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  • Bharat Tiwari Encounter: उच्चतम न्यायालय ने भरत तिवारी एनकाउंटर जांच की याचिका खारिज की, उच्च न्यायालय जाने को कहा

    Bharat Tiwari Encounter: उच्चतम न्यायालय ने भरत तिवारी एनकाउंटर जांच की याचिका खारिज की, उच्च न्यायालय जाने को कहा

    Bharat Tiwari Encounter: उच्चतम न्यायालय ने बिहार के भोजपुर जिला में 28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी के फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया।

    न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी को पटना उच्च न्यायालय जाने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता देते हुए टिप्पणी की कि स्थानीय परिस्थितियों की बेहतर निगरानी के लिए उच्च न्यायालय जाना अधिक उचित होगा।

    अधिवक्ता विशाल तिवारी ने अपनी याचिका में संबंधित पुलिस टीम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने इस मौत की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन का भी आग्रह किया था।

    आरोपों के अनुसार, 17 जून को एक एनकाउंटर में भारत भूषण तिवारी की मौत हुई थी। याचिका में तिवारी के पिता और स्थानीय लोगों के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि आत्मसमर्पण करने और हथियार डाल देने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि तिवारी ने इस एनकाउंटर का अपने फेसबुक पेज पर लाइवस्ट्रीम किया था। यह घटना पुलिस के उस दावे के 24 घंटे के भीतर हुई, जिसमें उन्होंने तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए उसे सुरक्षित हिरासत में लेने की बात कही थी।

    याचिका में ‘पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले के दिशा-निर्देशों के पालन और निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाये गये थे। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि पुलिस का इस तरह कानून हाथ में लेना पूरी कानून व्यवस्था को ध्वस्त करता है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।

  • Bombay High Court: बम्बई उच्च न्यायालय को मिले छह नए स्थायी न्यायाधीश, केंद्र सरकार ने जारी की नियुक्ति अधिसूचना

    Bombay High Court: बम्बई उच्च न्यायालय को मिले छह नए स्थायी न्यायाधीश, केंद्र सरकार ने जारी की नियुक्ति अधिसूचना

    Bombay High Court: केंद्र सरकार ने बम्बई उच्च न्यायालय के छह अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति ने संविधान के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए इन नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान की है।

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    स्थायी न्यायाधीश बनाए गए न्यायाधीशों में निवेदिता प्रकाश मेहता, प्रफुल्ल सुरेंद्र कुमार खुबलकर, अश्विन दामोदर भोबे, रोहित वासुदेव जोशी, अद्वैत महेंद्र सेथना और प्रवीण शेषराव पाटिल शामिल हैं। ये सभी अब बम्बई उच्च न्यायालय में नियमित रूप से न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इन नियुक्तियों से न्यायालय की कार्यक्षमता बढ़ेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। न्यायपालिका में रिक्त पदों को भरने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Supreme Court New Judges: सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए जज, कुल संख्या बढ़कर होगी 37

    Supreme Court New Judges: सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए जज, कुल संख्या बढ़कर होगी 37

    Supreme Court New Judges: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इन न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 37 हो जाएगी।

    विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिटा सुब्रमणि मोहना तथा चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों/न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दी है।

    नियुक्त किए गए न्यायाधीशों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण पल्ली शामिल हैं।

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    सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, इन सभी की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पिछले महीने इन नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की गई।

    वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिटा सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर दो हो जाएगी। फिलहाल केवल B. V. Nagarathna महिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। अगस्त 2021 के बाद पहली बार किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति हुई है।

    हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। वर्तमान में शीर्ष अदालत में 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम Court की स्थापना के समय इसमें केवल आठ न्यायाधीश थे।

  • Calcutta High Court: कलकत्ता उच्च न्यायालय से तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक अदिति मुंशी और उनके पति को अंतरिम राहत!

    Calcutta High Court: कलकत्ता उच्च न्यायालय से तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक अदिति मुंशी और उनके पति को अंतरिम राहत!

