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  • Financial Fraud Case: 73 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल फ्रॉड केस में पार्टनर गिरफ्तार; 14 दिन की पुलिस कस्टडी मांगी गई!

    Financial Fraud Case: 73 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल फ्रॉड केस में पार्टनर गिरफ्तार; 14 दिन की पुलिस कस्टडी मांगी गई!

    Financial Fraud Case: ठाणे सिटी इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने एक पार्टनरशिप फर्म, मेसर्स एकदंत हाउसिंग के पार्टनर, हसमुख सुरजानी शाह (उम्र 56) को 73 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया है और कोर्ट से उनकी 14 दिन की पुलिस कस्टडी मांगी है।

    इकनोमिक ऑफेंस विंग की दी गई जानकारी के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच, मेसर्स एकदंत हाउसिंग में पार्टनरशिप का फायदा उठाते हुए, फर्म के बैंक अकाउंट में मौजूद पैसे को वादी के जाली साइन का इस्तेमाल करके अपने, रिश्तेदारों और संबंधित संस्थाओं के अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया गया।

    शिकायत दर्ज की गई है कि इससे फर्म को करीब 73 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में नौपाड़ा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 420, 406, 467, 468, 471 वगैरह के तहत केस दर्ज किया गया है और जांच इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को ट्रांसफर कर दी गई है। इसके बाद, शाह को मंगलवार को विष्णुनगर में उनके घर से हिरासत में लिया गया। ऑपरेशन के दौरान क्राइम से जुड़े ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स भी ज़ब्त किए गए।

    जांच के दौरान, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने कोर्ट में कहा है कि आरोपी पर इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड होने का शक है और जाली साइन, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता लगाने, बेनिफिशियरी की जानकारी और दूसरे संभावित साथियों की तलाश के लिए उसकी पुलिस कस्टडी की ज़रूरत है। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि आरोपी जांच में उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं कर रहा है।

    इकनोमिक ऑफेंस विंग ने कोर्ट में जमा की गई रिपोर्ट में कहा है कि आरोपी के खिलाफ नौपाड़ा पुलिस स्टेशन में पहले से ही फ्रॉड और ब्रीच ऑफ ट्रस्ट से जुड़े दूसरे क्राइम दर्ज हैं। इस मामले की आगे की जांच पुलिस इंस्पेक्टर इंचार्ज मंदार लाड की गाइडेंस में चल रही है।

  • Navi Mumbai Police warns citizens: क्रिप्टोकरेंसी में झटपट मुनाफे का लालच पड़ सकता है भारी, नवी मुंबई पुलिस ने नागरिकों को किया सतर्क!

    Navi Mumbai Police warns citizens: क्रिप्टोकरेंसी में झटपट मुनाफे का लालच पड़ सकता है भारी, नवी मुंबई पुलिस ने नागरिकों को किया सतर्क!

    Navi Mumbai Police warns citizens: महाराष्ट्र पुलिस ने नागरिकों को क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि ठग झटपट मुनाफे और “गारंटीड रिटर्न” का लालच देकर लोगों को फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और अनजान लिंक के जरिए निशाना बना रहे हैं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और बिना जांच-पड़ताल के किसी निवेश ऑफर पर भरोसा न करें। साथ ही, साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की सलाह दी गई है। नवी मुंबई पुलिस ने संदेश में कहा है— “जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।”

  • Nauheera Shaik Arrested: शरिया कानून के नाम पर हजारों करोड़ के कथित घोटाले में हीरा ग्रुप प्रमुख नौहेरा शेख गिरफ्तार!

    Nauheera Shaik Arrested: शरिया कानून के नाम पर हजारों करोड़ के कथित घोटाले में हीरा ग्रुप प्रमुख नौहेरा शेख गिरफ्तार!

    Nauheera Shaik Arrested: शरिया सिद्धांतों पर आधारित निवेश योजना के नाम पर लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर कथित आर्थिक धोखाधड़ी करने के मामले में हीरा ग्रुप ऑफ कंपनी की प्रमुख Nauheera Shaik (नौहेरा शेख) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया है। मामले में उनसे पूछताछ जारी है और बड़ी संख्या में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

    कानूनी सूत्रों के अनुसार, संबंधित कंपनियों द्वारा शरिया सिद्धांतों का पालन करने वाली निवेश योजनाओं का दावा करते हुए देशभर के लोगों से धन एकत्र किया गया था। निवेश पर आकर्षक रिटर्न का वादा किए जाने के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने इन योजनाओं में पैसा लगाया। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को भुगतान किए जाने से लोगों का भरोसा बढ़ा और बाद में भारी रकम जुटाए जाने का आरोप जांच एजेंसियों द्वारा लगाया गया है।

