपचार संयंत्र शुरू किए हैं, जिनसे लगभग 2.83 लाख लोगों को फायदा हुआ है।

    प्रमुख शहरी केंद्रों में चौबीसी घंटे जल आपूर्ति प्रणालियों के विस्तार के साथ-साथ 2.7 लाख से अधिक घरों में नल के कनेक्शन लगने से 5 लाख से अधिक शहरी निवासियों तक सुरक्षित पीने के पानी की पहुंच बेहतर हुई है।