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  • Brazen Bribery Continues: 15 दिनों में कई गिरफ्तारी फिर भी नहीं थम रही यात्रियों की लूट!

    Brazen Bribery Continues: 15 दिनों में कई गिरफ्तारी फिर भी नहीं थम रही यात्रियों की लूट!

    Brazen Bribery Continues: भारतीय रेल में भ्रष्टाचार के खिलाफ मध्य रेलवे विजिलेंस की लगातार कार्रवाई के बावजूद ट्रेनों में कथित रिश्वतखोरी और अवैध वसूली का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में मध्य रेलवे विजिलेंस ने 18 जून 2026 को ट्रेन संख्या 22359 मुंबई सीएसएमटी–पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस में तैनात टिकट इंचार्ज मुकेश कुमार को यात्रियों से लिए गए 23 हजार रुपये के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार मुकेश कुमार, जो ईस्ट सेंट्रल रेलवे के दानापुर मंडल में कार्यरत हैं, ट्रेन की पेंट्री कार में कथित रूप से वसूले गए पैसों की गिनती कर रहे थे। इसी दौरान पहले से निगरानी कर रही मध्य रेलवे विजिलेंस टीम ने छापा मारकर उन्हें पकड़ लिया।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले पंद्रह दिनों के भीतर विजिलेंस द्वारा कई टिकट जाँच कर्मचारियों को रिश्वत और अवैध वसूली के मामलों में पकड़े जाने के बावजूद रेलवे के कुछ कर्मचारियों में कार्रवाई का भय क्यों दिखाई नहीं दे रहा? आखिर किस संरक्षण और किस भरोसे पर यात्रियों से कथित वसूली का यह सिलसिला लगातार जारी है?

    रेल यात्रियों के बीच लंबे समय से यह शिकायत रही है कि खाली सीट, बर्थ समायोजन और टिकट संबंधी सुविधाओं के नाम पर कुछ कर्मचारी अवैध धन उगाही करते हैं। ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर रेलवे की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

    सूत्रों के अनुसार ट्रेनों की पेंट्री कारें भी कई बार ऐसे लेन-देन का सुरक्षित ठिकाना बन जाती हैं जहाँ नकदी का आदान-प्रदान यात्रियों और निगरानी तंत्र की नजरों से बचाने की कोशिश की जाती है। भ्रष्टाचार का यह मामला रेलवे व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है।

    मध्य रेलवे विजिलेंस की कार्रवाई सराहनीय है लेकिन सवाल यह है कि जब एक के बाद एक कर्मचारी पकड़े जा रहे हैं तब संबंधित मंडलों और जोनों के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही? क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार पर लगाम लग जाएगी या फिर उन अधिकारियों से भी जवाब माँगा जाएगा जिनकी निगरानी में यह सब चल रहा है? यात्रियों की जेब पर डाका डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उस सिस्टम की जवाबदेही तय करना जिसके रहते रिश्वतखोरी का यह सफर बेखौफ और अनवरत जारी है।

  • Vasai-Virar Bribery: वसई-विरार मनपा का लिपिक 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार!

    Vasai-Virar Bribery: वसई-विरार मनपा का लिपिक 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार!

    Vasai-Virar Bribery: महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ठाणे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वसई-विरार शहर महानगरपालिका के सातीवली विभागीय कार्यालय में कार्यरत लिपिक दिलीप लक्ष्मण लोखंडे (52) को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

    जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता को अधिकृत भूमि मालिक की ओर से अवैध कब्जा तथा बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई करवानी थी। इस कार्य के बदले आरोपी लिपिक दिलीप लोखंडे ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।

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    शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था। उसने 27 मई 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो, ठाणे कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसीबी द्वारा शिकायत की जांच एवं सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी ठाणे की टीम ने 2 जून 2026 को सातीवली स्थित विभागीय कार्यालय में जाल बिछाकर कार्रवाई की।

    शाम करीब 5:20 बजे शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते समय आरोपी लिपिक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी अधिकारियों ने आरोपी को हिरासत में लेकर वालीव पुलिस स्टेशन में आवश्यक प्रविष्टि दर्ज कराई है तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    यह कार्रवाई एसीबी ठाणे परिक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक शिवराज पाटील, अपर पुलिस अधीक्षक सुहास शिंदे एवं भागवत सोनावणे के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस अवसर पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है अथवा भ्रष्टाचार संबंधी कोई जानकारी हो तो तत्काल एसीबी से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं।