Tag: Encroachment Issue

  • Monsoon Session: अधिवेशन में अवैध फेरीवालों और बांधकाम का मुद्दा उठेगा!

    Monsoon Session: अधिवेशन में अवैध फेरीवालों और बांधकाम का मुद्दा उठेगा!

    Monsoon Session: शहर में अनिधिकृत बांधकाम और फेरीवालों की भरमार है अधिकारियों की लापरवाही की वजह से माफिया ताकतवर हो गया है।वहीं मनपा आयुक्त अधिकारियों के खिलाफ एक्शन नहीं ले रहे हैं।विधायक संजय केलकर ने बताया कि आने वाले मॉनसून अधिवेशन में इस गंभीर समस्या को उठाया जाएगा। शहर में बिना इजाज़त के कंस्ट्रक्शन की भरमार है और ये कंस्ट्रक्शन सभी वार्ड में बड़ी संख्या में चल रहे हैं। इसकी वजह से आम लोगों और मनपा को मिलने वाली सुविधाओं पर दबाव पड़ रहा है और पैसे का नुकसान हो रहा है।

    दूसरी तरफ, बिना इजाज़त के फेरीवाले भी फुटपाथ और सड़कों पर कब्ज़ा करके बिजनेस कर रहे हैं। इस बिजनेस से करोड़ों रुपये का टर्नओवर होता है। ये दोनों ही समस्याएं ठाणे के टैक्सपेयर्स को परेशान कर रही हैं और शहर में माफिया मजबूत हो गया है मनपा के अधिकारी शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस बीच आयुक्त इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इन समस्याओं को लेकर ठाणे के लोगों में नाराजगी है और वे आने वाले मानसून अधिवेशन में इन मुद्दों को उठाकर राज्य सरकार को इसमें दखल देने के लिए मजबूर करेंगे, ऐसा केलकर ने बताया।

    कलवा के वाघोबानगर में बिना इजाज़त मस्जिद बनाने को लेकर मनपा ने आक्रामक रुख अपनाने के बाद कार्रवाई की, लेकिन केलकर ने यह भी राय दी कि अगर समय पर कार्रवाई की जाए तो भविष्य में झगड़े नहीं होंगे। सावरकरनगर में प्लान की गई सिद्धिविनायक सोसायटी में 110 परिवार और लोकमान्यनगर में शिव औदुंबर सोसायटी में 275 परिवार हैं। यहां SRA प्रोजेक्ट चल रहा है और उन्हें क्लस्टर में शामिल किया गया है। क्योंकि संबंधित प्रशासन दबाव में इन सोसाइटियों को क्लस्टर से बाहर नहीं कर रहा था, इसलिए स्थानीय नगरसेवक अमित सरैया ने निवासियों के साथ केलकर से मुलाकात की।

    निवासियों ने डर जताया कि SRA प्रोजेक्ट को क्लस्टर में घरों के लिए 20-25 साल तक इंतज़ार करना पड़ेगा। केलकर ने इस बारे में हाई-लेवल कमेटी के अधिकारियों से बात की, जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को क्लस्टर से बाहर कर दिया गया। इससे सैकड़ों परिवारों को राहत मिली है।इस कार्यक्रम में फाइलेरिया डिपार्टमेंट के कर्मचारियों के विरासत के अधिकार, रुस्तमजी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में पानी की कमी, फाइनेंशियल फ्रॉड जैसे कई विषयों पर चर्चा हुई। केलकर ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया और समाधान सुझाए। इस मौके पर नगरसेवक विकास पाटिल, अमित सरैया, सुरेश कांबले, पूर्व मेयर मनोहर गाढ़वे, स्वप्नाली सालवी, रक्षा यादव आदि मौजूद थे।

  • Bhiwandi Municipal Corporation: अगर गरीबों के घरों पर बुलडोजर चला, तो हम चुप नहीं बैठेंगे; सुरेश म्हात्रे की चेतावनी!

    Bhiwandi Municipal Corporation: अगर गरीबों के घरों पर बुलडोजर चला, तो हम चुप नहीं बैठेंगे; सुरेश म्हात्रे की चेतावनी!

    Bhiwandi Municipal Corporation: भिवंडी महानगरपालिका ने विकास प्राधिकरण बनाते समय अमीर और रसूखदार लोगों को फायदा पहुँचाने का काम जानबूझकर किया है। लेकिन, अगर इसकी वजह से आम जनता के घरों पर बुलडोजर चलाया जाएगा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। यह तीखी प्रतिक्रिया सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाळ्या मामा ने दी है।

    शहर के टेमघर इलाके के रहने वाले राजेश म्हात्रे के घर के पास की सड़क पहले विकास प्राधिकरण के नक्शे में छोटी थी। लेकिन, बिल्डरों को फायदा पहुँचाने के लिए जानबूझकर उस सड़क को राजेश म्हात्रे के घर की तरफ खिसका दिया गया है, जिससे उनका घर इसकी चपेट में आ रहा है।

    इस संबंध में राजेश म्हात्रे ने सांसद सुरेश म्हात्रे से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। इसके तुरंत बाद, सांसद ने सीधे नगर निगम के नगर रचना विभाग के सहायक निदेशक नितिन जाधव को फोन किया और मिलने का समय लिया। परंतु, शुक्रवार को जब सांसद सुरेश म्हात्रे नगर निगम मुख्यालय पहुँचे, तो अधिकारी नितिन जाधव वहाँ मौजूद नहीं थे।

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    उनकी अनुपस्थिति में सांसद ने अजय साबले से चर्चा की। उस समय भड़के सांसद सुरेश म्हात्रे ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “भिवंडी शहर का विकास प्राधिकरण किसे फायदा पहुँचाने के लिए बनाया गया है, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।

    यह विकास प्राधिकरण दो बार बदला गया है। अगर किसी को बचाना है, तो शौक से बचाइए; लेकिन अगर उसकी वजह से किसी गरीब का घर तबाह होगा, तो हम हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेंगे।” सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाळ्या मामा ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अधिकारियों को फोन करके मिलने का समय तय करने के बाद भी वे अनुपस्थित रहे।

    ठीक है, वे कभी न कभी तो दफ्तर आएँगे ही तब उनसे यह जवाब ज़रूर माँगा जाएगा कि एक सीधी सड़क को जानबूझकर क्यों मोड़ा गया? यह बड़े और अमीर लोगों के साथ सांठगांठ करके आम जनता को परेशान करने का सीधा मामला है।

  • Bhayandarpada Illegal mini-mall: घोडबंदर रोड के भायंदरपाड़ा में खड़ा हुआ अवैध मिनी मॉल; “इसका आका कौन?” — पूछ रही है ठाणे की जनता!

    Bhayandarpada Illegal mini-mall: घोडबंदर रोड के भायंदरपाड़ा में खड़ा हुआ अवैध मिनी मॉल; “इसका आका कौन?” — पूछ रही है ठाणे की जनता!

    Bhayandarpada Illegal mini-mall: ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र में अवैध निर्माणों का जाल फैलने का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। घोडबंदर रोड स्थित भायंदरपाड़ा इलाके में खड़े किए गए कथित अवैध मिनी मॉल को लेकर सूचना के अधिकार के तहत चौंकाने वाली जानकारी सामने आने का दावा किया जा है। “पालिका प्रशासन आखिर किसके दबाव में चुप बैठा है? इस अवैध मिनी मॉल का आका कौन है?” ऐसा सीधा सवाल ठाणे करो ने उठाया है।

    ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र की सरकारी जमीनें, वन विभाग की जमीनें, गुरुचरण भूमि तथा नागरिक सुविधाओं के लिए आरक्षित भूखंड भू-माफियाओं, बिल्डरों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से गायब किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध इमारतें, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और मिनी मॉल खड़े किए गए हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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    जनता दावा किया कि ठाणे शहर, कळवा, मुंब्रा, दिवा, घोडबंदर, कासार वडवली, वागळे इस्टेट, माजिवडा और मानपाडा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सरकारी और वन विभाग की जमीनों पर कब्जे किए गए हैं। कुछ राजनीतिक नेताओं ने खुद जमीनों पर कब्जा किया, जबकि कुछ जगहों पर अपने करीबी लोगों को इमारतें बनाने के लिए संरक्षण दिया गया।

    “अवैध निर्माण करने वालों, सरकारी जमीन हड़पने वालों, उन्हें संरक्षण देने वाले राजनीतिक नेताओं, पालिका अधिकारियों और बिल्डरों के खिलाफ सबूतों के साथ कड़ी कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी,” ऐसा इशारा भी ठाणे की जनता ने दिया। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर बड़ा खुलासा होने की संभावना से संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है।

    इस बीच, नागरिकों की जान जोखिम में डालने वाले अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने में प्रशासन विफल साबित हो रहा है। नागरिकों द्वारा यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि “पालिका प्रशासन के आखिर किन लोगों से आर्थिक संबंध हैं?” अब इन गंभीर आरोपों के बाद महाराष्ट्र शासन और संबंधित एजेंसियां क्या कार्रवाई करती हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।