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    हालांकि, समय बीतने के साथ कई निवेशकों को उनकी मूल राशि और वादा किया गया लाभ नहीं मिलने पर मामले को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद विभिन्न राज्यों में शिकायतें दर्ज हुईं और जांच एजेंसियों ने आर्थिक अनियमितताओं की जांच शुरू की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस मामले में हजारों करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच की जा रही है।

    तफ्तीश के दौरान ईडी ने आरोपियों से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए कुछ परिसंपत्तियां जब्त की हैं। प्रभावित निवेशकों को राहत दिलाने के उद्देश्य से जब्त संपत्तियों से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • ₹10 Crore Scam: सुरक्षा रक्षक पंजीकरण में ₹10 करोड़ के घोटाले का आरोप, ACB जांच की मांग से मचा हड़कंप!

    ₹10 Crore Scam: सुरक्षा रक्षक पंजीकरण में ₹10 करोड़ के घोटाले का आरोप, ACB जांच की मांग से मचा हड़कंप!

    ₹10 Crore Scam: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल (बृहन्मुंबई एवं ठाणे जिला) के माध्यम से सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता और न्यायालय को गुमराह करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में सुरक्षा रक्षक मंडल के अध्यक्ष अशोक डोके सहित संबंधित अधिकारियों की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से विस्तृत जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता तथा फाइट फॉर राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद पांडुरंग घोलप ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, श्रम मंत्री आकाश फुंडकर और श्रम विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत देकर की है।

    शिकायत के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 को मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के तत्कालीन उपायुक्त मारुति पांडुरंग गायकवाड ने मे. सैनिक इंटेलिजेंस सिक्युरिटी प्रा. लि. नामक ठेकेदार कंपनी के माध्यम से कार्यरत सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण के लिए पत्र जारी किया था। हालांकि, संबंधित सुरक्षा रक्षक वास्तव में कहां, कितने समय से और किस विभाग में कार्यरत थे, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

    मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया है कि उच्च न्यायालय में केवल 161 सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण से संबंधित याचिका लंबित होने के बावजूद लगभग 490 अतिरिक्त सुरक्षा रक्षकों का पंजीकरण किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना और प्रशासन द्वारा न्यायालय को गुमराह करने का मामला बताया है।

    शिकायत में आगे कहा गया है कि न्यायालय में दायर शपथपत्र में तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड ने लगभग 650 सुरक्षा रक्षकों की कोई जानकारी महानगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी, जबकि इससे पहले उन्हीं अधिकारियों द्वारा पंजीकरण के लिए अनुशंसा पत्र जारी किया गया था। इससे शासन और न्यायालय को विरोधाभासी जानकारी देने का आरोप और गंभीर हो गया है।

    इसके अलावा, संबंधित सुरक्षा रक्षकों से पंजीकरण खर्च के नाम पर ₹1 लाख से ₹1.50 लाख तक की राशि अग्रिम कर्ज के रूप में लेकर उनके वेतन से कटौती किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे सुरक्षा रक्षकों के आर्थिक शोषण और बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का संकेत बताया है।

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    वहीं सुरक्षा रक्षक मंडल के निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में संबंधित 650 सुरक्षा रक्षकों को पिछले 15 वर्षों से कार्यरत बताते हुए उनके पंजीकरण पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही गई है। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जानकारी वास्तविकता से मेल नहीं खाती और शासन व न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से गलत जानकारी प्रस्तुत की गई है।

    उल्लेखनीय है कि तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड बाद में नवी मुंबई महानगरपालिका में कार्यरत रहते हुए भ्रष्टाचार के एक मामले में ACB द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इससे पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने इस पूरे मामले में ₹10 करोड़ से अधिक के आर्थिक घोटाले का दावा करते हुए अवैध पंजीकरण तत्काल रद्द करने, सुरक्षा रक्षकों से वसूली गई राशि वापस करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

    इन आरोपों के बाद मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल का कामकाज एक बार फिर विवादों में आ गया है। अब राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। “यदि सुरक्षा रक्षकों को न्याय नहीं मिला तो तीव्र जन आंदोलन किया जाएगा,” ऐसा इशारा शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने दिया है।