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  • Kia India: किआ इंडिया ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया; देशभर के वर्कशॉप और ऑफिसों में सस्टेनेबिलिटी अभियान चलाया!

    Kia India: किआ इंडिया ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया; देशभर के वर्कशॉप और ऑफिसों में सस्टेनेबिलिटी अभियान चलाया!

    Kia India: किआ इंडिया, जो देश की अग्रणी मास-प्रीमियम कार कंपनी है, ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपने 500 से ज्यादा वर्कशॉप और कॉर्पोरेट ऑफिसों में पर्यावरण के लिए कई पहल किए हैं। ये पहल सस्टेनेबिलिटी, जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति किआ इंडिया की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। साथ ही, इनका उद्देश्य ग्राहकों, कर्मचारियों, डीलर पार्टनर्स और स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना है।

    इस अभियान के तहत किआ के सेवा केंद्र ग्राहकों की गाड़ी की प्रदूषण जांच मुफ्त में करेंगे और विशेष सत्रों में गाड़ी की देखभाल तथा पर्यावरण पर उसके असर के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही, ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान के सही निपटान के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

    इन सेवा केंद्रों को पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा करने के अधिकृत केंद्र बनाया गया है और 31 जगहों पर 1,000 किलोग्राम से ज्यादा ई-कचरा इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया है। किआ इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, सेल्‍स एण्‍ड मार्केटिंग, अतुल सूद ने कहा, “किआ इंडिया में पर्यावरण की परवाह हमारे पूरे कामकाज में शामिल है, देशभर के नेटवर्क से लेकर अनंतपुर के हमारे अत्याधुनिक संयंत्र तक।

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    सौर ऊर्जा अपनाने, संसाधनों के समझदारी से उपयोग और जिम्मेदार तौर-तरीकों के जरिए हम एक बेहतर कल की दिशा में काम कर रहे हैं। इस तरह की पहलें हमारी उस सोच को दर्शाती हैं जिसमें हम पर्यावरण के अनुकूल आवागमन को बढ़ावा देते हुए समाज और पर्यावरण के लिए भी कुछ अच्छा करना चाहते हैं।”

    इस अवसर पर किआ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट, कस्टमर एक्सपीरियंस, श्री भीमसेन गुलाबनी ने कहा, “पर्यावरण की देखभाल हमारे लिए कोई एक दिन का आयोजन नहीं है, यह हमारी कारोबारी सोच और कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह हमारे रोजाना के काम और समाज से हमारे जुड़ाव में साफ दिखती है।

    हमारे सेवा केंद्र रोज ग्राहकों से मिलते हैं, इसलिए हमारे पास बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाने और जिम्मेदार आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करने का खास अवसर है। प्रदूषण जांच, ई-कचरा संग्रह और सामुदायिक गतिविधियों जैसी पहलों के जरिए हम चाहते हैं कि पर्यावरण की परवाह ग्राहकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बने और हम मिलकर पर्यावरण पर सार्थक असर डाल सकें।”

    पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए किआ इंडिया अपने सेवा केंद्रों के कर्मचारियों को इस्तेमाल किए गए तेल को सही तरीके से संभालने, रखने और हटाने का विशेष प्रशिक्षण देगी। इसका मकसद पूरे नेटवर्क में कचरे के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही किआ के सेवा केंद्र अलग-अलग जगहों पर पौधे बांटेंगे और पेड़ लगाने के अभियान चलाएंगे।

  • NSE Social Stock Exchange को बड़ा बढ़ावा, CSR फंडिंग का रास्ता हुआ आसान!

    NSE Social Stock Exchange को बड़ा बढ़ावा, CSR फंडिंग का रास्ता हुआ आसान!

    NSE Social Stock Exchange: भारत के Social Stock Exchange (SSE) इकोसिस्टम को बड़ा बढ़ावा मिला है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने कंपनियों को अपने Corporate Social Responsibility (CSR) खर्च का एक हिस्सा Social Stock Exchange के माध्यम से लगाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) और सामाजिक संस्थाओं के लिए फंड जुटाने के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था के तहत कंपनियां अपने वार्षिक CSR बजट का एक निर्धारित हिस्सा Social Stock Exchange पर सूचीबद्ध पात्र गैर-लाभकारी संगठनों को Zero Coupon Zero Principal (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से उपलब्ध करा सकेंगी। MCA ने इसके लिए Companies Act, 2013 के तहत CSR नियमों में संशोधन किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में सामाजिक वित्तपोषण (Social Financing) को मजबूत करेगा। इससे सामाजिक प्रभाव वाले प्रोजेक्ट्स को अधिक पारदर्शी और विनियमित तरीके से वित्तीय सहायता मिल सकेगी। साथ ही कॉर्पोरेट कंपनियों को भी अपने CSR खर्च के प्रभाव को बेहतर तरीके से मापने और ट्रैक करने का अवसर मिलेगा।

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    Social Stock Exchange एक ऐसा विशेष प्लेटफॉर्म है जो सामाजिक संस्थाओं, गैर-लाभकारी संगठनों और निवेशकों को एक साथ जोड़ता है। पारंपरिक शेयर बाजार की तरह यहां वित्तीय लाभ कमाने के उद्देश्य से निवेश नहीं किया जाता, बल्कि सामाजिक प्रभाव और जनकल्याण को प्राथमिकता दी जाती है।

    NSE के अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सामाजिक क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उनका मानना है कि कंपनियों को अब एक संरचित और विनियमित प्लेटफॉर्म मिलेगा, जिसके जरिए वे अपने CSR फंड को प्रभावी सामाजिक परियोजनाओं तक पहुंचा सकेंगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से सामाजिक संगठनों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आसान होगी और सामाजिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक फंडिंग का रास्ता खुलेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

    गौरतलब है कि Social Stock Exchange की अवधारणा पहली बार केंद्रीय बजट 2019 में पेश की गई थी। इसका उद्देश्य पूंजी बाजार को सामाजिक विकास और समावेशी वृद्धि से जोड़ना था। नए नियमों के लागू होने के बाद इस पहल को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।