    Calcutta High Court: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राजरहाट-गोपालपुर से तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक अदिति मुंशी और उनके पति देवराज चक्रवर्ती को अंतरिम राहत दे दी। न्यायमूर्ति जॉय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने मौखिक निर्देश दिया कि दोनों को मामले की अगली सुनवाई की तारीख 19 जून तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक पुलिस इस दंपती के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर पायेगी।

    अदालत में दंपती की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता विकास रंजन भट्टाचार्य पेश हुए, जबकि राज्य सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने रखा। आरोपों के मुताबिक, दंपती ने चुनावी हलफनामे में अपनी अकूत संपत्ति की घोषणा से बचने के लिए रिश्तेदारों के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां हस्तांतरित कर दी थीं।

    राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि राजरहाट-गोपालपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाली कीर्तन गायिका अदिति मुंशी ने चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति को कम कर दिखाया था। इन आरोपों का विरोध करते हुए भट्टाचार्य ने दलील दी कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर संपत्ति हस्तांतरित करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी दी भी गयी हो तो यह ज्यादा से ज्यादा चुनाव नियमों का उल्लंघन हो सकता है, कोई आपराधिक कृत्य नहीं।

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    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अतीत में हलफनामे से जुड़े चुनावी उल्लंघन के लगे आरोपों का भी हवाला दिया। दूसरी ओर राज्य सरकार ने दंपती की कमाई के स्रोतों पर सवाल उठाये और आरोप लगाया कि उन्होंने जबरन वसूली तथा जमीन कब्जाने के जरिये यह भारी संपत्ति जुटायी है। सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया कि दंपती के कलिम्पोंग में बैंक खाते थे और उन्होंने चुनावों से ठीक पहले कई खातों से पैसे निकाले थे।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चक्रवर्ती के करीबी सहयोगी बताये जाने वाले दो लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने आगे कहा कि चक्रवर्ती 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा के एक मामले में भी आरोपी हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति जॉय सेनगुप्ता ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और सबूत पेश करे, साथ ही जांच की प्रगति रिपोर्ट भी सौंपे।

    अदालत ने कहा कि तब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। आय से अधिक संपत्ति और चुनावी हलफनामों में आमदनी की जानकारी छिपाने के आरोपों में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अदिति मुंशी और चक्रवर्ती ने गुरुवार को अग्रिम जमानत के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। मामला शुक्रवार को सुनवाई के लिए आया था।

  • National Lok Adalat: नेशनल लोक अदालत में ठाणे जिले का राज्य में दबदबा; 29 हजार केस निपटाए!

    National Lok Adalat: नेशनल लोक अदालत में ठाणे जिले का राज्य में दबदबा; 29 हजार केस निपटाए!

    National Lok Adalat: नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी और महाराष्ट्र स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के निर्देशानुसार, साल की दूसरी ‘नेशनल लोक अदालत’ शनिवार, 9 मई, 2026 को ठाणे जिले में लगी। ठाणे जिले ने इस लोक अदालत में पेंडिंग केस निपटाने में अपना दबदबा बनाए रखा है और लगातार पांचवीं बार राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। चीफ डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज और डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन श्रीनिवास बी. अग्रवाल के मार्गदर्शन में, ठाणे और पालघर जिले की सभी अदालतों में कुल 110 पैनल के ज़रिए इस लोक अदालत की कार्रवाई की गई।

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    इस लोक अदालत में कुल 29 हजार 392 केस निपटाए गए। इसमें 12,186 लंबित मामले और 17,206 प्री-लिटिगेशन मामले शामिल हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से 63,42,52,648 रुपये का रिकॉर्ड समझौता किया गया है।इस बार 5, 10, 20 और यहां तक ​​कि 30 साल से लंबित कुल 567 पुराने मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया।मोटर दुर्घटना बीमा दावे: जिले में 120 मामलों में 15,64,000 रुपये का मुआवजा मंजूर किया गया।

    एक विशेष मामले में, मृतक के उत्तराधिकारियों को 87 लाख रुपये का मुआवजा चेक प्रदान किया गया। पारिवारिक सुलह: पारिवारिक विवादों के 30 मामलों में सफल समझौता किया गया, जिनमें से 7 मामलों में पति-पत्नी ने फिर से साथ रहने का फैसला किया।चेक अनादर और अन्य: चेक अनादर (एन.आई. एक्ट 138) के 1,146 मामलों का निपटारा किया गया और रु। 19 करोड़ 58 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। साथ ही, ट्रांसपोर्ट बिल के 6,983 मामलों का भी निपटारा किया गया।