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  • Papon’s Dream Project: पापोन का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘महफ़िल्ज़ विद पापोन’ पहले गीत ‘अपने ख़िलाफ़’ के साथ हुआ शुरू!

    Papon’s Dream Project: पापोन का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘महफ़िल्ज़ विद पापोन’ पहले गीत ‘अपने ख़िलाफ़’ के साथ हुआ शुरू!

    Papon’s Dream Project: गायक पापोन ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘महफ़िलज़ विद पापोन’ का आगाज़ पहले गीत ‘अपने ख़िलाफ़’ के साथ किया है। ‘महफ़िलज़ विद पापोन’ के तहत जारी किया गया पहला गीत ‘अपने ख़िलाफ़’ शायरी और समकालीन संगीत का संगम प्रस्तुत करता है। यह बहुप्रतीक्षित म्यूज़िकल प्रोजेक्ट दो ईपी के रूप में रिलीज़ किया जाएगा, जिसमें गीतकार इरशाद कामिल और वैभव मोदी की रचनात्मक प्रतिभा देखने को मिलेगी।

    पापोन ने इस प्रोजेक्ट को केवल एक एल्बम नहीं, बल्कि एक ऐसे अनुभव के रूप में तैयार किया है जो पारंपरिक महफ़िलों की आत्मीयता और गर्मजोशी से प्रेरित है। ‘लिविंग-रूम कॉन्सेप्ट’ पर आधारित यह प्रोजेक्ट श्रोताओं को वास्तविक महफ़िल जैसा अनुभव देने का प्रयास करता है। अपनी विशिष्ट गायकी और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए पहचाने जाने वाले पापोन इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नई पीढ़ी को ग़ज़लों की दुनिया से जोड़ना चाहते हैं। इसमें सदाबहार शायरी और आधुनिक संगीत का संतुलित मेल देखने को मिलेगा।

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    ‘महफ़िलज़ विद पापोन’ के संगीत वीडियो में पापोन को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के सामने लाइव प्रस्तुति देते हुए दिखाया गया है, जिससे वास्तविक महफ़िल का माहौल और उसकी भावनात्मक गहराई उभरकर सामने आती है। ‘अपने ख़िलाफ़’ को इस म्यूज़िकल यात्रा की पहली कड़ी बताया जा रहा है। रूहानी संगीत और भावनात्मक बोलों से सजा यह गीत ग़ज़ल शैली को नए रूप में प्रस्तुत करता है।

    यह रिलीज़ ऐसे समय में हुई है जब पापोन के ‘शाम-ए-महफ़िल’ लाइव शो को देश के विभिन्न शहरों में दर्शकों का शानदार प्रतिसाद मिल रहा है। ‘अपने ख़िलाफ़’ के रिलीज़ होने के साथ ही ‘महफ़िलज़ विद पापोन’ की आधिकारिक शुरुआत हो गई है, जो श्रोताओं को संगीत, शायरी और भावनाओं से भरी एक विशेष यात्रा पर ले जाने का प्रयास करती है।

  • Ghazal: चुप-चुप क्यों रहते हो तुम

    Ghazal: चुप-चुप क्यों रहते हो तुम

    चुप-चुप क्यों रहते हो तुम
    क्यों दर्द इतना सहते हो तुम
    ख़ामोशी के साये में क्यों
    खुद को तुम रखते हो गुम
    आखिर क्या मजबूरी है
    क्यों दर्द को सहना ज़रूरी है
    जीवन के सूनेपन की ये
    कैसी कथा अधूरी है ?
    दिल में तुम तड़पोगे कब तक
    उलझन से निकले न अब तक
    भंवर जाल में फंसे हुए हो
    देख रहा है ये सारा जग
    लब तक अपने आने दो
    सारी परतें खुल जाने दो
    जो शिकवे गिले थे उन सबको
    ऑंसु में बह जाने दो
    अच्छा साथ निभाया है
    दिल को भी समझाया है
    मुस्कान तुम्हारे होंठों की
    क्यों फूलों सा मुरझाया है ?
    कलियों सा खिलना सीखो
    भौरों सा फिरना सीखो
    अरमानों के पंख लगाकर
    पक्षी सा उड़ना सीखो
    अच्छी नहीं तन्हाई है मिलना
    नियामत-ए-खुदाई है
    दिल का हाल सुनाने वाला
    ही सच्चा सौदाई है
    नीर कहे नहीं गुमसुम रहना
    जीवन को तुम खुश रह जीना
    खुशियां बाॅंटो और बढ़ेंगी
    जग को भी तुम खुश कर देना

    संजीव कुमार घोष (नीर)

  • Ghazal: वो मेरी चालाकियों पर मुस्कुरा कर रह गया…….

    Ghazal: वो मेरी चालाकियों पर मुस्कुरा कर रह गया…….

    वो मेरी चालाकियों पर मुस्कुरा कर रह गया
    और कुछ बोले बिना ही बात सारी कह गयाI(Ghazal)

    स्वप्न जो उसने बुने थे सारे आलम के लिए
    जंग के उन्माद में कैसे कहाँ सब ढह गया

    उसने तो चाहा नहीं था पर यकायक एक दिन
    ढाई आखर जो दबा रक्खा था दिल में कह गया

    ज़िन्दगी तूफ़ान से लड़ कर गुज़ारी इसलिए
    दोस्तों ने दीं थीं जो पीड़ाएँ वो भी सह गया

    प्रश्न विचलित कर रहे थे पर नहीं उत्तर मिला
    अपनी पीड़ाओं को सहते एक दिन वह दह गया

    दूर ही हरदम रहा वो जश्न के माहौल से
    जंग है हक़ के लिए ये सोच कर ही वह गया

    किशन तिवारी
    भोपाल